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झारखंड : भीमाकोरेगांव हिंसा के आरोपी फादर स्टेन स्वामी के आवास पर महाराष्ट्र एटीएस का छापा, कई घंटे हुई पूछताछ

झारखंड के सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन के आवास पर महाराष्ट्र पुलिस की एटीएस टीम ने छापेमारी की है। एटीएस आज सुबह सात बजे से ही उनके आवास की तलाशी ले रही है। इस दौरान फादर स्टेन से कई घंटों पूछताछ भी की गई। बता दें कि भीमा कोरेगांव मामले में फादर स्टेन का नाम जुड़ा है। महाराष्ट्र पुलिस ने दूसरी बार उनके आवास पर छापेमारी की है।

झारखंड : भीमाकोरेगांव हिंसा के आरोपी फादर स्टेन स्वामी के आवास पर महाराष्ट्र एटीएस का छापा, कई घंटे हुई पूछताछ

झारखंड के सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन के आवास पर महाराष्ट्र पुलिस की एटीएस टीम ने छापेमारी की है। एटीएस आज सुबह सात बजे से ही उनके आवास की तलाशी ले रही है। इस दौरान फादर स्टेन से कई घंटों पूछताछ भी की गई। बता दें कि भीमा कोरेगांव मामले में फादर स्टेन का नाम जुड़ा है। महाराष्ट्र पुलिस ने दूसरी बार उनके आवास पर छापेमारी की है।

एटीएस की टीम ने सामाजिक कार्यकर्ता के आवास से कई सामान भी जब्त किए। बताया जा रहा है कि पुलिस को किसी गुप्त व्यक्ति ने सूचना दी थी कि फादर स्टेन के घर कुछ संदिग्ध लोग आते हैं और बैठकें होती हैं। पुलिस इसी सूचना के आधार पर उनके आवास पर छापेमारी की है। महाराष्ट्र एटीएस से जब इस छापेमारी के बारे में पूछा गया तो इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की।

इससे पहले भी छापेमारी हो चुकी है

इससे पहले महाराष्ट्र पुलिस ने साल 2018 के अगस्त महिने में भी उनके आवास पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी फादर स्टेन का लैपटॉप समेत कई जरुरी कागजात जब्त किया गया था। बता दें कि महाराष्ट्र के कोरेगांव हिंसा में कई गाड़ियों और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने व हिंसक भाषण देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

क्या है भीमा कोरेगांव मामला

साल 2018 में 1 जनवरी के दिन पूरे देश के दलित भीमा कोरेगांव नामक जगह पर इकट्ठा होते हैं। इस दिन अंग्रेजों ने सन् 1818 में बाजीराव पेशवा-2 की सेना पर हमला किया था जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। दलित समुदाय के लोग पेशवा के इस हार को दलित समुदाय जश्न के रूप में मनाता आ रहा है। उनके अनुसार इस दिन दलितों पर अत्याचार करने वाले पेशवा की हार हुई थी।

साल 2018 के 1 जनवरी को दलित समुदाय और मराठा समुदाय के बीच भीमाकोरेगांव में हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प में एक व्यक्ति की जान चली गई थी। वहीं कई लोग घायल हो गए थे। बताया जाता है कि कट्टर हिंदुत्व के खिलाफ इस दिन कई बुद्धिजीवियों व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने दलित समाज में जागरूकता के लिए भाषण दिए और इसी के बाद हिंसा भड़क गई और ये हादसा हो गया। इसमें फादर स्टेन भी शामिल थे।

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