Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

जम्मू-कश्मीर: अचानक नहीं हुई समर्थन वापसी, मोदी सरकार का ब्लूप्रिंट तैयार, होंगे सख्त निर्णय

जम्मू-कश्मीर पर देशभर की नजर रहती है इसीलिए राष्ट्रपति शासन के समय कुछ बेहद कठोर योजनाओं को जमीन पर उतारा जा सकता है।

जम्मू-कश्मीर: अचानक नहीं हुई समर्थन वापसी, मोदी सरकार का ब्लूप्रिंट तैयार, होंगे सख्त निर्णय

जम्मू-कश्मीर को लेकर अब केंद्र सरकार कुछ बड़े निर्णय करने की रणनीति पर काम कर रही है। पीडीपी सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा अचानक नहीं हुआ इसकी बुनावट कठुआ बलात्कार कांड के बाद से ही रचनी शुरू हो गई थी।

उस वक्त अप्रैल महीने में भाजपा के सभी मंत्रियों ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को अपना इस्तीफा भी भेज दिया था, मगर महबूबा भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से बात कर उस वक्त तो राहत पा गई थीं।

उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पर चूंकि देशभर की नजर रहती है इसीलिए राष्ट्रपति शासन के समय कुछ बेहद कठोर योजनाओं को जमीन पर उतारा जा सकता है।

उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार ने प्लान-बी और प्लान-सी सूबे के लिए तैयार की हुई है। जम्मू-कश्मीर की 87 विधानसभा सीटों में से पीडीपी के पास 28 विधायक हैं भजापा के 25, नेशनल कांफ्रेंस के 15 और कांग्रेस के पास 13 विधायक हैं।

पीडीपी-भाजपा सरकार की विदाई के बाद पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस आराम से सरकार बना सकते हैं, मगर ऐसा होगा इसकी संभावना कम है। लिहाजा, राष्ट्रपति शासन को संसद से मुहर लगवाना भाजपा के लिए आसान हो जाएगा।

कांग्रेस अगर सरकार बनाना चाहेगी तो राज्यसभा से राष्ट्रपति शासन को पास करवाना केंद्र सरकार के लिए आसान नहीं होगा। मगर, बकौल गुलामनबी आजाद, कांग्रेस पार्टी को पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने में कोई रुचि नहीं, मतलब राष्ट्रपति शासन ही अंतिम विकल्प है।

राज्यपाल एनएन वोहरा का कार्यकाल इसी महीने खत्म हो रहा है। उन्हें तीसरा कार्यकाल मिलेगा या उनकी जगह पूर्व सेनाध्यक्ष दलवीर सिंह सुहाग को नया दायित्व मिलेगा, या किसी और को मिलेगा दायित्व- इस पर भी केंद्र को निर्णय करना है।

ये है प्लान-बी

उपद्रवग्रस्त आतंकवादियों का गढ़ माने जाने वाले दक्षिण कश्मीर के शोपियां और अनंतनाग जैसे जिलों में आर्म्ड फोर्स स्पेशल पॉवर एक्ट का इस्तेमाल कर सेना को ऑपरेश्न ऑल आउट की पूरी छूट दी जाए।

पाकिस्तान से घुसपैठ कर आतंकवादी कठिन भौगोलिक क्षेत्र वाले दक्षिण घाटी को अपना महफूज पनाहगार बनाते हैं। आतंकवादियों और उन्हें शह देने वाले पक्षों के खिलाफ सेना को खुली छूट कर केंद्र सरकार देश को अपना सख्त रवैया दिखाए। इससे केंद्र की मोदी सरकार की कश्मीर पर ठोस नीति आकार लेती दिखे।

ये है मोदी सरकार की प्लान-सी..

आगामी लोकसभा चुनाव में देश की जनता के बीच आपसी बातचीत के लिए रणनीतिकार अनुच्छेद 370 और 35(ए) दे सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर से हटाना संघ और भाजपा का पुराना नारा रहा है।

इस पर बहस की शुरूआत वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा के मार्फत कराई जा सकती है। इधर 370 पर सर्वानुमति बनाने का प्रयास होगा उधर एक्जीक्यूटिव आर्डर से चल रहे धारा 35(ए) की समाप्ति की घोषणा केंद्र की मोदी सरकार एक एक्जीक्टूयटिव ऑर्डर से कर सकती है।

इसके लिए संसद में जाना और वहां से पास कराने की जरूरत नहीं। अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए संसद की मंजूरी आवश्यक है। सूत्रों ने बताया कि अभी 35(ए) को हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है वहां भी केंद्र सरकार का रुख उसे हटाए जाने के पक्ष में ही है।

इस धारा के तहत विधानसभा को राज्य के नागरिकता का अधिकार दे दिया गया है। पाकिस्तान से कई हिंदुओं को लंबे समय से नागरिकता नहीं दी गई। जम्मू-कश्मीर की बेटी अगर किसी बाहरी से निकाह कर ले तो इस धारा के तहत उसकी नागरिकता समाप्त हो जाती है।

भाजपा के ज्यादातर रणनीतिकारेां का मानना है कि इन दोनों धाराओं को हटाने से देशव्यापी समर्थन पार्टी को मिल सकता है। जिससे 2019 की तैयारी में आसानी होगी।

बंटवारा भी है फार्मूले में

इस मामले से जुड़े सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े उच्च्पदस्थ सूत्रों ने ये भी बताया कि जम्मू-कश्मीर को जम्मू, कश्मीर और लद्दाख- तीन हिस्से में बांट कर नए राज्यों की स्थापना के फार्मूले पर भी काम हो रहा है।

विशेष परिस्थिति के राज्य को छोटे-छोटे राज्यों में बांटने से माना जा रहा है कि विकास को गति दी जा सकती है। ऐसा हुआ तो जम्मू और लद्दाख में भाजपा को बढ़त मिलेगी।

Next Story
Top