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घाटी में अब ''बेडरूम जिहाद'' बना संकट

सुरक्षा एजेंसियां 29 जून से शुरू हो कर 40 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा को लेकर चिंतित हैं।

घाटी में अब

गोलियां, पत्थरबाजी और सशस्त्र आतंकियों से लड़ने के कई सालों बाद अब जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां एक नए दुश्मन, 'बेडरूम जेहादियों' के चुनाैतियों का सामना कर रही हैं।

ये घरों में आराम से बैठकर न सिर्फ अफवाहें फैलाते हैं बल्कि घाटी के नौजवानों को भी भड़काते हैं। सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि ये नए किस्म के जिहादी 29 जून से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा से पहले सोशल मीडिया के जरिए साम्प्रदायिक दंगे भड़का सकते हैं।

यही नहीं जम्मू अगले कुछ दिनों में अफवाहों का शिकार हो सकता है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कोई भी अपने बिस्तर या सोफे पर बैठे हुए, हजारों चैट समूहों में से किसी एक में किसी एक पर भी ऐसी बात लिख सकता है या खबर दे सकता है जिससे पूरे राज्य में सांप्रदायिक दंगे हो सकते हैं।

इतना ही नहीं ये सोशल चैट ग्रुप्स केवल जम्मू और कश्मीर में सक्रिय नहीं हैं। वे राष्ट्रीय राजधानी, शेष देश और विदेशों से भी लोग इसमें चैट करते रहते हैं।

सरकार ने इन चैटिंग ग्रुप्स के एडमिन या सोशल नेटवर्किंग साइटों के मालिकों को अपने प्लेटफार्म पर किसी भी तरह की भड़काऊ सामग्री की उपलब्ध कराने के खिलाफ चेतावनी दी है। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि कुछ और प्रतिबंध और दंडात्मक कार्रवाई ऐसे बेडरूम जेहादियों में सुधार करने में मदद करेगी।

अमरनाथ यात्रा को लेकर चिंता

सुरक्षा एजेंसियां 29 जून से शुरू हो कर 40 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा को लेकर चिंतित हैं। इस बात की आशंका है कि यात्रा से पहले या उसके दौरान व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर जरिए नए जिहादियों का ग्रुप घाटी में साम्प्रदायिक दंगे भड़का सकता है।

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