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पहली बार मां बनी हैं तो रखें इन बातों का ध्यान, ऐसे करें अपने मासूम की देखभाल

नवजात शिशु का स्वास्थ्य बहुत नाजुक होता है। जरा सी लापरवाही उनके लिए हानिकारक हो सकती है। इसलिए हर मां के लिए यह जरूरी है कि वह अपने शिशु के स्वास्थ्य को लेकर सजग रहे।

पहली बार मां बनी हैं तो रखें इन बातों का ध्यान, ऐसे करें अपने मासूम की देखभाल

नवजात शिशु का स्वास्थ्य बहुत नाजुक होता है। जरा सी लापरवाही उनके लिए हानिकारक हो सकती है। इसलिए हर मां के लिए यह जरूरी है कि वह अपने शिशु के स्वास्थ्य को लेकर सजग रहे, उनकी प्रॉपर केयर करें। शिशु की प्रॉपर केयर से जुड़ी कुछ जरूरी टिप्स के बारे में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आर.के. जैन इस बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं।

महिलाओं को न सिर्फ गर्भावस्था में अपने होने वाले शिशु का ख्याल रखना होता है बल्कि मां बनने के बाद उनका दायित्व और बढ़ जाता है। उन्हें शिशु की केयर से जुड़ी छोटी-छोटी बातें ध्यान रखनी होती हैं। कई बार इस विषय में मांएं जरूरी बातें नहीं जानतीं। यहां हम आपको ऐसी ही कुछ सलाह दे रहे हैं, जिन्हें अपनाकर अपने नवजात शिशु की पर्याप्त देखरेख कर पाएंगी।

ऐसे करें मसाज

मसाज से शिशु के शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है, शिशु के शरीर को बहुत सुकून मिलता है, उसे अच्छी नींद आती है और मां के साथ उसकी बॉन्डिंग भी बेहतर होती है। लेकिन मां को मसाज बहुत सावधानी से करनी चाहिए। मसाज हमेशा सधे हुए हाथों से करें।

अगर आप शिशु की सही तरह से मसाज करना नहीं जानती हैं, तो प्रीनेटल क्लास में या किसी अनुभवी महिला से इसका प्रशिक्षण ले सकती हैं। मसाज के लिए सही स्ट्रोक और तकनीक सीख लें।

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आप मसाज के लिए जिस लोशन या तेल का इस्तेमाल कर रही हैं, उसे पहले पैच टेस्ट से परख लें। इससे पता चल जाएगा कि उस लोशन या तेल से शिशु को किसी प्रकार की एलर्जी है या नहीं।

पर्याप्त नींद है जरूरी

शिशु के जन्म के बाद मां उसके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहती हैं, उससे ढेर सारी बातें करना चाहती हैं। इसमें कोई बुराई भी नहीं है।

लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि जन्म के बाद शिशु का ज्यादातर समय सोने यानी नींद में गुजरता है। आप उन्हें जबरन नींद से उठाने की कभी भी कोशिश न करें। इससे उसका विकास प्रभावित हो सकता है।

अगर शिशु जगा हुआ है, तो जबरदस्ती सुलाने की कोशिश भी न करें। दरअसल, कई शिशु रात के बजाय दिन में सोते हैं। इससे मां की जीवनशैली भी प्रभावित होती है।

इसके लिए आपको चाहिए कि उसे दिन-रात के बीच अंतर समझाएं। दिन में उसके आसपास रोशनी रहने दें और हल्का-फुल्का शोर भी होने दें। रात में कमरे में मंद रोशनी रखें और माहौल शांत रखें। इससे उसका रूटीन धीरे-धीरे सही ट्रैक पर आ जाएगा।

शिशु के मानसिक विकास के लिए

शिशु का बेहतर मानसिक विकास मां के सान्निध्य में ही हो सकता है। यही वजह है कि मां को अपने शिशु के साथ बेहतर बॉन्डिंग बनाने की कोशिश करनी चाहिए।

इसके लिए मां अपने शिशु के साथ ढेर सारी बातें करें, उसे गुदगुदाएं और उसका आलिंगन करें। जब वह थका हुआ लगे, तो उसे मीठी-मीठी लोरी सुनाएं। इससे आप दोनों के बीच भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा और शिशु का मानसिक विकास बेहतर होगा।

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