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भूलकर भी वायु प्रदूषण को न करें नजरअंदाज, हो सकती हैं ये जानलेवा बीमारियां

इन दिनों देश के कई इलाकों में वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। सर्दी के मौसम में इसमें और भी इजाफा होगा। वायु प्रदूषण केवल हमारे श्वसन तंत्र को ही बीमार नहीं बनाता बल्कि शरीर के तमाम अंगों पर इसका बुरा असर भी पड़ता है। यही नहीं इससे बौद्धिक क्षमता और मानसिक प्रवृत्ति पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। ऐसे में इसके खतरों के बारे में जानना बहुत जरूरी है।

भूलकर भी वायु प्रदूषण को न करें नजरअंदाज, हो सकती हैं ये जानलेवा बीमारियां

वायु प्रदूषण, देश के शहरों में गंभीर समस्या का रूप ले चुका है। आम धारणा है कि इससे सिर्फ सांस से संबंधित समस्याएं होती हैं लेकिन ऐसा नहीं है। इससे और भी कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें होती हैं। विभिन्न शोधों से इस बात की पुष्टि होती है। ऐसे में प्रदूषण से खुद को बचाना बेहद जरूरी है।

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वायु प्रदूषण के हानिकारक दुष्प्रभाव :

1.किडनी फेल्योर का रिस्क

अमेरिका स्थित वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन से पता चला है कि वायु प्रदूषण से न सिर्फ हार्ट डिजीज, श्वसन रोग, कैंसर, फेफड़े का संक्रमण, अस्थमा आदि रोगों का बल्कि क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा भी बढ़ सकता है। इन शोधकर्ताओं ने 2004 से लगातार 8.5 वर्षों तक 2.5 मिलियन लोगों पर निगरानी रखने के बाद यह नतीजा निकाला।
आंकड़ों की तुलना और वायु प्रदूषण बहुल इलाके के लोगों में किडनी डिजीज के बढ़े मामले पाए जाने के बाद वैज्ञानिकों ने वायु प्रदूषण को किडनी की कार्यप्रणाली के लिए नुकसानदायक माना। उनका कहना है कि प्रदूषित वायु में पाए जाने वाले तमाम विषैले और नुकसानदायक तत्व रक्त प्रवाह में मिल जाते हैं। हमारे गुर्दों का मुख्य काम है रक्त को फिल्टर करना। ऐसे में प्रदूषित रक्त को फिल्टर करते-करते इन पर विपरीत असर पड़ना स्वाभाविक ही है।

2.स्ट्रोक का खतरा

‘दी लांसेट न्यूरोलॉजी’ में प्रकाशित, 188 देशों में किए गए एक विस्तृत अध्ययन में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। इसके मुताबिक दुनिया भर में स्ट्रोक के एक तिहाई यानी लगभग 15 मिलियन मामले एयर पॉल्यूशन की वजह से होते हैं। यह वायु प्रदूषण सिर्फ बाहरी नहीं बल्कि घरेलू भी हो सकता है।
इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन द्वारा किए गए विश्लेषण में यह जानकर हेल्थ एक्सपर्ट भी हैरान हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि स्ट्रोक के कम से कम 90 फीसदी कारकों को नियंत्रित करना संभव है। पहली बार स्ट्रोक के खतरे के रूप में वायु प्रदूषण की पहचान की गई है।

3.दिमाग की क्षति

‘एनल्स ऑफ न्यूरोलॉजी’ में प्रकाशित एक बड़े और ताजा अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि वायु प्रदूषण से बुजुर्गों के दिमाग में मौजूद व्हाइट मैटर की मात्रा घटती है। व्हाइट मैटर बुद्धिमानी के लिए महत्वपूर्ण होता है। प्रदूषित हवा में रहने वाले बुजुर्गों में व्हाइट मैटर की मात्रा घटने से, वे अपनी उम्र के दूसरे लोगों की तुलना मंट कम एक्टिव और कम इंटेलीजेंट हो सकते हैं। अब शोधकर्ता पता लगा रहे हैं कि क्या इस क्षति को लो कैलोरी और लो फैट डाइट खाकर कुछ कम किया जा सकता है।

