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Knowledge News: देश के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा का 74वां जन्मदिन, विंग कमांडर के इंटरेस्टिंग फैक्ट्स

Knowledge News: भारत का नाम अंतरिक्ष तक ले जाने वाले 'भारतीय वायू सेना' (Indian Air Force) के विंग कमांडर राकेश शर्मा (Wing Commander Rakesh Sharma) का आज जन्मदिन है। 13 जनवरी 1949 को पंजाब के पटियाला में जन्में राकेश शर्मा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सेंट जॉर्ज ग्रामर स्कूल, हैदराबाद से करने के बाद निज़ाम कॉलेज, हैदराबाद से ग्रैजुएशन की पढ़ाई की।

Knowledge News: देश के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा का 74वां जन्मदिन, विंग कमांडर के इंटरेस्टिंग फैक्ट्स
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Knowledge News: भारत (India) का नाम अंतरिक्ष तक ले जाने वाले भारतीय वायू सेना (Indian Air Force) के विंग कमांडर राकेश शर्मा (Wing Commander Rakesh Sharma) का आज जन्मदिन है। 13 जनवरी 1949 को पंजाब के पटियाला में जन्में राकेश शर्मा (Rakesh Sharma) ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सेंट जॉर्ज ग्रामर स्कूल, हैदराबाद से करने के बाद निज़ाम कॉलेज, हैदराबाद से ग्रैजुएशन की पढ़ाई की। उन्होंने जुलाई 1966 में 'नेशनल डिफेंस अकादमी' (National Defence Academy) जॉइन की और 1970 में एक पायलट के रूप में 'भारतीय वायु सेना' (Indian Air Force) में शामिल हुए।


1970 में वायुसेना में एक टेस्ट पायलट के रूप में शामिल हुए राकेश शर्मा ने अपने करियर में कई पड़ाव पार किए और साल 1984 में उन्हें स्क्वाड्रन लीडर की पोस्ट पर प्रमोट किया गया। 'भारतीय वायु सेना' और 'सोवियत इंटरकोसमोस अंतरिक्ष कार्यक्रम' (Soviet Interkosmos space programme) के बीच एक संयुक्त कार्यक्रम के हिस्से के रूप में उन्हें 20 सितंबर 1982 को उन्हें अंतरिक्ष यात्री बनने और अंतरिक्ष में जाने का सुनहरा मौका मिला।

3 अप्रैल 1984 को 'कज़ाख सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक' (Kazakh Soviet Socialist Republic) में बैकोनूर कोस्मोड्रोम (Baikonur Cosmodrome) से लॉन्च किए गए सोवियत रॉकेट 'सोयुज़ टी -11' (Soyuz T-11) पर उड़ान भरी और इस तरह वह अंतरिक्ष में प्रवेश करने वाले पहले भारतीय नागरिक बने। 'सोयुज टी-11' अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा और अन्य के साथ डॉक किया गया। तीन सदस्यीय सोवियत-भारतीय अंतरराष्ट्रीय चालक दल जिसमें जहाज के कमांडर, यूरी मालिशेव (Yury Malyshev) और फ्लाइट इंजीनियर गेनाडी स्ट्रेकालोव (Gennadi Strekalov) शामिल थे उस अंतरिक्ष यान को सैल्यूट 7 ऑर्बिटल स्टेशन में भेजा गया।


इस दौरान राकेश शर्मा ने सैल्यूट 7 में 7 दिन, 21 घंटे और 40 मिनट बिताए, जिसके दौरान उनकी टीम ने वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन किए, जिसमें तैंतालीस प्रायोगिक सेशन शामिल थे। उनका काम मुख्य रूप से बायो-मेडिसिन और रिमोट सेंसिंग के क्षेत्र में था। क्रू ने मास्को में अधिकारियों और तत्कालीन भारतीय प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी (Prime Minister Indira Gandhi) के साथ एक जॉइन्ट टेलीविजन न्यूज कॉन्फ्रेंस आयोजित किया। जब इंदिरा गांधी ने शर्मा से पूछा कि भारत बाहरी अंतरिक्ष से कैसा दिखता है, तो उन्होंने जवाब दिया, "सारे जहां से अच्छा"। यह इकबाल की एक देशभक्ति कविता का शीर्षक है जो उस समय लिखी गई थी जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, जो आज भी लोकप्रिय है।

'सोयुज टी-11' में राकेश शर्मा की यात्रा के साथ, भारत अंतरिक्ष में किसी व्यक्ति को भेजने वाला 14वां देश बन गया। राकेश शर्मा एक विंग कमांडर की पोस्ट से रिटायर हुए। अपनी रिटायरमेंट के बाद उन्होंने साल 1987 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (Hindustan Aeronautics Limited) को जॉइन किया। उन्होंने 'एचएएल' (HAL) के चीफ टेस्ट पायलट के रूप में काम करने के लिए बैंगलोर जाने से पहले, साल 1992 तक 'एचएएल' नासिक डिवीजन में चीफ टेस्ट पायलट के रूप में कार्य किया। साल 2001 में वह फ्लाइंग से रिटायर हो गए।

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