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झारखंड में मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई नेता दोबारा नहीं जीत पाया, रघुवर दास पर भी हार का संकट

झारखंड के इतिहास में कोई भी नेता मुख्यमंत्री बनने के बाद हुए चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाया है। 19 साल के इतिहास में सभी मुख्यमंत्रियों को अगले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इस बार रघुवर दास अपने विरोधी प्रत्याशी सरयू राय से 45 हजार वोटों से पीछे चल रहे हैं।

झारखंड में मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई नेता दोबारा नहीं जीत पाया, रघुवर दास पर भी हार का संकटझारखंड मुख्यमंत्री रघुबर दास (फाइल फोटो)

झारखंड में सरकारें बनती-बिगड़ती रहती हैं। लेकिन मुख्यंत्रियों से जुड़ा हुआ इतिहास आज भी बरकरार है। झारखंड के 19 साल के इतिहास में मुख्यमंत्री बनने वाले नेता को अगले चुनावों में हारना पड़ता है। इस इतिहास में शामिल पूर्व मुख्यमंत्रियों की सूची में रघुवर दास भी शामिल हो जाएंगे। मुख्यमंत्री रघुवर दास अपने विरोधी प्रत्याशी सरयू राय से 45 हजार वोटों से पीछे चल रहे हैं।

झारखंड की जनता कभी भी मुख्यमंत्री को यह मौका नहीं देती कि वो अपनी सीट तक बचा पाए। झारखंड प्रदेश को बने लगभग 19 साल हो गए हैं। तब से लेकर अब तक हर विधानसभा चुनाव में कोई भी मुख्यमंत्री ऐसा नहीं रहा जो अपनी सीट बचा पाया हो। चलिए हम आपको झारखंड के ऐसे ही मुख्यमंत्रियों की लिस्ट बताते हैं।

छठे मुख्यमंत्री है रघुवर दास

बीजेपी के रघुवर दास झारखंड राज्य के छठवें मुख्यमंत्री बने। झारखंड का यह रिकॉर्ड रहा है कि यहां कोई भी मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए अपनी विधानसभा की सीट नहीं बचा पाए हैं। रघुबर दास भी इस अनोखी लिस्ट में शामिल हो जाएंगे। जबकि उम्मीद लगाई जा रही थी वो अपनी सीट बचा लेंगे। क्योंकि रघुवर दास 1995 से इस सीट को जीतते आ रहे हैं। लेकिन भाजपा सरकार में मंत्री रहे सरयू राय से पीछे चल रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्रियों को हारना पड़ा

पिछले विधानसभा चुनाव में तो 4 ऐसे कैंडिडेट अपनी सीट गवां बैठे थे। जो पिछले समय में प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके थे। बाबूलाल मरांडी 2014 में 2 सीटों पर खड़े थे और दोनों ही गवां बैठे थे। बाबूलाल मरांडी राजधनवार और गिरिडीह से खड़े हुए थे लेकिन कहीं से भी जीत नहीं पाए थे। बाबूलाल मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री थे। 2014 जयभारत समानता पार्टी से खड़े हुए मधु कोडा भी हारे थे।

पूर्व मुख्यमंत्री कोडा मझगांव विधानसभा सीट से 10 हज़ार वोट से हारे थे। वहीं वहीं झारखंड के 3 बार मुख्यमंत्री रह चुके अर्जुन मुंडा को दशरथ गागराई ने 11 हज़ार वोटों से अधिक से हराया था। जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी अपनी सीट से हार गए थे। हेमंत 2 सीट पर खड़े हुए जिसमे से वो बरहेट सीट से तो जीते लेकिन दूसरी सीट (दुमका) से हार गए थे।

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