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जम्मू-कश्मीर: घाटी में फिलहाल नहीं होगा एक तरफा संघर्ष विराम, महबूबा ने की थी अपील

अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार के संघर्षविराम के अनुरोध पर केंद्र राजी भी हो जाता है तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि पाक आतंकी भी ऐसा ही कदम उठाएंगे।

जम्मू-कश्मीर: घाटी में फिलहाल नहीं होगा एक तरफा संघर्ष विराम, महबूबा ने की थी अपील

केंद्र सरकार फिलहाल जम्मू-कश्मीर में एक पक्षीय संघर्ष विराम लागू करने की इच्छुक नहीं दिख रही क्योंकि वहां हालात अभी अनुकूल नहीं हैं और वर्ष 2000 में की गई ऐसी ही कवायद का कोई बहुत सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आया था।

अधिकारियों ने यहां यह बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के संघर्षविराम के अनुरोध पर केंद्र राजी भी हो जाता है तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन भी ऐसा ही कदम उठाएंगे।

तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा वर्ष 2000 में घोषित सशस्त्र अभियानों की शुरुआत न करने की पहल को याद करते हुए एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि 18 साल पहले करीब चार महीने की इस अवधि के दौरान श्रीनगर हवाई अड्डे पर बड़ा आतंकी हमला हुआ था।

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अब ऐसे फैसले की घोषणा को राज्य के मौजूदा हालात देखते हुए कमजोरी करार दिया जा सकता है। नाम न जाहिर करने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, वर्ष 2000 में घाटी में सक्रिय लगभग सभी आतंकी संगठनों ने सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

कई लोग अब भी याद करते हैं कि चार महीने की इस अवधि के दौरान आतंकवादी घाटी में खुलेआम घूम रहे थे। क्या इस बात की कोई गारंटी है कि ऐसी स्थिति अब नहीं दोहरायी जाएगी।

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वर्ष 2000 में आतंकियों ने हवाईअड्डे पर बोला था हमला

वर्ष 2000 में जब संघर्ष विराम प्रभावी था तब लश्कर-ए-तैयबा के छह आतंकवादियों ने श्रीनगर हवाईअड्डे पर हमला बोल दिया था और इस दौरान दो नागरिकों और दो सुरक्षाकर्मी मारे गए थे।

जवाबी कार्रवाई में सभी छह आतंकवादी मारे गए थे। एक अन्य अधिकारी ने कश्मीर घाटी में मौजूदा हालात को अशांत बताया जहां पिछले चार महीने के दौरान हिंसा की करीब 80 घटनाएं हुई थीं।

अक्सर देखा जाता है कि मुठभेड़ स्थल पर आतंकवादियों को भागने का मौका देने के लिए नागरिक आ जाते हैं और प्रदर्शन करते हैं। अधिकारी ने हालांकि इस बात पर जोर दिया कि यह एक राजनीतिक फैसला है और सरकार के सर्वोच्च स्तर पर लिया जाएगा।

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