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Knowledge News: पीएम की सुरक्षा में हुई चूक के क्या है मायने, पहले भी हो चुकी हैं दो प्रधानमंत्रियों की हत्या

पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सुरक्षा में हुई चूक ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के चहेते पीएम (PM Modi) में से एक हैं, इस लिए उनकी सुरक्षा में हुई ऐसी गड़बड़ी ने देशवासियों को चिंतित कर दिया है।

Knowledge News: पीएम की सुरक्षा में हुई चूक के क्या है मायने, पहले भी हो चुकी हैं दो प्रधानमंत्रियों की हत्या
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पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सुरक्षा में हुई चूक ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के चहेते पीएम (PM Modi) में से एक हैं, इस लिए उनकी सुरक्षा में हुई ऐसी गड़बड़ी ने देशवासियों को चिंतित कर दिया है। हालांकि, ये पहली बार नहीं हुआ है जब देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा में कोई चूक हुई हो, इससे पहले भी कई ऐसी घटनाएं देखने को मिल चुकी हैं। ऐसे ही सुरक्षा में चूक के कारण देश अपने 2 लोकप्रिय प्रधानमंत्री खो चुका है।

दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों में से एक भारत (India) में प्रधानमंत्री (Prime Minister) का पद काफी बड़ा होता है, या यूं कहे कि सबसे शक्तिशाली व्यक्ति होता है। देश का पूरा दारोमदार प्रधानमंत्री पर टिका होता है, ऐसे में मोदी की सुरक्षा (Modi Security Breach) एक बड़ा मुद्दा भी बन गई है। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी अपने फिरोजपुर दौरे को बीच में छोड़कर ही वापस लौट आए तो देश के पीएम की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के कटघरे में आ गई। सवाल बड़े हैं क्योंकि इससे पहले भी देश के दो प्रधानमंत्री की सुरक्षा में हुई इस चूक के कारण हत्या हो चुकी है। भारत की पहली महिला पीएम इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) और देश के युवा पीएम राजीव गांधी (Rajeev Gandhi) की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गईं थी।

'ऑपरेशन ब्लू स्टार' के कारण इंदिरा गांधी को गंवानी पड़ी थी अपनी जान


देश की आयरन लेडी और भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री की सुरक्षा में कई बार चूक हुई और आखिरकार उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। साल 1984 के जून के महीने में देश की आर्मी ने 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' (Operation Blue Star) चलाया जिसका मेन मकसद देश में पड़ने वाली फूट को हटाना था। देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री ने आर्मी को एक बड़े ऑपरेशन का आदेश दिया जिसका नाम था 'ऑपरेशन ब्लू स्टार'। इस ऑपरेशन में श्रीमती गांधी ने आर्मी को पंजाब के अमृतसर में हरमंदिर साहिब परिसर की इमारतों से नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके अनुयायियों को हटाने का आदेश दिया था।

इस ऑपरेशन के दौरान, भारतीय सेना ने अपने लगभग 83 जवानों को खो दिया जबकि 700 घायल हुए। वहीं इस ऑपरेशन में लगभग 450-500 सिख आतंकवादी मारे गए थे। इस ऑपरेशन के दौरान स्वर्ण मंदिर को हुए नुकसान और दोनों ओर गईं जानों के कारण भारत सरकार की हर ओर आलोचना हुई। इस ऑपरेशन के बाद श्रीमती गांधी की जान को खतरा बढ़ गया। कहा जाता है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो ने उनकी सुरक्षा में तैनात सिख बॉडीगार्ड को हटा दिया। लेकिन इंदिरा को लगता था कि ये कदम पब्लिक में उनकी एंटी-सिख इमेज को बढ़ावा देगा, इसलिए उन्होंने एसपीजी को अपने पुराने सिख बॉडीगार्ड को वापस रखने के आदेश दिए जिनमें बेअंत सिंह का नाम भी शामिल था।

31 अक्टूबर 1984 को सुबह 9 बजकर 20 मिनट पर जब इंदिरा गांधी जब सफदरजंग रोड को अकबर रोड से जोड़ने वाले गेट के पास पहुंची। जैसे ही प्रधानमंत्री गेट के पास पहुंची उनके बॉडीगार्ड बेअंत सिंह ने उन पर तीन गोलियां चलाईं इसके साथ ही उसने श्रीमती गांधी के दूसरे बॉडीगार्ड से कहा देख क्या रहे हो गोली चलाओ। इसके बाद सतवंत सिंह ने अपनी स्टर्लिंग सबमशीन गन से इंदिरा पर लगातार 30 गोलियां चलाईं। जहां बेअंत सिंह को मौके पर बीएसएफ ने खत्म कर दिया था, वहीं सतवंत सिंह को 6 जनवरी 1989 को फांसी दे दी गई थी।

राजीव गांधी की निर्मम हत्या



21 मई 1991 भारत के लिए एक काला दिन था। देश ने अपने सबसे युवा और चहेते पीएम राजीव गांधी को खो दिया। तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर में उन्हें मानव बम से उड़ा दिया गया था। राजीव गांधी की हत्या मामलें में हुई जांच से सामने आया था कि उनकी हत्या को मानव बम बनी एक महिला ने अंजाम दिया था। राजीव गांधी की हत्या के पीछे लिट्टे का हाथ। पूरी घटना को अंजाम श्रीलंकाई तमिल अलगाववादी संगठन 'लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम' (Liberation Tigers of Tamil Eelam) के सदस्य थेनमोझी राजरत्नम (Thenmozhi Rajaratnam) ने दिया था। उस समय, भारत ने श्रीलंकाई गृहयुद्ध में भारतीय शांति सेना के माध्यम से अपनी भागीदारी समाप्त कर दी थी, जो कि राजीव गांधी की हत्या का कारण बना था।

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