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आर्मी की मदद से जम्मू-कश्मीर के 9 नौजवान बनेंगे इंजीनियर

नौजवान युवाओं का इंजीनियर बनने का सपना हकीकत में तब्दील हो सकेगा।

आर्मी की मदद से जम्मू-कश्मीर के 9 नौजवान बनेंगे इंजीनियर
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भारत के सिरमौर कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर को पाक प्रायोजित आतंकवाद समेत सूबे की शांति भंग करने वाली तमाम घटनाओं से बचाती सेना ने अब एक ऐसा सुखद कारनामा कर दिखाया है, जिससे राज्य के 9 नौजवान युवाओं का इंजीनियर बनने का सपना हकीकत में तब्दील हो सकेगा।

यह जम्मू-कश्मीर के रहने वाले वो बच्चे हैं, जिन्होंने सेना की मदद से कोचिंग लेकर इंजीनियरिंग के क्षेत्र की देश की प्रतिष्ठित आईआईटी-जेईई की मेंस और एडवांस प्रवेश परीक्षा पास कर ली है। इसके बाद अब वो दिन दूर नहीं जब इनका दाखिला अलग-अलग राज्यों में मौजूद कुल करीब 23 आईआईटी संस्थानों में से किसी एक में हो जाएगा।

36 बच्चों को कोचिंग से दी मदद

यहां सेना मुख्यालय में मौजूद सेना के सूत्रों ने हरिभूमि को बताया कि सेना आईआईटी में दाखिले के लिए जम्मू-कश्मीर में कश्मीर सुपर 40 नामक एक अभियान चला रही है। इसमें इस वर्ष कुल करीब 36 बच्चे शामिल हुए थे।

इसमें से करीब 28 बच्चों ने आईआईटी जेईई प्रवेश परीक्षा की पहली सीढ़ी यानि मेंस परीक्षा पास की और 9 बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने मेंस और उसके बाद होने वाली एडवांस दोनों परीक्षाएं पास करके आईआईटी संस्थानों में दाखिले को लेकर अपनी दावेदारी भी पक्की कर ली है। सेना इसे 78 फीसदी परिणाम मानती है।

जनरल रावत बढ़ाएंगे हौसला

सुपर 40 अभियान में शामिल रहे इन बच्चों के प्रतिनिधिमंडल से मंगलवार को सेनाप्रमुख जनरल बिपिन रावत यहां राजधानी में सेना मुख्यालय में मुलाकात करेंगे और उनका हौसला बढ़ाएंगे। सेना के इस अभियान से सूबे से स्थानीय युवाओं को इस प्रवेश परीक्षा में भाग लेने के लिए मदद की जाती है।

28 बच्चों में दो लड़कियां भी हैं। यह बच्चे राज्य के अलग-अलग भागों से ताल्लुक रखते हैं। इसमें अलगाववादियों के गढ़ कहे जाने वाले दक्षिण-कश्मीर से भी 9 बच्चों ने प्रवेश परीक्षा के लिए सेना द्वारा दी जा रही कोचिंग में हिस्सा लिया।

जबकि आमतौर पर शांत माने जाने वाले उत्तरी-कश्मीर से 10 बच्चे इसमें शामिल हैं। इसके अलावा करगिल, लद्दाख से 7 और जम्मू रीजन से 2 बच्चे कोचिंग में शामिल हुए हैं।

सेना का यह प्रयास इस बात की पुख्ता तस्दीक करने के लिए काफी है कि जम्मू-कश्मीर में रहने वाला आम नागरिक अमन चैन के साथ रोजी, रोटी, कपड़ा और मकान चाहता है। न कि पत्थरबाजी और आतंक का खूनी खेल चाहता है।

ऐसे हुई कोचिंग

कोचिंग श्रीनगर में सेना के ट्रेनिंग पार्टनर सेंटर फॉर सोशल रिस्पांसिब्लिटी एंड लर्निंग (सीएसआरएल) और पेट्रोनेट एलएनजी की मदद से कराई गई। सूत्रों का कहना है कि इन बच्चों ने आईआईटी-जेईई की प्रवेश परीक्षा के अलावा देश के कई भागों में मौजूद इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षाओं में भी अच्छा प्रदर्शन किया है।

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