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मौसमी बीमारियों से है बचना,तो रोज करें खास ताम्र-जल का सेवन

नेचुरोपैथी में कई ऐसी सरल विधियां हैं, जिनका उपयोग करके हम कई तरह के रोगों से अपना बचाव कर सकते हैं। तांबे के पात्र में रखे जल का सेवन करना भी एक ऐसा ही सरल लेकिन प्रभावी उपाय है। ताम्र-जल के फायदों के बारे में जानिए।

मौसमी बीमारियों से है बचना,तो रोज करें खास ताम्र-जल का सेवन

नेचुरोपैथी में कई ऐसी सरल विधियां हैं, जिनका उपयोग करके हम कई तरह के रोगों से अपना बचाव कर सकते हैं। तांबे के पात्र में रखे जल का सेवन करना भी एक ऐसा ही सरल लेकिन प्रभावी उपाय है। ताम्र-जल के फायदों के बारे में जानिए।

प्राचीन समय से ही हमारे देश के आयुर्वेद विशेषज्ञों ने छोटी-छोटी सामान्य, सस्ती और आसानी से उपलब्ध चीजों से सेहत संवारने के कामयाब नुस्खे ईजाद किए। इन्हीं में से एक है, ताम्र-जल।

आयुर्वेद में किसी तांबे के पात्र में स्टोर किए गए जल के कई औषधीय फायदे बताए गए हैं। इसी जल को ताम्र-जल कहा गया है। वैद्य राधेश्याम शर्मा के मुताबिक रोजाना ताम्र-जल के सेवन से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से निजात मिलती है। इससे वात, पित्त और कफ का संतुलन भी बरकरार रहता है।

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ताम्र-जल के फायदे :

1.आठ घंटे स्टोर करें जल

आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक तांबे के पात्र में जल भरने से इसमें कई सकारात्मक गुण उत्पन्न हो जाते हैं। लेकिन इसके लिए जल का पात्र में कम से कम 8 घंटे तक स्टोर रहना जरूरी है।

इस जल का सेवन करने से पाचन प्रणाली दुरुस्त होती है और डायरिया और जॉन्डिस जैसी समस्याओं का समाधान करने में मदद मिलती है।

2.हार्ट के लिए फायदेमंद

ताम्र-जल का सेवन हार्ट के लिए भी फायदेमंद माना गया है। क्योंकि इससे रक्तचाप नियंत्रित रहता है और हार्ट रेट भी दुरुस्त रहता है। ताम्र-जल पीने से कोलेस्ट्रॉल का लेवल भी कम होता है और हृदय में रक्त का प्रवाह सुचारु रूप से होता है।

3.ई.कोलाई का नाश

वैद्य राधेश्याम शर्मा बताते हैं कि आयुर्वेद के मुताबिक ताम्र-जल का नियमित उपयोग करने से ई. कोलाई और ए.ऑरियस जैसे घातक बैक्टीरिया का भी नाश होता है, जो शरीर में कई प्रकार की बीमारियों का सबब बनते हैं। ऐसा तांबे के ओलीगा-डायनेमिक इफेक्ट के कारण होता है।

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4.आर्थराइटिस में लाभकारी

ताम्र-जल में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, जो आर्थराइटिस और इंफ्लेम्ड ज्वाइंट्स की समस्या से राहत दिलाते हैं। इम्यून सिस्टम और हड्डियों को मजबूती देने के इसके गुणों की वजह से रुमेटॉइड आर्थराइटिस और आर्थराइटिस के मरीजों के लिए यह काफी फायदेमंद होता है।

5.थाइरॉयड रहे फिट

ताम्र-जल का नियमित सेवन करने से थाइरॉयड ग्रंथि की कार्यप्रणाली भी दुरुस्त होती है। अकसर थाइरॉयड की समस्या उन लोगों में पाई जाती है, जिनके शरीर में कॉपर लेवल कम होता है।

थाइरॉयड ग्रंथि की कार्यप्रणाली सुचारू रूप से संचालित होने के लिए इस मिनरल की जरूरत होती है। ताम्र-जल पीते रहने से शरीर में कॉपर की कमी नहीं होती।

6.बढ़ाए सुंदरता

विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घ अवधि तक ताम्र-जल के सेवन करने से त्वचा के छोटे मोटे विकार स्वयं ही दूर हो जाते हैं। स्किन पर दाग-धब्बों से काफी हद तक राहत मिलती है।

कॉपर में ऐसे गुण होते हैं, जो मेलानिन जेनरेट करते हैं और नई कोशिकाओं के उत्पादन में मदद देते हैं, जो स्किन की ऊपरी सतह का लगातार नवीनीकरण करती रहती है। इतना ही नहीं इसमें एंटीऑक्सीडेंटल गुण भी होते हैं, जो एजिंग को स्लो करते हैं।

7.वजन रखे नियंत्रित

ताम्र-पात्र के जल का सेवन करने से वजन कम करने में भी मदद मिलती है। कॉपर में फैट को तोड़ने की क्षमता होती है। जिससे आपका वर्कआउट प्रोग्राम ज्यादा सफल हो सकता है।

8.एनीमिया से बचाव

इसके सेवन से एनीमिया यानी रक्त की कमी की समस्या पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है। पौष्टिक और रक्त बढ़ाने वाले आहार के साथ-साथ अपनी डाइट रूटीन में ताम्र-पात्र के जल को भी शामिल करें तो ज्यादा लाभ होगा।

9.घाव भरने में आसानी

आयुर्वेद विशेषज्ञ ताम्र-जल को एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर मानते हैं। उनका मानना है कि जो लोग नियमित रूप से ताम्र-जल पीते हैं उनके घाव तुलनात्मक रूप से जल्दी भर सकते हैं।

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