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जानें कब लेनी चाहिए Abortion Pill, ये होते हैं गोली खाने के नुकसान

कई महिलाएं अबॉर्शन के लिए दवाईयों का सहारा लेती हैं और मेडिकल सर्जिकल अबॉर्शन (surgical abortion) से बचती हैं। आज हम आपको गोली कब लेनी चाहिए और गोली खाने से किस तरह के नुकसान होते है उसके बारे में बताएंगे।

Abortion Pill Side effects
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प्रतीकात्मक तस्वीर 

भारत में अबॉर्शन (Abortion) लिगल (Legal) और सुरक्षित (Safe) है, लेकिन इसके कुछ कानूनी दायरे हैं। यह केवल ट्रेंड और सर्टिफाइड डॉक्टर और लाइसेंस प्राप्त क्लिनिक और अस्पतालों में ही किया जा सकता है। अबॉर्शन करने से पहले तमाम पहलुओं की जांच की जाती है, इसके बाद ही इसे किया जाता है। कई महिलाएं अबॉर्शन के लिए दवाईयों का सहारा लेती हैं और मेडिकल सर्जिकल अबॉर्शन (surgical abortion) से बचती हैं। आज हम आपको गोली कब लेनी चाहिए और गोली खाने से किस तरह के नुकसान होते है उसके बारे में बताएंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2015 में भारत में कुल 15.6 मिलियन यानी 1,56 करोड अबॉर्शन (Abortion) हुए हैं। जिनमें से 12.7 मिलियन (81 प्रतिशत) अबॉर्शन (Abortion) की गोलियों का उपयोग करके ही किए गए हैं। जबकि 2.2 मिलियन (14 प्रतिशत) अबॉर्शन (Abortion) सर्जिकल मेथड (Surgical Methods) से किए गए हैं। जबकि 5 प्रतिशत गर्भपात अन्य असुरक्षित साधनों के माध्यम से किया गया था।

कब लेनी चाहिए गोली

जानकारी के मुताबिक, भारत में, प्रेग्नेंसी के 9 हफ्ते तक मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल के उपयोग को मंजूरी दी जाती है। हालांकि, कुछ देशों में इन दवाओं को प्रेगेंसी के 10वें हफ्ते तक मंजूरी दी जाती है।

अबोर्शन पिल्स लेने के बाद क्या होती है परेशानी (Abortion pill may cause)

-मतली (Nausea)

-उल्टी होना (Vomiting)

-कमजोरी (Weakness)

-सिर दर्द (Headaches)

-थकान (Tiredness)

-बुखार (Fever)

बरतनी चाहिए सावधानी

अबोर्शन पिल्स (Abortion pill) खाने के बाद शरीर कमजोर हो सकता है और आपको थकावट का अहसान हो सकता है, इसलिए आपको जब कुछ दिनों तक आराम करना चाहिए। अगर आपको ज्यादा प्रोब्लम हो रही है तो आप डॉक्टर की सलाह ले सकती हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के आपके कोई भी एंटीबायोटिक या दर्द निवारक दवा नहीं लेनी चाहिए। ऐसा करने से आपके शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

अबोर्शन पिल्स खाने के बाद ये होते हैं साइड इंफेक्ट(Common complications)

-लंबे समय तक ब्लीडिंग होना

-ज्यादा और हैवी ब्लीडिंग

- यूटर्स में रक्त के थक्के (Blood Clots)

-दवा का एलर्जिक रिएक्शन (Allergic Reactions) होना।

कुछ रेयर केस में ये होते है (Complications)

-दवा लेने के 24 घंटे बाद भी ब्लीडिंग न होना

-शरीर में किसी तरह का दर्द और ऐंठन न होना

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