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Exclusive: भाजपा से ज्यादा कांग्रेस ने दिए अडानी को लाइसेंस, विरोध किया तो भूपेश बघेल के इशारे पर कार्रवाई: अजीत जोगी

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी (Former Chief Minister Ajit Jogi) की जाति को लेकर रिपोर्ट जारी की गई है। जिसमें अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी (Amit Jogi) को आदिवासी नहीं माना है। मामले की रिपोर्ट आने के बाद प्रधान संपादक "डॉ हिमांशु द्विवेदी" ने अजीत जोगी से विशेष बातचीत की है। इस दौरान अजीत जोगी (Ajit Jogi) ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Cm Bhupesh Baghel) पर निशाना साधा। कहा कि अडानी को फरवरी तक भूपेश बघेल ने पांच लाइसेंस दिए। जबकि भाजपा ने 15 साल में चार दिए थे। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:-

Exclusive: भाजपा से ज्यादा कांग्रेस ने दिए अडानी को लाइसेंस, विरोध किया तो भूपेश बघेल के इशारे पर कार्रवाई: अजीत जोगीCongress gave license to Adani more than Bjp, Action on Bhupesh Baghel

प्र. हाइकोर्ट ने जब समिति गठन का फैसला किया था तो आपने स्वागत किया था कि मुझे अब अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। लेकिन आज जब फैसला आया तो आप नाराज हो गए?

उ. न तो मेरी मुश्किलें बढ़ी हैं और न तो मैं चिन्तित हूं। न तो मेरे ऊपर कोई राजनीतिक संकट आया है। ये तो 43 साल से सन 1987 से आज तक छह बार मैं कोर्ट से फैसले ले चुका हूं। अभी हाल ही में अमित जोगी के प्रश्न पर जस्टिस भादुरी ने फैसला दे दिया कि अमित जोगी कंवर जाति के मूडी गोत्र के हैं। जब कोर्ट ने मेरे बेटे को आदिवासी मान लिया तो बाप को कैसे नहीं मानेंगे।

प्र. आखिर अजित जोगी की जाति को लेकर फैसला आने के बाद सबसे ज्यादा उत्साहित कांग्रेस पार्टी है। लेकिन सवाल उठता है कि इसी कांग्रेस पार्टी ने आपको आदिवासी नेता के तौर पर प्रस्तुत किया था। जब इस पार्टी ने आपको प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया था तो कहा था कि हमने एक आदिवासी को प्रदेश की कमान सौंपी है। कांग्रेस के अनुसूचित जन जाति मोर्चे के भी अध्यक्ष रहे थे। तो आज जो परिस्थित बदली हुई है तो क्या महसूस कर पा रहे हैं। क्या ऐसा हो गया?

उ. ये तो पूरा मामला राजनैतिक है। पहले भी राजनैतिक था आज भी राजनैतिक है। भूपेश बघेल को लगता है कि मैं उनपर सीधा हमला कर रहा हूं। मैंने उनके सबसे पहले छत्तीसगढ़ को अडानी गढ़ बनाने का फैसला किया। उसका विरोध किया। नंदीराज पहाड़ को जो हम आदिवासियों का पूज्य है उसे अडानी को अलाट कर खुदाई चालू की उसके खिलाफ 25 हजार आदिवासियों को लेकर उस आंदोलन को लेकर नेतृत्व किया। इससे वो घबरा गए। इसके बाद उनके प्रिय मित्र है बृजमोहन अग्रवाल जी, जिनका जलकी कांड है। भैंसा जार का हजारों करोड़ का कांड है उसको मैं उठाता रहा हूं वो उससे भी विचलित हैं।

इन्हें लगता है जो उनका बृजमोहन दोस्त है मैं उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर रहा हूं। मैं यह भी कहता रहा हूं कि आपके कार्यकाल में आदिवासी मारे जा रहे हैं। आप मर्डर का केस पंजीकृत नहीं करते। उनको मरने देते हैं। आदिवासियों के प्रति आपकी ये भावना है कि बस्तर की जेल में आज भी सैकड़ों निर्दोष आदिवासी सड़ रहे हैं। उनके ऊपर राजद्रोह-देशद्रोह की धाराएं लगा दी हैं। आपने शराब बंदी का वादा किया था। लेकिन शराब ठेकेदारों से समझौता कर टालने के लिए कमेटी बना दी है। आपने कहा था बेरोजगारों को 2500 रुपये महिना भत्ता देंगे। आप नहीं दे पा रहे हैं। हम उसका विरोध कर रहे हैं, तो ये घबराए हुए हैं।


