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चुनाव की आड़ में LOC पर नहीं छुपेगा पाक का नापाक चेहरा, तनाव बढ़ने की आशंका

चुनाव के दौरान एलओसी पर पाक की तरफ से कोई बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। गोलीबारी, आतंकी घुसपैठ की घटनाओं में चुनावों के बाद बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

चुनाव की आड़ में LOC पर नहीं छुपेगा पाक का नापाक चेहरा, तनाव बढ़ने की आशंका

पाकिस्तान में आगामी 25 जुलाई को प्रस्तावित आम चुनावों के चलते जम्मू-कश्मीर में करीब 750 किलोमीटर लंबी भारत-पाक नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर आने वाले कुछ हफ्ते अमन और शांति की सौगात लेकर आएंगे।

इस मुद्दे पर रक्षा विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। कुछ का कहना है कि इस एक महीने के दौरान एलओसी पर पाक फौज की तरफ से कोई बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। गोलीबारी, आतंकी घुसपैठ की घटनाओं में चुनावों के बाद बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

संघर्षविराम से लेकर आतंकी घुसपैठ बदस्तूर जारी रहेगी। जबकि कुछ का कहना है कि इसमें फिलहाल कुछ समय तक कमी और 25 जुलाई के बाद काफी तेज इजाफा देखने को मिलेगा।

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उधर सेना ने अपने जवानों को मौजूदा हालात को देखते हुए एलओसी से लेकर घाटी के अंदर हर समय मुस्तैद रहने का का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच बीते 29 मई को हॉटलाइन पर बातचीत हुई थी। उसके बाद करीब एक महीना पूरा हो जाने के बाद सीमा पर कोई गोलीबारी की घटना नहीं हुई है।

एलओसी पर नहीं रहेगी शांति

सेना के सेवानिवृत अधिकारी मेजर जनरल एन. सी. बधानी ने कहा कि आम चुनावों को देखते हुए पाक की फौज एलओसी पर अपने तैनाती स्थलों को छोड़कर वापस नहीं जाएगी। इसलिए मुझे नहीं लगता है कि नियंत्रण रेखा पर हालात कुछ बदलेंगे।

पाकिस्तान से हमें कश्मीर में नकारात्मकता की ज्यादा उम्मीद है, बजाय सकारात्मक व्यवहार के। आम चुनावों का शांतिपूर्ण संचालन कराने के लिए पाक के पास पर्याप्त मात्रा में वहां सेना मौजूद है। इसके लिए नियंत्रण रेखा में किसी तरह का बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है।

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उन्होंने आगे कहा कि इस दौरान भारतीय सेना को एलओसी व घाटी में ज्यादा चौक्कना रहने की जरुरत है। क्योंकि अभी बर्फ पिघलने के बाद ज्यादातर दर्रे खुल जाते हैं और आतंकी घुसपैठ की कोशिशें बढ़ जाती है। उन्हें सहयोग देने के लिए पाक फौज द्वारा संघर्षविराम उल्लंधन किया जाता है। यह प्रक्रिया अक्टूबर तक चलती है।

रक्षा विशेषज्ञ सी़ उदय भास्कर ने कहा कि मैं इस विचार से बिलकुल सहमत नहीं हूं कि पाकिस्तान में होने वाले आम चुनावों का नियंत्रण रेखा पर शांति से कोई ताल्लुक है। क्योंकि जब करगिल का युद्ध हुआ था। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को उसकी जानकारी ही नहीं थी।

25 जुलाई बाद बढ़ेगा तनाव

सेना में पूर्व डीजीएमओ रहे लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया ने कहा कि अभी नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम उल्लंधन और आतंकी घुसपैठ की घटनाओं में कमी देखने को मिलेगी। 25 जुलाई के बाद इन गतिविधयों में तेजी आएगी।

पाकिस्तानी सेना इंडिया पॉलिसी कंट्रोल करती है। जो भी राजनीतिक दल सत्ता में आएगा। उसे सबसे पहले कश्मीर की नीति समझायी जाती है। वहां की फौज सरकार द्वारा कश्मीर के मसले पर की जाने वाली तमाम राजनीतिक बातचीत में पूरा दखल रखती है।

इस तर्क के हिसाब से आम चुनाव के बाद एलओसी पर भारतीय सेना की चौकियों पर गोलीबारी व इससे जुड़ी हुई अन्य गतिविधियों में इजाफा होता हुआ नजर आ रहा है।

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