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खुश रहने के लिए अपनाएं आइंस्टाइन का फॉर्मुला, जिंदगी हो जाएंगी खुशनुमा

खुश रहने का बेहतरीन तरीका आइंस्टाइन जैसे दुनिया के महान वैज्ञानिक ने दिया है जिसे आज तक कोई वैज्ञानिक नहीं काट पाया है।

खुश रहने के लिए अपनाएं आइंस्टाइन का फॉर्मुला, जिंदगी हो जाएंगी खुशनुमा

खुश रहना हर कोई चाहता है और अपनी खुशी को व्यक्ति बाहरी साधनों में तलाशने लगता हैं पर दुनिया का हर व्यक्ति अपनी जिंदगी में परेशान है और खुश रहने की वजह को तलाशता रहता है।

लेकिन 'मांग', 'अपेक्षा' और 'नाराजगी' के कारण हम दुखी होने लगते हैं। लेकिन हमें सोचना चाहिए कि जैसे मैं सही हूं, वैसे ही सामने वाला भी सही हो सकता है और हमें उससे माफी की अपेक्षा नहीं होना चाहिए।

खुश रहने के सिद्धांत को आइंस्टाइन ने आज से करीब एक सदी पहले 1905 में दिया था। जिसे आज तक कोई वैज्ञानिक नहीं काट पाया है। इसमें आइंसटाइन ने एक ऐसा अनोखा खुश रहने का फॉर्मूला भी दिया था जो लोगों की जिंदगी बदल सकता है।

आइंसटाइन की थ्योरी

आइंसटाइन ने अपनी इस थ्योरी में खुश रहने का राज को बताया था। छोटा सरल मगर बहुत काम का, दरअसल ये खुश रहने का फॉर्मूला एक सुझाव है जिसके पीछे एक दिलचस्प कहानी छुपी हुई है।

ये कहानी तब की है जब आइंसटाइन जपान की राजधानी टोकियो के सबसे महेंगे होटल इंपीरियल में किसी काम के सिलसिले में रुके हुए थे। आइंसटाइन के पास एक पार्सल आया, आइंस्टीन के पास एक पार्सल आया यह पार्सल लाने वाला व्यक्ति एक कुरियर वाला था।

आइंस्टीन ने लिखा

आइंस्टीन ने जब कुरियर वाले को पार्सल लाने के लिए टीप देने की कोशिश की तो कुरियर वाले ने लेने से इंकार कर दिया। दरअसल कुरियर वाले ने आइंस्टीन से टीप मांगी थी लेकिन आइंस्टीन पर छुट्टे ना होने के कारण उन्होंने कुरियर वाले को एक चिट्ठी लिख कर दे दी। ये कोई आम चिट्ठी नहीं थी इस खत में आइंस्टीन ने लिखा था खुश रहने का फॉर्मुला।

इसमें आइंस्टीन ने लिखा था कि कामयाबी के पीछे भागने से हमेशा बेचैनी ही हाथ लगती है वह व्यक्ति कभी खुश नहीं रह सकता। वही, शांत और सादगी से भरी जिंदगी ज्यादा ख़ुशियाँ देती है।

किस्मत वाले

साथ में कुरियर वाले को आइंस्टीन ने एक नोट दिया जिसमें उन्होंने लिखा “अगर तुम किस्मत वाले निकले, तो ये नोट तुम्हारे लिए किसी भी टीप से कहीं ज्यादा कीमती साबित होगा।"

आइंस्टीन ने कितनी सादगी से खुशियों का फॉर्मूला बना डाला और उसे एक नोट पर लिख दिया। देखा जाए तो इस बात को हम सभी पहले से जानते आए हैं लेकिन हर बार इस पर अमल करना भूल जाते हैं।

नोट 10 करोड़ रुपए में बिका

करीबन 96 साल बाद उस नोट की नीलामी हुई जिसमें वह नोट 10 करोड़ रुपए में बिका। इस नोट की नीलामी उस कुरियर वाले के किसी रिश्तेदार ने लगाई थी। ये नीलामी इजरायल में हुई थी और इसे यूरोप के किसी शख्स ने खरीदा।

अगर हम दूसरों को बदलने से पहले खुद को बदल लें तो अपने आप दुख और चिंता कम हो सकती है। खुशी हम में ही कहीं छुपी होती है और हम हमारी खुशी या दुख का कारण दूसरों को बताते हैं। लेकिन वास्तविक कारण हमारा दिमाग होता है, जो तमाम कार्यों को संचालित करता है।

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