भाजपा तो विपक्ष की भूमिका नहीं निभा पा रही है। सिर्फ मैं और मेरी पार्टी बोल रही है तो भूपेश बघेल डरे हुए हैं। पहले सन 1986 तक आईपीएस-आईएएस रहा तो मेरी 40 साल की उम्र तक किसी को संदेह नहीं हुआ कि मैं कंवर जाति का नहीं हूं। जैसे ही मैं 1986 में पहली बार राज्यसभा में आया तो मोतीलाल वोहरा के कहने पर मनोहर दलाल ने मेरे खिलाफ एक याचिका हाइकोर्ट में दायर की वो वहीं निरस्त हो गई। उसके बाद जबलपुर में भाजपा के कहने पर एक याचिका दायर हुई जो दीपक मिश्रा जैसे प्रसिद्ध जज ने जो आगे जाकर चीफ जस्टिस बने उन्होंने मेरे खिलाफ शिकायतकर्ता था उसके ऊपर जुर्माना लगाया।

उसके बाद बिलासपुर हाइकोर्ट में जब भूरिया कमेटी ने मेरे खिलाफ फैसला दिया मैंने चुनौती दी। उसमें तो हाइकोर्ट ने ये तक फैसला दिया ये पूरी तरह से राजनीतिक मामला है। वर्षों से अजीत जोगी को बदनाम करने के लिए ये मामला चल रहा है। आज तक अजीत जोगी ने जो न्यायालय में खर्चा किया है उसकी राशि वापस दिलायी जाए। उसके बाद ये उस फैसले के खिलाफ ये सुप्रीम कोर्ट चले गए। वहां भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिलीप सिंह भूरिया को अधिकार ही नहीं था कि मेरी जाति का फैसला करे। उसके बाद एक कमेटी बनी थी राबर्ट हरनदौला आईएएस की अध्क्षता में पहली बार हाइपावर कमेटी बनी।

उसने मेरे पक्ष में फैसला दिया। उससे भी संतुष्ट नहीं हुए तो रीना बाबा कंगाले आईएएस की रिपोर्ट आयी। मैंने उसे चैलेंज किया तो इन्होंने रिपोर्ट ही वापस ले ली। कहा हमसे गलती हो गई है हम वापस लेते हैं। उसके बाद रीना बाबा कंगाले की दूसरी रिपोर्ट आयी। उसको मैंने चुनौती दी। तो हाइकोर्ट ने पूरी तरह से उसे नकारते हुए वापस कर दिया कि ये कमेटी ही ठीक नहीं बनी है। कमेटी ने जांच ही ठीक नहीं की है। उसके बाद अब नए सिरे से इन्होंने एक कमेटी बनायी है।

वो कमेटी डीडी सिंह की अध्यक्षता में बनी। उसने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का कोई पालन नहीं किया। हमने उनसे कहा कि हमको अपने गवाह प्रस्तुत करने दो तो उन्होंने कहा कि आपको अधिकार नहीं है। हमने कहा कि यदि कोई गवाही-दस्तावेज हमारे खिलाफ है तो हमको बताइये। उसकी प्रतिलिपि दीजिए। उन्होंने कह दिया नहीं देंगे। हमने कहा कि हमें गवाहों के प्रति परीक्षण का अधकार है वो करने दीजिए। उन्होंने उससे भी इंकार कर दिया। केवल एक लाइन की चिट्ठी हमको लिख दी कि आपने जो कुछ कहा है हम उसको अस्वीकार करते हैं। क्योंकि ये केस लंबे समय से चल रहा है। इसलिए जो भी आप कह रहे हैं हम उस पर कोई चर्चा नहीं करेंगे।


फिर उन्होंने हमें कहा (ये मैंने वीडियो रिकार्ड किया है) 20 तारीख को आपने जितनी आपत्तियां की हैं उनके ऊपर विचार कर हम आपको दोबारा बुलाएंगे। 9 तारीख को भूपेश बघेल ने ऐलान ही कर दिया था विश्व आदिवासी दिवस के दिन कि जोगी जी की जाति का फैसला हम एक माह के अंदर कर देंगे। कांग्रेस के जो अध्यक्ष हैं मोहन मरकाम उन्होंने तो पहले ही कह दिया था कि अजीत जोगी आदिवासी नहीं है। तो इन लोगों ने तो पहले से ही फैसला कर लिया था।अब जिसकी सीआर खुद भूपेश बघेल खुद लिखेगा डीडी सिंह की और जो भी उसमें सदस्य हैं तो वो क्या भूपेश बघेल के खिलाफ जा सकते हैं।

भूपेश बघेल ने जो कहा होगा वो कर दिया होगा। हमको अवसर ही नहीं दिया। अब तो बात कोई घबराने, चिंता करने की नहीं है। ये तो 43 साल से देख रहे हैं। किसी की जाति का फैसला कौन कर सकता है। मैं सोचता हूं न तो कमेटी कर सकती है न न्यायालय कर सकता है। मैं किस जाति का हूं इसका फैसला उसके गांव के, उसकी जाति के उसके क्षेत्र के लोग कर सकते हैं। मैं आदिवासी परिवार में जन्मा। आदिवासी परिवार हूं तो किसी ने अगर सतनामी कहा है तो मैं उसके ऊपर मानहानि का केस करूंगा। अभी टीएस सिंहदेव जी कह रहे थे कि मेरे पिता सतनामी थे तो वो सिद्ध करके बताएं। वहीं मेरा परिवार मेरा गांव, मेरा क्षेत्र मुझे कंवर आदिवासी मानता है इसलिए मुझे किसी और की परवाह नहीं है। भूपेश जैसे सैकड़ों लोगों को मैंने देख लिया है।

