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50 पर्सेंट डॉक्टरों को ही है गंभीर बीमारियांः रिसर्च

कई डॉक्टर्स ऐसे हैं जिन्हें सप्ताह में 80-80 घंटे काम करना पड़ता है।

50 पर्सेंट डॉक्टरों को ही है गंभीर बीमारियांः रिसर्च
नई दिल्ली. मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर खुद ही दिल की अलग-अलग बीमारी से जूझ रहे हैं। दरअसल, चेन्नई के पास एक मेडिकल कॉलेज में करीब 250 डॉक्टरों और नर्सों पर एक रिसर्च किया गया। इस रिसर्च में पाया गया कि करीब 50 फीसदी डॉक्टरों को दिल से जुड़ी अलग-अलग किस्म की गंभीर बीमारियां हैं।
बता दें कि एसआरएम मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में डॉक्टरों और नर्सों के फीजिकल पैरामीटर के आधार पर एक चौंकाने वाली बात कही है। इस अध्ययन में इनकी फीजिकल एक्टिविटी और खाने पीने की आदतों को आधार बनाया गया। बता दें कि डॉक्टरों की इस बीमारी की वजह उनके शरीरिक रूप से अधिक काम करना बताया गया है। करीब 41 फीसदी डॉक्टर फीजिकल एक्टिविटी न करने की वजह से इन बीमारियों के होने का खतरा है वहीं 19.8 फीसदी डॉक्टरों को उनकी खाने-पीने की वजह है। जिन डॉक्टरों पर रिसर्च किया गया उनकी उम्र करीबन 40 थी और 29 साल के नर्सों को शामिल किया गया।
अगर डॉक्टरों के होनो वाली इस बीमारी के कारण की बात करें तो अध्ययन में पाया गया कि डॉक्टरों को दिल की बीमारी की मुख्य वजह उनका खुद का पेशा ही है। दरअसल, डॉक्टरों की कमी के चलते इन लोगों को क्षमता से अधिक काम करना होता है। जिससे इन डॉक्टरों की हर तरह की एक्टिविटी पर तो इफेक्ट पड़ता ही है साथ ही उनके खाने पीने की टाइम भी प्रभावित होती है। ऐसा होने की प्रमुख वजह डॉक्टरों की असंतुलित लाइफस्टाइल है।
स्टेनले मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के डॉक्टर का कहना है कि सेहत की सारी जानकारी हमारा शरीर खुद ही देता है। डॉक्टर ने बताया कि पहले काम इतना अधिक नहीं था लेकिन जैसे जैसे प्रतिस्पर्धा बढ़ते जा रही है काम की अधिकता भी उतनी ही बढ़ रही है क्योंकि डॉक्टर्स की बेहद कमी है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि कई ऐसे डॉक्टर्स हैं जिन्हे कई बार सप्ताह में 80-80 घंटे काम करना पड़ता है।
आंकड़े की बात करें तो एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। बता दें कि भारत में प्रति हजार लोगों पर डॉक्टरों की संख्या विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक से भी कम है। दरअसल, कुछ साल पहले करीब 3,000 डॉक्टरों पर रिसर्च किया गया था, जो आंकड़ें सामने आए उसे जानकर चौंक जाएंगे। तमिलनाडु के इन सभी डॉक्टरों को मधुमेह का खतरा बताया गया था। अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि अधिकांश डॉक्टरों की मौत 45 से 60 के दिल की बीमारी की वजह से हुई।
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