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खालिद के बाद घाटी में मौजूद हैं ये चार टॉप क्लास आतंकी, जानें इनके बारे में खास बातें

सुरक्षाबलों ने सोमवार को खालिद को मार गिराया था।

खालिद के बाद घाटी में मौजूद हैं ये चार टॉप क्लास आतंकी, जानें इनके बारे में खास बातें

पिछले कुछ महीनों में सेना ने लश्कर- ए- तैयबा के कमांडरों को मार गिराने में कामयाबी पाई है। इसमें बशीर अहमद वानी, अबू इस्माइल और हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर सबजर भट्ट का नाम शामिल है।

सेना और आतंकवादियों के बीच सोमवार को बारामूला में हुई मुठभेड़ में जैश-ए-मोदम्मद का कमांडर खालिद भी मारा गया। जेश ने श्रीनगर हवाई अड्डे के पास बीएसएफ कैंप पर हाल में हुए हमले की जिम्मेदारी भी ली थी। इस हमले में बीएसएफ का एक जवान शहीद हो गया था।
खालिद के मारे जानें के बाद घाटी में जो चार टॉप आतंकी बचे हैं आज हम आपको उनके बारे में बताने जा रहे हैं।
1. जाकिर मूसा, अल-कायदा- हिज्बुल से अगल होने के बाद मूसा ने अंसार गजवत-उल हिंद- अल-कायदा नाम से एक कश्मीरी संगठन बनाया। ये संगठन बहुत ही कम समय में घाटी के युवाओं और दूसरे आतंकवादियों के बीच लोकप्रिय हो गया। जाकिर मूसा को सुरक्षाबल इस वजह से खत्म करना चाहते हैं क्योंकि वह कश्मीर और उसके बाहर कट्टरपंथी इस्लाम का झूठा प्रचार कर रही है। उसकी आतंकी विचारधारा घाटी में बुरी तरह से फैल रही है।
2. रियाज नाइकू, हिज्बुल मुजाहिदीन- हिज्बुल का कश्मीर चीफ रियाज ए++ कैटगरी का आतंकवादी है। इसकी उम्र 29 साल है और ये हिज्बुल के सबसे अनुभवी कमांडरों में से एक है। इस समय वो कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को ऑपरेट कर रहा है। नायकू हाईटेक आतंकी है और उसे लेटेस्ट टेक्नोलॉजी की भी समझ है। हाल ही में वो एक आतंकवादी के जनाजे में कुले तौर पर नजर आया। रियाज के ऊपर पुलिसकर्मियों की हत्या के भी मामले हैं।
3. सद्दाम पद्दर, हिज्बुल मुजाहिदीन- सद्दाम को हिज्बुल में काफी तवज्जो दी जाती है। पद्दर का ताल्लुक किसान परिवार से है। पद्दर ने 4-5 साल पहले आतंकवादी संगठन से नाता जोड़ लिया था। सद्दाम पहले लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य था लेकिन 2015 में उसने हिज्बुल ज्वाइन किया।
4. जीनत उल इस्लाम, लश्कर ए तैयबा- जीनत घाटी में लीडरशिप संभालता है। जीनत की उम्र 28 साल की है और वो शोपियां के सुगन जानीपुरा का रहने वाला है। जीनत ने 2015 में लश्कर से नाता जोड़ा था। जीनत को शोपियां हमले का मुख्य आरोपी माना जाता है। इस हमले में तीन सैनिक शहीद हुए थे। लश्कर से पहले जीनत अल बदर आतंकवादी संगठन में शामिल था।
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