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आतंकियों का सफाया करने के लिए सेना ने ''ऑपरेशन जनाजा'' का किया आगाज

अब तक 84 युवाओं को लश्कर और जैश ने बनाया आतंकी।

आतंकियों का सफाया करने के लिए सेना ने ऑपरेशन जनाजा का किया आगाज
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जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के सफाए के लिए सुरक्षाबलों द्वारा युद्धस्तर पर चलाए जा रहे सैन्य अभियानों का ही नतीजा है कि आतंकियों और उनके आकाओं का हौसला धीरे-धीरे पस्त होने लगा है।

सूबे में सक्रिय लश्कर-ए- तैयबा और जैशे मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों ने अपने नापाक इरादों को अंजाम देने के लिए राज्य के अंदर से युवाओं को भटकाकर उन्हें आतंकवादी बना रहे हैं। इसमें दो तरह से भर्तियां की जा रही हैं।

एक तो किसी सेना के साथ मुठभेड़ में मारे गए आतंकी जनाजे में नई भर्तियां हो रही हैं, दूसरा संचार माध्यमों के जरिए भी भर्ती अभियान चलाया जा रहा है। सशस्त्र बलों ने आतंकियों के इस नए गेम प्लान का दम निकालने के लिए ‘ऑपरेशन जनाजा’ का आगाज करने का निर्णय लिया है।

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रक्षा मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों हरिभूमि को बताया कि जम्मू-कश्मीर के युवाओं को आतंक की राह पर अग्रसर करने के लिए लश्करे तैयबा और जैशे मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों ने व्यापक स्तर पर भर्ती अभियान चलाया हुआ है।

इसमें इस साल जनवरी से लेकर अब तक कुल 84 युवाओं को भर्ती की जा चुकी है। इन सभी की औसत उम्र 20 साल है। सेना की चिंता इस बात को लेकर बढ़ गई है कि पहले जो युवा आतंकियों के साथ जाते थे।

वो जल्द ही वापस भी आ जाते थे। लेकिन अब यह ट्रेंड खत्म होने लगा है। क्योंकि युवाओं के वारदात को अंजाम देते वीडिया वायरल कर दिए जाते हैं।

आतंकी का जनाजा बनता आधार

आतंकी संगठन युवाओं की भर्ती राज्य में सक्रिय किसी आतंकी की मौत के बाद निकलने वाले जनाजे के माध्यम से कर रहे हैं। इस दौरान नमाजे जनाजा रश्म को खास तव्वजो दी जा रही है।

इसमें जनाजे में शामिल इलाके के बाकी लोग मारे गए आतंकी के शरीर को यह मानकर छूते हैं कि इससे उन्हें भी जन्नत का कुछ हिस्सा नसीब होगा। इसके बाद मौलवी और आतंकी के परिवार का एक सदस्य भाषण देता है।

इसके खत्म होते ही युवा लड़के जोश में आकर आतंकी बनने का एलान करने लगते हैं। इसे सुनहरा मौका समझकर मौके पर मौजूद आतंकी संगठनों के लोग इनकी भर्ती कर लड़कों को अपने साथ ले जाते हैं, फिर ट्रेनिंग देकर सूबे में आतंक का खूनी खेल खेलने के लिए अग्रसर कर देते हैं।

दक्षिण-कश्मीर से हो रही ज्यादातर भर्तियां

आंकड़ों के हिसाब से 2017 में आतंकी बन चुके 48 युवाओं में से 15 की भर्ती दक्षिण-कश्मीर से आतंकियों की मौत के बाद उनके जनाजों से की गई है। बाकी 33 को संचार के अन्य माध्यमों के जरिए आतंकवादी बनाया गया है।

दक्षिण-कश्मीर से होने वाली भर्तियों के पीछे आतंकी संगठनों द्वारा युवाओं को आकर्षित करने के लिए हिजबुल मुजाहिद्दीन के युवा कमांडर बुरहान वानी, सब्जार भट्ट जैसे आतंकी माध्यम बने हैं।

ऐसे काम करेगा ऑपरेशन जनाजा

सशस्त्र बल ऑपरेशन जनाजा के जरिए युवाओं की भर्ती को रोकने का अभियान चलाएंगे। इसमें वो किसी भी जनाजे के वक्त उसके आसपास अपनी लोकल इंटेलीजेंस यूनिट को मजबूत करेंगे, ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) जनाजे की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेंगे।

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अगर इस दौरान आतंकी युवाओं में जोश पैदा करने के लिए फायरिंग करेंगे तो उन्हें तत्काल ढूंढा जाएगा और सबक सिखाया जाएगा। आतंक की राह पकड़े सभी युवाओं का डेटा सुरक्षा एजेंसियों के पास मौजूद है। इसे इनके परिवार के द्वारा साझा किया गया है।

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