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खुलासा: रांची के रिम्स अस्पताल में एक साल में हुई 1150 बच्चों की मौत, जानें क्या रहे कारण

देश में लोग लगातार बच्चों की मौत पर सवाल उठा रहे हैं। जहां एक तरफ राजस्थान के कोटा में बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है तो वहीं दूसरी तरफ झारखंड के रांची रिम्स में एक साल में 1150 बच्चों की मौत का आंकड़ा सामने आया है।

खुलासा: रांची के रिम्स अस्पताल में एक साल में हुई 1150 बच्चों की मौत, जानें क्या रहे कारणरांची के रिम्स अस्पताल में बच्चों की मौत

देश में लोग लगातार बच्चों की मौत पर सवाल उठा रहे हैं। जहां एक तरफ राजस्थान के कोटा में बच्चों की मौत का मातम बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ झारखंड के रांची रिम्स में एक साल में 1150 बच्चों की मौत का आंकड़ा सामने आया है, जो काफी हैरानी कर देने वाली है।

इस घटना पर पीड़ित परिजन के लोगों का कहना है कि अस्पताल में व्यवस्था की कमी और डाक्टर की लापरवाही की वजह से बच्चों को मौत का सामना करना पड़ रहा है। रांची के रिम्स से मिले आंकड़ों के अनुसार पूरे साल 2019 में जनवरी से लेकर दिंसबर तक 1150 बच्चों की यहां भर्ती किया गया था, जिसका इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

इस अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या के अनुसार संसाधन में कमी, लाचार व्यवस्था और रिम्स प्रबंधन के लापरवाह रवैये के कारण यहां लोगों को बच्चों की मौत का मातम मनाना पड़ता है। वहीं इस आकड़े पर रिम्स अधीक्षक डॉ. विवेक कश्यप का कहना है कि काफी संख्या में बीमार बच्चे इस अस्पताल में इलाज के लिए आते है, जो काफी गंभीर स्थिति के कारण किसी की मौत हो जाती है। हांलाकि इसमें कोई दो राय नहीं है कि यहां के शिशु विभाग में लाचार स्थिति बनी हुई है।

बच्चों की मौत के पीछे जानें क्या है कारण

आंकड़ों की देखें तो लगभग हर महीने रिम्स में 96 बच्चों की मौतें हो रहीं हैं। रिम्स के शिशु रोग विभाग और यहां तक की नियोनेटल आईसीयू में भी सुविधाओं की काफी लाचार स्थिति बनी है।

साथ ही बढ़ते मरीज के साथ नर्स और डॉक्टर की भी काफी कमी है, जिसका भुगतान उन मासूमों के रूप में चुकाना पड़ रहा है।

इस अस्पताल की स्थिति की बात की जाए तो एक वार्मर पर दो से तीन बीमार बच्चे को रखा जाता है।

वहीं शिशु रोग आईसीयू में कुल 16 बेड पर हर दो बीमार बच्चों के लिए एक नर्स की जरूरत होती है, लेकिन यहां सिर्फ 9 नर्स मौजूद रहती है।

वार्मर और फोटोथेरेपी मशीन की कमी के कारण एक बच्चे के जगह दो से तीन बच्चों को साथ में रखा जाता है, जिससे संक्रमण होने पर बच्चों की बीमारी ठीक होने के बजाय मौत की कगार पर खड़ा कर देता है।

Priyanka Kumari

Priyanka Kumari

Jr. Sub Editor


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