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आदिवासियों पर लिखी किताब को झारखंड सरकार ने बताया ''पोर्न''

सीएम ने ''द आदिवासी विल नॉट डांस'' की सभी प्रतियां जब्त करने का आदेश जारी कर दिया।

आदिवासियों पर लिखी किताब को झारखंड सरकार ने बताया

झारखंड सरकार ने लेखक हांसदा सोवेंद्र शेखर द्वारा लिखी किताब 'द आदिवासी विल नॉट डांस' की कहानी को 'अश्लील' बताते हुए प्रतिबंध लगा दिया है। प्रदेश सरकार ने किताब पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ शेखर पर कानूनी कार्रवाई का भी आदेश दिया है।

बता दें कि शेखर को 2015 में अपनी किताब 'द मिस्टीरियस एलमेंट ऑफ रूपी बास्की' के लिए सम्मानित किया गया था। शेखर झारखंड की राजधानी रांची के पास ही पाकुर में रहते हैं और पेशे से डॉक्टर हैं।

किताब 'द आदिवासी विल नॉट डांस' की एक कहानी 'नवंबर इज द मंथ ऑफ माइग्रेशन्स' को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। इस किताब में यह एक ऐसी महिला की कहानी है जिसे महज 50 रुपयों और कुछ पकौड़ों के लिए जिस्मफरोशी करनी पड़ती है।

राज्य सरकार ने इस कहानी पर आदिवासी संस्कृति को बदनाम करने और संथाल महिलाओं को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाते हुए अश्लील करार दिया है।

शेखर पर अंग्रेजी में लिखने, संथाल समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाने और फायदा कमाने के लिए उन्हें बदनाम करने का आरोप है। शेखर के खिलाफ की गई इस कार्रवाई की आलोचना भी हो रही है। शेखर खुद भी संथाल हैं। शेखर की इस किताब को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है।

शेखर को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है, उनकी आलोचना करते हुए सार्वजनिक पत्र लिखे जा रहे हैं। शेखर को धमकियां भी दी जा रही हैं और कई जगहों पर उनका पुतला भी जलाया गया। जिन साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने शेखर के खिलाफ अभियान चलाते हुए उन्हें दिया गया अवॉर्ड वापस लिए जाने की मांग की थी।

विपक्षी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा ने शुक्रवार को विधानसभा में इस 'द आदिवासी विल नॉट डांस' पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की। शाम होते-होते प्रदेश बीजेपी सरकार के सीएम रघुवर दास ने 'द आदिवासी विल नॉट डांस' की सभी प्रतियां जब्त करने का आदेश जारी कर दिया।

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