प्र. जब हाइकोर्ट के स्तर पर आपके पक्ष मैं फैसला हुआ था तो सुप्रीम कोर्ट ने आपके संबंध में जांच के लिए कमेटी गठित का फैसला क्यों किया। इसका तकनीक कारण क्या है?

उ. सुप्रीम कोर्ट केे सामने मुख्य मुद्दा यह था कि क्या भूरिया को मेरी जाति पर आदेश देने का अधिकार है। उसके ऊपर विस्तृत चर्चा है। इसके ऊपर सुप्रीम कोर्ट का पूरा आदेश है कि क्या आदिवासी आयोग को मेरी जाति के बारे में फैसला देने का अधिकार है। इसमें यह निष्कर्ष निकाला कि दिलीप सिंह भूरिया को मेरी जाति पर फैसला देने का अधिकार नहीं था। उन्होंने आखिरी पैराग्राफ में लिखा कि हालांकि ऊपर के पांच -छह फैसले जोगी के पक्ष में हुए हैं लेकिन हमें यह आवश्यक प्रतीत होता है कि जिस तरह से जांच होनी चाहिए और जोगी को अपना दावा सिद्ध करने का मौका देना चाहिए वो नहीं दिया गया। इस लिए एक बार फिर से हम इसे हाइ पावर कमेटी के समक्ष भेज रहे हैं।

प्र. भूपेश बघेल की राजनीतिक प्रतिद्धंदता रमन सिंह जाहिर है। रमन सिंह ने डीडी सिंह की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी। रमन सिंह द्वारा गठित कमेटी भूपेश बघेल के मुताबिक फैसला दे रही है। इसका क्या कारण है?

उ. ये बिल्कुल गलत है। ये कमेटी भूपेश बघेल की बनायी हुई है। इसमें सदस्य बदले गए हैं। जैसे एलेक्स पॉल, मैंनोन सचिव थे उनको पता क्यों हटा दिया। शायद ये समझ कर हटा दिया वो क्रिश्चियन हैं। और भी नए नए सदस्य इसमें रखे। ऐसे में पूरी तरह ये भूपेश बघेल की कमेटी बनायी हुई है। रमन सिंह की तो रीना साहब बाबा कंगाले वाली कमेटी थी।

प्र. अब जो कमेटी ने फैसला दिया है अजीत जोगी का अगला कदम क्या होगा?

उ. यहां पर न्यायालय के निर्णय चलते हैं। इन्होंने 9 तारीख को जैसे ही घोषित किया कि अजीत जोगी की जाति का फैसला एक माह में करा देंगे। वैसे ही वकील लगा दिए थे। मुकुल रोहतगी जी सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं और हाइकोर्ट में भी वकील दिल्ली से आते हैं। दोनों जगह पर पहले ही याचिका लगी हुई है। डर के मारे इन्होंने याचिका की प्रतिलिपी भी नहीं दी है। इन्होंने समाचार पत्रो में छपवा दिया लेकिन अजीत जोगी को प्रति देने में भूपेश बघेल डर रहा है। इन्हें लगता है कि जैसे ही कापी देंगे वैसे ही हम कोर्ट चले जाएंगे। इसके कारण ये अभी कापी नहीं दे रहे हैं। केस तब से चल रहा है क्या कभी विधायकी गई जो अब चली जाएगी। तो आप जानते हैं कि भूपेश बघेल मेरे से क्यों नाराज है।

अडानी का मैं विरोध करता हूं, हाथी कारिडोर जो बना रहे हैं विरोध करता हूं, ब्रजमोहन अग्रवाल की जलकी कांड में कोई जांच नहीं की, भैंसा जार के ऊपर दो हजार करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की कोई जांच नहीं बैठा रहे हैं। बस्तर में नंदीराज के पर्वत को जब अडानी को दिया तो आदिवासियों के नेतृत्व में विरोध कर झुका दिया। वहां पर इसे फावड़ा-कुदाली नहीं चलाने दिया। अडानी को वहां पांच लीज दे दीं इसने।भाजपा ने भाजपा की सरकार ने 15 साल में चार लीज अडानी को दीं थी। इसने फरवरी तक पांच लीजें और दें दी। तो ये अडानी से जो सांठगांठ है। शराब के माफिया से सांठगांठ है। जब इन बातों को उजागर कर रहा हूं तो भूपेश बघेल का नाराज होना लाजिमी है। वो और कुछ नहीं कर सकता।

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