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बेटी को बदचलन बताकर पंचायत ने लगाया जुर्माना, पैसे का इंतजाम न होने पर पिता ने किया ये काम...

खेती के साथ मिट्टी का बर्तन बनाने वाले किसान ने हर जगह चक्कर लगाकर पैसा का इंतजाम करने में लगा रहा, दो दिन घर ही नहीं लौटा, परेशान परिजन किसान की वापसी की आस लगाए बैठे रहे। उधर किसान पैसा इकट्ठा कर पाने में असफल रहा और आत्महत्या के लिए मन बना लिया।

बेटी को बदचलन बताकर पंचायत ने लगाया जुर्माना, पैसे का इंतजाम न होने पर पिता ने किया ये काम...

एक बाप जो पेशे से किसान था खेती करके अपने दो बेटों और तीन बेटियों की जरूरतों को पूरा करता था। जिस गांव में वह रहता था वहां एक पंचायत थी। दुख, दर्द और लोगों की सवेंदना का इलाज करने वाली इस पंचायत ने किसान का ऐसा इलाज किया कि उसे आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा।

मामला झारखंड (Jharkhand) के पलामू जिले का है। जहां रामगढ़ थाना क्षेत्र के उलडंडा गांव में पंचायत ने एक किसान की बेटी को बदचलन बताकर उसपर 40 हजार का जुर्माना लगा दिया। किसान ने पंचायत में अपनी गरीबी को लेकर खूब गिड़गिड़ाया पर उसकी किसी ने नहीं सुनी। परेशान किसान ने किसी तरह से 7 हजार रुपए पंचायत को जमा कर दिया।

इसके बाद वह बाकी के रुपयों के इंतजाम में लग गया। खेती के साथ मिट्टी का बर्तन बनाने वाले किसान ने हर जगह चक्कर लगाकर पैसा का इंतजाम करने में लगा रहा, दो दिन घर ही नहीं लौटा, परेशान परिजन किसान की वापसी की आस लगाए बैठे रहे। उधर किसान पैसा इकट्ठा कर पाने में असफल रहा और आत्महत्या के लिए मन बना लिया।

गांव के ही पास बहती जगातिया नदी के बगल महुआ के पेड़ पर किसान ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। आत्महत्या की जानकारी मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। किसान की बेटी ने पिता की मौत के बाद कुंए में कूदकर जान देने की कोशिश की पर लोगों ने समय रहते उसे बाहर निकाल लिया।

घटना की जानकारी जब प्रशासन के कानों तक पहुंची तब वह मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई। रामगढ़ थाना प्रभारी धूमा किस्को ने कहा कि प्रारंभिक जांच से जो बात सामने आई है उसमें समाज द्वारा प्रताड़ना प्रमुख है। पीड़ित परिवार की शिकायत पर सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

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