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बदलते मौसम में अस्थमा से हैं परेशान, तो इन खास तरीकों से रखें अपना ख्याल

बढ़ते प्रदूषण और बदलते मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी का सामना अस्थमा के पेशेंट्स को करना पड़ता है, क्योंकि मौसम की ठंडक और धुंए की वजह से उन्हें सांस लेने में बेहद तकलीफ होती है। ऐसे में अगर सावधानियां न बरती जाएं, तो परेशानी काफी गंभीर स्थिति में पहुंच जाती है और पेशेंट के शरीर मे ऑक्सीजन की कमी का भी सामना करना पड़ता है।

बदलते मौसम में अस्थमा से हैं परेशान, तो इन खास तरीकों से रखें अपना ख्याल

बढ़ते प्रदूषण और बदलते मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी का सामना अस्थमा के पेशेंट्स को करना पड़ता है, क्योंकि मौसम की ठंडक और धुंए की वजह से उन्हें सांस लेने में बेहद तकलीफ होती है। ऐसे में अगर सावधानियां न बरती जाएं, तो परेशानी काफी गंभीर स्थिति में पहुंच जाती है और पेशेंट के शरीर मे ऑक्सीजन की कमी का भी सामना करना पड़ता है।

इसलिए आज हम आपको कुछ खास सावधानियां बता रहे हैं जिससे बदलते हुए मौसम में भी आप अपना ख्याल रख पायेगें।

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क्या है अस्थमा

अस्थमा की बीमारी में रोगी के फेफड़ों में हवा ले जाने वाले वायुमार्ग में सूजन आ जाती है और वो संकुचित हो जाते हैं। दरअसल सूजन वाले वायुमार्ग बहुत संवेदनशील होते हैं और वो इनहेल्ड किए गए पदार्थ,धुएं आदि ट्रिगर्स नामक पर्यावरण की चीजों पर प्रतिक्रिया करते हैं।

वायुमार्ग में प्रतिक्रिया होने पर वो आकार में फूलता और संकुचित होता है,साथ ही शरीर में ज्यादा बलगम भी बनने लगता है। जो हवा को फेफड़ों में जाने वाले रास्ते को कठिन बना देता है। इसके अलावा वायुमार्ग के चारों ओर की मांसपेशियां भी कसती हैं, जो वायु प्रवाह को पूरी तरह से रोक देती है।

अस्थमा के लक्षण

जब वायुमार्ग अस्थमा ट्रिगर्स पर प्रतिक्रिया करता है, तो अक्सर लोगों को अस्थमा का दौरे या अस्थमा अटैक का सामना करना पड़ता है इसके अलावा अस्थमा के रोगी में ये लक्षण भी देखे जाते हैं...

1.खांसी आना

2.सीने में जकड़न

3.घबराहट होना

4.सांस लेने में परेशानी होना

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अस्थमा का कारण

आमतौर पर डॉक्टर्स के मुताबिक अस्थमा की बीमारी होने का कोई मूल कारण आज तक पता नही चल पाया है, लेकिन यह आनुवांशिक और पर्यावरण को कारकों के संयोजन के रूप में देखा जाता है। अस्थमा के पेशेंट्स हर बार मौसम बदलने पर कई तरह की एलर्जी और वायरल इंफेक्शन की वजह से परेशान रहते हैं।

इसके अलावा अस्थमा पेशेंट्स को तंबाकू के धुआं, धूल के कण, वायु प्रदूषण, पराग, मोल्ड, सांस संक्रमण, शारीरिक गतिविधि, ठंडी हवा और कुछ खाद्य पदार्थों से एलर्जी की वजह से भी अस्थमा के रोग में बढ़ोतरी देखी गई।

अस्थमा का उपचार

आमतौर पर डॉक्टर्स अस्थमा के इलाज के लिए दो प्रकार की दवाओं को इस्तेमाल करते हैं। जिनमें से कुछ जल्दी आराम देने वाली दवाएं होती हैं, तो कुछ धीरे धीरे लेकिन लंबे समय तक असर करने वाली दवाएं दी जाती हैं।

अगर अस्थमा अटैक में जल्द ही आराम चाहिए, तो इनहेलर का प्रयोग करना बेहद फायदेमंद रहता है। इसके साथ ही अगर कुछ सावधानियां बरती जाएं, तो बदलते मौसम में भी इस समस्या से आसानी से निजात पाया जा सकता है।

अस्थमा के लिए जरूरी सावधानियां :

1. घास या पेड़ के सूखे पत्तों से बचाव : अगर आप अस्थमा के पेशेंट हैं तो हमेशा पतझड़ और मौसम बदलने के वक्त पर अपने घर के दरवाजों और खिड़कियों को बंद रखें और एयर कंडीशन्स का उपयोग करें।

2.धूल के कणों से बचाव : कालीन,फर्नीचर, गद्दे और तकिए के धूल के कणों को निकालने के लिए समय समय पर उनकी सफाई करें। इसके साथ ही चादर, और कुशन कवर को हमेशा गर्म पानी से धोएं।

3. पालतू जानवरों से दूरी : अगर आप अस्थमा के पेशेंट हैं या आपके घर में कोई अस्थमा पेशेंट है, तो पालतू जानवरों से एक सीमित दूरी बनाएं रखें। जिससे जानवरों के बालों की वजह से आने वाले अस्थमा अटैक से बचा जा सके।

4.धूम्रपान, प्रदूषण, ठंडी हवा : अस्थमा पेशेंट हमेशा अपनी नाक और मुंह को ढककर ही घर से बाहर निकलें जिससे आप धूम्रपान,धूल,धुएं और ठंडी हवा से बचाव किया जा सके।

5.एक्सरसाइज : अस्थमा पेशेंट हमेशा एक्सरसाइज करने से 10-15 मिनट पहले अपने अभ्यास से पहले 10 से 15 मिनट पहले अपने इनहेलर का इस्तेमाल जरूर करें।

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