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Coffee History: 450 साल पुराना कॉफी का इतिहास, जानें कैसे दुनिया भर में चाय की जगह ले रही कॉफी

History Of Coffee: कॉफी जिसे आज के दौर में लोग सबसे ज्यादा प्रेफर करते है। लेकिन क्या आपको कॉफी के सुनहरे इतिहास के बारे मे पता है। आखिर कॉफी आई कहां है, इसकी शुरुआत कहाँ से हुई। वैसे आपको यह जानकर शायद हैरानी हो सकती है कि कॉफी का सफर इसलामी आध्यात्मिकता और रहस्यवाद से शुरू हुआ है।

Coffee History: कॉफी के इतिहास के बारे में क्या आप जानते है ? आखिर कहां से आई कॉफी !
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History Of Coffee: कॉफी जिसे आज के दौर में लोग सबसे ज्यादा प्रेफर करते हैं, लेकिन क्या आपको कॉफी के सुनहरे इतिहास के बारे में पता है। आखिर कॉफी आई कहां से है, इसकी शुरुआत कहां से हुई। वैसे आपको यह जानकर शायद हैरानी हो सकती है कि कॉफी का सफर इस्लामी आध्यात्मिकता और रहस्यवाद से शुरू हुआ है। जिसकी वजह से इसे सदियों तक संजोया गया और आज जिसे हम कई नामी कॉफी हाउस के नाम से जानते है।

दुनिया भर में रोज दो अरब कप इस्तेमाल होती है कॉफी

अगर आंकड़ों की बात करें तो पूरी दुनिया भर में हर दिन दो बीलियन ( Two Billion) कप से ज्यादा कॉफी का सेवन किया जाता है। सिर्फ ब्रिटेन में ही एक दिन में साढ़े नौ करोड़ कप कॉफी पी जाती है। सुबह उठने के बाद से शाम ढलने तक कॉफी का इस्तेमाल विभिन्न रूपों में किया जाता है।

लेकिन आज से 450 साल पहले शायद ही किसी ने कॉफी का नाम सुना होगा। वैसे आपको बता दें कि काफी की जड़ें इथियोपिया से जुड़ी हैं, जहां जंगलों में कॉफी का पौधा काफी तेजी से पनपता था। पहले तो लोगों का ध्यान इस बात पर कभी नहीं गयाए लेकिन जैसे-जैसे समय बीता लोगों ने इस पौधे में दिलचस्पी लेनी शुरु की। तब उन्होंने महसूस किया कि इस सूखे फल को अगर भुनते और फिर पीसते है तो ये पीने के काम आ सकती है। हालांकि पहले तो इसे सिर्फ गिने-चुने लोगों ने ही पीना शुरू किया, लेकिन धीरे-धीरे इसे पीने वालों के बीच इसकी चर्चा बढ़ने लगी।

पश्चिमी देशों में कॉफी का सेवन करने वालों को इसका स्वाद पसंद आया, फिर उन्हें यह लगा कि इससे कारोबार भी किया जा सकता है। शुरुआत में इसकी खेती यमन में हुआ करती थी। जहां यमन के लोगों ने ही इसका नाम कहवा रख दिया, जो की एक अरबी नाम है। जिसे आज हम कॉफी और कैफे जैसे नाम से जानते है।

पहला कॉफी हाउस

सबसे पहला कॉफी हाउस ब्रिटेन में साल 1651 में खोला गया था। इसके बाद लंदन में कॉफी हाउस खुलने शुरू हुए। जिसके बाद से पोर्टो क्लब बनने शुरू हो गए। अब बैंकों, कारोबारियों से लेकर साहित्यकारों तक के लिए कॉफी हाउस खुल गए है। कॉफी के अड्डों पर हमेशा से ही काफी राजनीति होती थी।

पहले कॉफी एक पेनी (Penny) में मिला करती थी, इसलिए कॉफी के अड्डों को 'पेनी यूनिवर्सिटी' भी कहा गया. हालांकि ये कॉफी हाउस केवल पुरुषों के लिए थे, इसलिए कुछ समय बाद इसे पुरुषों की ड्रिंक (Men's Drink) के तौर पर जाना जाने लगा.

महिलाओं के मुकाबले पुरुष ज्यादा पीते हैं कॉफी

गौरतलब है कि कॉफी कभी विवादों से भी घिरा है। इसपर सबसे पहले और सबसे बड़ा साल आरोप 1674 में लगा था, जब लोगों में यह भ्रम फैला था कि कॉफी पीने से नपुंसकता आती है. तो वहीं कुछ लोग ठीक इसके विपरित दावे कर रहे थे, उनका मानना था कि का मानना था कि इससे पौरुष में बढ़ोतरी होती है.

कहां शुरू हुई दूध वाली कॉफी की प्रक्रिया

हालांकि कॉफी का स्वाद कुछ लोगों का पसंद नहीं आता है, लेकिन ब्रिटेन में सबसे पहले इसे दूध और चीनी के साथ मिलाकर पीने का चलन शुरू हुआ। बिल्कुल चाय की तरह।

18वीं सदी में जीवनशैली का हिस्सा बनी कॉफी

कॉफी 18वीं सदी तक ब्रिटिश जीवनशैली का हिस्सा बन गई थी। यह न केवल कॉफी हाउस में बल्कि लोगों के घरों तक भी कॉफी पहुंच गई थी। और उसके बाद से इसे भोजन के बाद के पेय के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा।

19वीं सदी तक कॉफी का टेस्ट बहुत कडवा हुआ करता था

अगर कॉफी के टेस्ट की बात करें तो 19वीं सदी तक कॉफी का टेस्ट बहुत ही कड़वा होता था, लेकिन फिर इटली ने एस्प्रेसो नाम कि एक मशीन का आविष्कार किया। यह मशीन कॉफी को निखारने और छानने का काम करती था। इसके बाद इटली में कॉफी कल्चर फ्यूचरिस्टिक और चमचमाती मशीनों के साथ फैलना शुरू हुआ। फिर धीरे-धीरे पूरे पश्चिमी देशों में कॉफी की खुशबू फैलने लगी।

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