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कश्मीर हमला: अफजल गुरू की बरसी पर जैश-ए-मोहम्मद ने लिया भारत से बदला, दो जवान शहीद-सात घायल

जैश-ए-मोहम्मद ने अफजल गुरू की बरसी पर लिया भारत से बदला, दो जवान शहीद-सात घायल

कश्मीर हमला: अफजल गुरू की बरसी पर जैश-ए-मोहम्मद ने लिया भारत से बदला, दो जवान शहीद-सात घायल

जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने आज सुबह 4 बजे जम्मू शहर के बाहरी इलाके में स्थित सेना के एक शिविर पर हमला बोल दिया। इस हमले में भारतीय सेना के दो जवान शहीद हो गए जबकि इस गोलीबारी में जेसीओ और उनकी बेटी सहित सात लोगों के घायल होने की खबर है। भारतीय सेना के एक अधिकारियों ने जानकारी दी कि कल रात शहर के बाहरी इलाके में चेन्नी के पास स्थित सेना के सुंजवान शिविर के पिछले हिस्से से आतंकवादी दाखिल हुए और गोलीबारी शुरू कर दी।

बता दें कि खुफिया एजेंसियों ने अफजल गुरू की बरसी पर जैश ए मोहम्मद द्वारा सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाये जाने को लेकर पहले ही चेतावनी जारी की थी। अफजल गुरू को नौ फरवरी 2013 को फांसी दी गई थी। अधिकारियों ने बताया कि शिविर के पिछले हिस्से में सैन्यकर्मियों के आवासीय क्वार्टर हैं। आतंकवादियों की संख्या दो से तीन मानी जा रही है। हालांकि उन्हें अलग-थलग किया जा चुका है। अब तक तीन लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों में एक जूनियर कमीशन्ड अफसर और उनकी बेटी शामिल हैं।

वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटित की गई 2 लाख 95 हजार 511.41 करोड़ रुपए की धनराशि को रक्षा विशेषज्ञ पर्याप्त मानते हैं। हरिभूमि से बातचीत में उन्होंने कहा कि इससे सशस्त्र सेनाएं पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान और पूर्वी मोर्चे पर चीन से मिलने वाली चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर सकती हैं। साथ ही इससे सेनाओं के आधुनिकीकरण अभियान में भी किसी प्रकार का खलल नहीं पड़ेगा। इस सोच के पीछे एक बड़ा कारण सेनाओं को आपातकाल में रक्षा खरीद के लिए दी जाने वाली छूट के विकल्प का मौजूद होना भी है।

रक्षा बजट का सार

वित्त वर्ष 2018-19 में रक्षा बजट के लिए 2 लाख 95 हजार 511.41 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इसमें पूंजीगत खरीद के लिए 99 हजार 536.86 करोड़ रुपए और राजस्व व्यय के लिए 1 लाख 95 हजार 947.55 करोड़ रुपए दिए गए हैं। 99 हजार करोड़ रुपए से अधिक के पूंजीगत व्यय में सेना के लिए 26 हजार 688 करोड़, वायुसेना के लिए 35 हजार 755 करोड़ और नौसेना के लिए 20 हजार 848 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। बीते वित्त वर्ष के मुकाबले इस बार रक्षा बजट में 7.81 फीसदी का इजाफा किया गया है। बजट राशि से बाहर रखी जानी वाली रक्षा पेंशन के लिए सरकार ने 1 लाख 8 हजार 853.30 करोड़ रुपए दिए हैं। क्षेत्र में एफडीआई व निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने, आत्मनिर्भरता लाने के लिए दो रक्षा औद्योगिक उत्पादन गलियारों के विकास और रक्षा उत्पादन नीति 2018 लाने की घोषणा भी की गई है।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

सेना के सेवानिवृत अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल राज कादयान ने कहा कि केंद्र द्वारा रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटित किया गया बजट पर्याप्त है। इससे सेना की आधुनिकीकरण रफ्तार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। क्योंकि रक्षा क्षेत्र में जरूरत के वक्त खरीद हो जाती है। दो मोर्चों पर युद्ध की चुनौती के विचार में पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान के साथ आपात हालात बने हुए हैं। इनके लिए आने वाले वक्त में बुलेटप्रूफ जैकेटों, नाइट विजन डिवाइस, नई राइफल, बारूदी सुरंगों को नष्ट करने वाली गड़ियां, बुलेट प्रूफ बंकरों का निर्माण प्राथमिक्ता के आधार पर किया जाएगा। पूर्वी सीमा पर बड़े उपकरणों की जरूरत होगी। इन्हें आवश्यकता के हिसाब से खरीदा जाएगा।

वायुसेना के सेवानिवृत अधिकारी एयर मार्शल बी़ के़ पांडेय ने कहा कि बलों के लिए आपातकालीन खरीद का प्रावधान होने से सैन्य बलों को काफी राहत मिलती है। ऐसे में जितनी राशि सरकार ने दी है, वह काफी है। क्योंकि अपने बयानों में प्रतिबद्धता जताते हुए पहले भी केंद्र यह स्पष्ट कर चुका है कि सेनाओं के आधुनिकीकरण के सामने पैसे की कमी की समस्या व्यवधान का कारण नहीं बनेगी। दो औद्योगिक गलियारों, नई रक्षा नीति की जरूरत एफडीआई व निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए है। यह दीर्धावधि में रक्षा खरीद और आत्मनिर्भरता के लिए बेहद जरूरी है।

नौसेना के सेवानिवृत अधिकारी वाइस एडमिरल ए़ के़ सिंह ने कहा कि इस राशि से नौसेना की आधुनिकीकरण रफ्तार प्रभावित नहीं होगी। क्योंकि रक्षा क्षेत्र में कोई भी समझौता होने के बाद कीमत किस्तों में दी जाती है। सरकार की योजना बल के लिए कोई नया समझौता इस साल के अंत तक करके उसका भुगतान अप्रैल 2019 के बजट में किया जा सकता है। मौजूदा 20 हजार 848 करोड़ रुपए से गोलाबारूद की खरीद, मरम्मत का काम पूरा किया जा सकता है।

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