4.ऑटिज्म की आशंका

वैज्ञानिक वायु प्रदूषण से बचने के लिए लगातार ताकीद करते रहे हैं। अब ‘एन्वॉयर्नमेंटल हेल्थ पर्सपेक्टिव’ नामक अमेरिकन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में प्रदूषण के एक और नुकसान की बात सामने आई है। स्वास्थ्य विज्ञानियों के अनुसार गर्भावस्था में माताएं अगर ज्यादा प्रदूषित वातावरण में रहती हैं, तो उनकी संतान ऑटिज्म का शिकार हो सकती है।
वैज्ञानिकों ने करीब एक लाख संभावित माताओं पर अध्ययन करने के बाद यह नतीजा निकाला है। प्रचुर मात्रा में पोलीसाइक्लिक ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन नामक दूषित रासायनिक पदार्थ (जो वाहनों और बीड़ी-सिगरेट के धुएं में मिलता है) श्वांस के जरिए ग्रहण करने वाली माताओं की संतानों के ऑटिज्म से पीड़ित होने की आशंका रहती है।

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5.बर्थ डिफेक्ट का खतरा

ताजा अमेरिकी रिसर्च में यह भी पता चला है कि जो महिलाएं, प्रेग्नेंट होने के ठीक एक महीने पहले या बाद में प्रदूषित हवा में रही हैं, उनमें जन्मजात विकृति वाले बच्चों के जन्म का खतरा बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने 2006 से 2010 तक ओहियो में जन्मे 2,90,000 नवजात शिशुओं के आंकड़ों की जांच की थी।

6.बच्चे में हाई बीपी का जोखिम

‘हायपरटेंशन’ नामक एक जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक गर्भवती महिला के लंबे समय तक वायु प्रदूषण में रहने से, उसके बच्चे में हाई ब्लड प्रेशर होने का रिस्क बढ़ जाता है। इस अध्ययन के लिए जॉन्स हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एपिडेमियोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर नोएल टी मुलर ने अपनी टीम के साथ 1293 गर्भवती महिलाओं पर अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला।

7.बढ़ती है आपराधिक प्रवृत्ति

अमेरिका के 9,360 शहरों के अपराध संबंधी आंकड़ों और वायु प्रदूषण के स्तर पर 9 साल तक अध्ययन करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया है कि वायु प्रदूषण का बढ़ा हुआ स्तर लोगों को अनैतिक कामों के लिए भी उकसा सकता है। चाहे यह ठगी हो या अपराध।
व्यवहार विज्ञानी जैकसन जी लू के अनुसार इससे पहले किए गए अध्ययनों में बढ़े हुए प्रदूषण स्तर से एंग्जायटी की बात सामने आई थी, हमारे अध्ययन में पाया गया कि इससे अनैतिक व्यवहार में वृद्धि हुई है। उन्होंने पाया कि जहां का वायु प्रदूषण स्तर बढ़ा हुआ था, वहां डकैती, हत्या और चोरी जैसी घटनाओं में भी बढ़ोत्तरी हुई।

8.एंटीबायोटिक्स का असर कम

यूनिवर्सिटी ऑफ लीसेस्टर के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि वायु प्रदूषण श्वसन नली के संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया की ताकत को बढ़ा देता है, जिससे एंटीबायोटिक का असर कम हो जाता है। जिन क्षेत्रों में वायु प्रदूषण का स्तर अधिक है, वहां एंटीबायोटिक दवाएं कम असरकारक साबित होती हैं। प्रदूषण का एक बड़ा घटक ब्लैक कार्बन है, जो रेस्पीरेटरी ट्रैक्ट के बैक्टीरिया को छिपने, बढ़ने और बचने में मदद करता है।
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