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Jharkhand Election Result : मुख्यमंत्री के बेटे हेमंत सोरेन खुद भी बन चुके हैं सीएम, झारखंड मुक्ति मोर्चा को किया मजबूत

Jharkhand Election Result : झारखंड 2019 चुनावों में झारखंड मुक्ति मोर्चा सबसे बड़ी पार्टी बनती दिखाई दे रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन दोबारा मुख्यमंत्री बन सकते हैं। उनके पिता शुबे सोरेन भी प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री के बेटे हैं खुद भी रह चुके हैं मुख्यमंत्रीहेमंत सोरेन (फाइल फोटो)

Jharkhand Election Result : झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन आज बहुत खुश होंगे। क्योंकि झारखंड चुनाव 2019 के नतीजे जेएमएम पार्टी के अनुकूल रहे हैं। पूरी संभावना है कि जेएमएम, झारखंड में गठबंधन की सरकार बनाए। आज हम आपको बताते हैं हेमंत सोरेन की निजी जिंदगी से लेकर राजनीतिक जीवन के वो हिस्से जिन्होंने उन्हें बड़ा नेता बना दिया।

मुख्यमंत्री के बेटे हैं हेमंत सोरेन

खुद झारखंड के मुख्यमंत्री पद पर रह चुके हेमंत सोरेन के पिता शिबु (Shibu Soren) भी झारखंड राज्य के मुख्यमंत्री थे। शिबु सोरेन राज्य के तीसरे मुख्यमंत्री थे। यानी हेमंत सोरेन राजनीति में नए नहीं बल्कि राजनितिक परिवार से आए हुए नेता हैं। 44 वर्षीय हेमंत का जन्म 10 अगस्त 1975 को बिहार के नेमरा में हुआ था। परिवार में हेमंत के दो भाई और एक बहन है। हेमंत ने अपनी शिक्षा पटना में पूरी की थी।

मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं हेमंत

हेमंत के करियर की शुरुआत लगभग 10 साल पहले हुई थी। हेमंत सोरेन 2009 में राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। इस पद पर हेमंत एक साल से भी कम समय तक बैठे थे। इसके बाद हेमंत सोरेन की पार्टी ने कांग्रेस, आरजेडी के साथ मिलकर प्रदेश में सरकार बनाई थी और उस सरकार में हेमंत सोरेन बतौर मुख्यमंत्री चुने गए थे। बतौर मुख्यमंत्री हेमंत का कार्यकाल करीब डेढ़ साल का था। हेमंत 13 जुलाई 2013 से 28 दिसम्बर 2014 तक राज्य के मुख्यमंत्री पद पर थे। इससे पहले हेमंत राज्य के उप मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।

विपक्ष में भी मजबूत हैं हेमंत

हेमंत सोरेन सिर्फ पक्ष में ही नहीं बल्कि विपक्ष में भी मजबूत नेता दिखाई देते हैं। जब 2017 में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उन्हें ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के लिए आमंत्रण भेजा तो हेमंत ने उस समिट को "महा चिंतन शिविर और लैंड ग्रैबर" करार दिया। हेमंत ने सरकार पर आरोप भी लगाया कि यह सब आदिवासियों, प्रदेश के किसानों से उनकी जमीन लूटने का हथकंडा है। हेमंत सरकार पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। हेमंत ने उस समय भी भारी समर्थकों के साथ रोड पर विरोध प्रदर्शन किया था। जब 2016 में बीजेपी सरकार ने chhota nagpur tenancy act और Santhal pargana tenancy act में संशोधन को लेकर कोशिश की थी।

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