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स्वस्थ रहने के लिए बहुत जरूरी है महिलाओं का ''बिछिया'' पहनना

महिलाओं का बिछिया पहनना केवल प्रतीक नहीं है कि वह विवाहित हैं बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है।

स्वस्थ रहने के लिए बहुत जरूरी है महिलाओं का
नई दिल्ली. शादीशुदा महिलाओं के बीच सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व होता है और इन सोलह श्रृंगारों में 15वें पायदान पर पैर की अंगुलियों में बिछिया पहनने का रिवाज है। सामाजिक मान्यताओं के अनुसार शादी के बाद प्रत्येक महिला को बिछिया पहननी चाहिए। इसे पहनना शुभ माना जाता है। आमतौर पर बिछिया चांदी की होती है। क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे वास्तविक कारण क्या है? तो हम आपको बताते हैं आखिर महिलाएं बिछिया क्यों पहनती हैं।
महिलाओं का बिछिया पहनना केवल प्रतीक नहीं है कि वह विवाहित हैं बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। अगर आप ध्यान दें तो पाएंगे कि बिछिया हमेशा दाहिने तथा बाएं पैर की दूसरी अंगुली में ही पहनी जाती है। लेकिन आपने कभी गौर नहीं किया होगा कि आखिर क्यों? बता दें कि यह गर्भाशय को नियन्त्रित करेगी और गर्भाशय में संतुलित ब्लड प्रेशर द्वारा उसे स्वस्थ रखेगी। पैरों में बिछिया महिलाओं की प्रजनन क्षमता बढ़ाने में बहुत अहम भूमिका निभाती है।
प्रजनन क्षमता बढ़ाने के अलावा महिलाओं में फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए बिछिया के महत्व को माना गया है, साइटिक नर्व की एक नस को बिछिया दबाती है जिस वजह से आस-पास की दूसरी नसों में रक्त का प्रवाह तेज होता है और यूटेरस, ब्लैडर व आंतों तक रक्त का प्रवाह ठीक होता है।
बिछिया को दोनों पैरों में पहनने से महिलाओं का मासिक चक्र नियमित होता है। बिछिया एक्यूप्रेशर का भी काम करती है जिससे तलवे से लेकर नाभि तक की सभी नाड़िया और पेशियां व्यवस्थित होती हैं। चांदी एक अच्छी सुचालक है इसलिए यह पृथ्वी की ध्रुवीय ऊर्जा को ठीक करके शरीर तक पहुंचाती है जिससे पूरा शरीर तरोताजा हो जाता है। आजकल फैशन के तौर पर दो या तीन अंगुलियों में भी बिछिया पहनते हैं। दोनों पैरों की दूसरी और तीसरी उंगली में बिछिया पहनने से सिएटिक नस का दबाव बढ़ता है और इस वजह से आसपास की नसें जो यूटेरस व प्रजनन तंत्र से जुड़ी हैं, इनमें रक्त प्रवाह ठीक रहता है और यूटेरस का संतुलन बना रहता है।
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