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मार्शलों की वेशभूषा में 69 साल में हुआ पहला बदलाव, दूसरे ही दिन समीक्षा के आदेश

संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन मार्शल नई वेशभूषा में नजर आए। मार्शलों की वेशभूषा में 69 साल में पहली बार बदलाव किया गया है। लेकिन मार्शलों की नई वेशभूषा पर आपत्ति होने पर इसकी समीक्षा किए जाने संबंधी आदेश दिए गए हैं।

मार्शलों की वेशभूषा में 69 साल में हुआ पहला बदलाव, दूसरे ही दिन समीक्षा के दिए आदेशोंउप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू के दाएं-बाएं नई वेशभूषा में खड़े मार्शल

स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार मार्शलों की वेशभूषा में बदलाव किया गया है। 1950 के बाद पहली बार 2019 में मार्शल नई वेशभूषा में नजर आए। संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन मार्शलों ने नई ड्रेस पहनी हुई थी। लेकिन नई वेशभूषा को लेकर पूर्व सेना के अधिकारियों ने विरोध करना शुरू कर दिया। जिसके बाद अब उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने वेशभूषा की समीक्षा किए जाने के निर्देश दिए हैं। समीक्षा रिपोर्ट के बाद वेशभूषा में सुधार किया जा सकता है।

संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन मार्शल नई वेशभूषा में नजर आए। उनकी वेशभूषा सेना में ब्रिगेडियर रैंक और उससे बड़े अधिकारियों की ड्रेस के समान थी। जिसका सेना के पूर्व अधिकारियों की तरफ से विरोध करना शुरू हो गया। सेना के पूर्व अधिकारियों ने इसे प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए सेना का अपमान बताया। केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने इसका विरोध करते हुए वेशभूषा को गलत बताया। इसके अलावा अन्य पूर्व सैन्य अधिकारियों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया।

दूसरी तरफ मार्शलों की नई वेशभूषा का विरोध बढ़ने पर उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इसकी समीक्षा के आदेश दिए हैं। वेंकैया नायडू ने कहा कि नई वेशभूषा को लेकर लोगों की आपत्तियों के संबंध में जानकारी मिली है। वेशभूषा की नए सिरे से समीक्षा की जाएगी। राज्यसभा सचिवालय नई वेशभूषा की समीक्षा करेगा।

राज्यसभा सचिवालय ने तैयार की नई वेशभूषा

मार्शलों की नई वेशभूषा का डिजाइन राज्यसभा सचिवालय की तरफ से तैयार किया गया है। राज्यसभा सचिवालय से जुड़े अधिकारियों की कमेटी ने नई वेशभूषा तैयार की। जिसके बाद शीतकालीन सत्र से यह मार्शलों के लिए अनिवार्य की गई। राज्यसभा सचिवालय ने इसके पीछे तर्क दिया कि मार्शलों की नई वेशभूषा, पुरानी ड्रेस से कहीं अधिक बेहतर है। मार्शलों के लिए नई वेशभूषा में कार्य करना आसान है। जबकि पुरानी वेशभूषा के पारंपरिक होने के कारण कार्य करना मुश्किल था।

नेवी की ड्रेस से मिलती है नई वेशभूषा

मार्शलों की नई वेशभूषा नेवी के अधिकारियों से काफी हद तक मिलती है। नई वेशभूषा में सर्दियों के लिए नेवी ब्लू जैकेट के साथ उसी रंग की टोपी है। जिसके ऊपर कढ़ाई भी नेवी अधिकारियों की टोपी से मिलती-जुलती है। इसके अलावा गर्मियों के लिए सफेद रंग की जैकेट है।

सभापति की करते हैं मार्शल मदद

सदन में मार्शलों का कार्य सभापति की मदद करना होता है। सभापति के दोनों तरफ सदन में हर वक्त मार्शल नजर आते हैं। सदन में पेश किए जाने वाले बिल सभापति तक पहुंचाने से लेकर जरूरी तथ्य उपलब्ध कराना भी मार्शलों की जिम्मेदारी होती है।

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