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Pitru Paksha 2019 Date : पितृ पक्ष महत्व, श्राद्ध लिस्ट, श्राद्ध पूजा विधि और कौओं को भोजन खिलाने का महत्व

पितृ पक्ष महत्व (Pitru Paksha Mahatva), श्राद्ध का दिन (Shradh Ka Din ), श्राद्ध पूजा विधि (Shradh Puja Vidhi ) और कौओं को भोजन कराने का महत्व (Kowo Ka Mahatva) जानना बेहद आवश्यक है। कौओं को पित्तरों का रूप मानते हैं।इसलिए श्राद्ध में कोए को भोजन देने से पितर प्रसन्न होते हैं और अपना आर्शीवाद देते हैं।

Pitru Paksha 2019 Date : पितृ पक्ष महत्व, श्राद्ध लिस्ट, श्राद्ध पूजा विधि और कौओं को भोजन खिलाने का महत्वPitru Paksha 2019 Date Pitru Paksha Importance Shradh List Puja Vidhi Kowo Ka Mahatva

Pitru Paksha 2019 पितृ पक्ष श्राद्ध , महत्व,श्राद्ध का दिन, श्राद्ध पूजा विधि और कौओं का महत्त्व जाने बिना आप पितरों का आर्शीवाद प्राप्त नहीं कर सकते। शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक जातक को देवी - देवताओं की पूजा करने से पहले अपने पितरों की पूजा (Pitra Puja) करनी चाहिए नहीं । अगर आपको ऐसा नहीं करते हैं तो आपको न तो पितरों का और न हीं देवी -देवताओं का आर्शीवाद प्राप्त होता है। पितरों की शांति के लिए पिंड और दान और श्राद्ध तो पहले ही कर दिया जाता है। लेकिन पितृ पक्ष (Pitru Paksha) में पितरों का श्राद्ध डालने से पितरों (Pitra) का विशेष आर्शीवाद प्राप्त होता है। तो चलिए जानते हैं पितृ पक्ष श्राद्ध , महत्व,श्राद्ध का दिन, श्राद्ध पूजा विधि और कौओं के महत्त्व के बारे में...


पितृ पक्ष 2019 लिस्ट (2019 में किस दिन होगा कौनसा श्राद्ध Pitru Paksha 2019 list)

पहला श्राद्ध (पूर्णिमा श्राद्ध) – 13 सितंबर 2019

दूसरा श्राद्ध -14 सितंबर 2019

तीसरा श्राद्ध -15 सितंबर 2019

चौथा श्राद्ध -16 सितंबर 2019

पांचवा श्राद्ध -17 सितंबर 2019

छठा श्राद्ध -18 सितंबर 2019

सांतवा श्राद्ध -19 सितंबर 2019

आंठवा श्राद्ध -20 सितंबर 2019

नवां श्राद्ध- 21 सितंबर 2019

दसवां श्राद्ध -22 सितंबर 2019

ग्यारहवां श्राद्ध -23 सितंबर 2019

बारहवां श्राद्ध-24 सितंबर 2019

तेरहवां श्राद्ध -25 सितंबर 2019

चौदहवां श्राद्ध -26 सितंबर 2019

पंद्रहवां श्राद्ध – 27 सितंबर 2019

सोलहवां श्राद्ध (सर्वपितृ अमावस्या) -28 सितंबर 2019

पितृ पक्ष का महत्व (Pitru Paksha Ka Mahatva)

शास्त्रों के अनुसार किसी भी जातक को देवताओं की पूजा से पहले अपने पूर्वजों की पूजा करके उनसे आर्शीवाद प्राप्त करना चाहिए। क्योंकि अगर घर के पितृ प्रसन्न रहते हैं तो देवताओं का आर्शीवाद स्वंय ही मिल जाता है। भारत में बुजूर्गां के सम्मान को विशेष महत्व दिया जाता है। और मरने के बाद उनका श्राद्ध कर्म किया जाता है। इसके पीछे का कारण है कि जब तक पितरों का तर्पण नहीं किया जाता। तब तक उन्हें मुक्ति नहीं मिलती है। उनकी आत्मा पृथ्वींलोक पर ही भटकती रहती है। ज्योतिषिय दृष्टिकोण से पितृ पक्ष को मनाने का कराण पितृ दोष से मुक्ति माना जाता है। जो व्यक्ति पितृ दोष से पीड़ित होता है। उसे जीवन में कभी भी सफलता प्राप्त नहीं होती। इस दोष से मुक्ति पाने के लिए पितरों की शांति परम आवश्यक है।


पूर्वज़ों के श्राद्ध का दिन (Purvajo Ka Shradh Ka Din)

पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व दिया जाता है। लेकिन इससे पहले पितरों की शांति के लिये पिंड दान या श्राद्ध कर्म भी किया जाता है। पितृ पक्ष उसी दिन किसी पूर्वज का श्राद्ध किया जाता है। जिस दिन वह पृथ्वीं लोक को छोड़कर गया हो। उसी तिथि के दिन श्राद्ध कर्म किया जाता है।

दि देहावसान की तिथि ज्ञात न हो तो आश्विन अमावस्या को श्राद्ध किया जा सकता है इसे सर्वपितृ अमावस्या भी इसलिये कहा जाता है। समय से पहले यानि जिन परिजनों की किसी दुर्घटना अथवा सुसाइड आदि से अकाल मृत्यु हुई हो तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को किया जाता है।इसी के साथ पिता के लिए अष्टमी तिथि और माता के लिए नवमी तिथि को विशेष माना जाता है।


पितृ पक्ष श्राद्ध पूजा विधि (Pitru Paksha Shradh Puja Vidhi)

1. श्राद्ध में तिल, चावल, जौ आदि को अधिक महत्त्व दिया जाता है। इसलिए श्राद्ध में इन चीजों को विशेष रुप से सम्मिलित करें।

2.इसके बाद श्राद्ध को पितरों को भोग लगाकर किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं।

3.इसके बाद तिल और पितरों को पंसद चीजें उ्न्हें अर्पित करें। श्राद्ध में पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोज्य पदार्थ को पिंडी रूप में अर्पित करना चाहिए।

4.श्राद्ध का अधिकार पुत्र, भाई, पौत्र, प्रपौत्र समेत महिलाओं को भी होता है।

5. अंत में कौओं को श्राद्ध को भोजन कराएं।क्योंकि कौए को पितरों का रुप माना जाता है।


श्राद्ध में कौओं को भोजन कराने का महत्व क्या है (Shradh Mai Kowo Ka Mahatva)

शास्त्रों के अनुसार कौए को पितरों का रूप माना जाता है। जो श्राद्ध के दिन भोजन ग्रहण करने के लिए हमारे पितर कौए का रूप धारण कर नियत तिथि पर दोपहर के समय घर आते हैं। अगर उन्हें श्राद्ध भोजन नहीं मिलता तो वह नाराज हो जाते हैं। इस कारण श्राद्ध में कौओं को विशेष महत्व दिया जाता है।

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