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घाटी में आतंकियों की घुसपैठ पर नजर रखेंगे कुत्ते, सेना दे रही ट्रेनिंग

नियंत्रण रेखा पर तैनात भारतीय जवानों के साथ अब कुत्ते भी आतंकियों की घुसपैठ पर नजर रखेंगे। आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए शुरुआती स्तर की कार्रवाई में इनका इस्तेमाल किया जाएगा।

घाटी में आतंकियों की घुसपैठ पर नजर रखेंगे कुत्ते, सेना दे रही ट्रेनिंग
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नियंत्रण रेखा पर तैनात भारतीय जवानों के साथ अब कुत्ते भी आतंकियों की घुसपैठ पर नजर रखेंगे। आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए शुरुआती स्तर की कार्रवाई में इनका इस्तेमाल किया जाएगा। ये कुत्ते स्थानीय प्रजाति के हैं जिनके दो बैच को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

आधिकारिक बयान के मुताबिक, अखनूर की डॉग यूनिट में इन्हें प्रशिक्षित किया गया है। हर बैच में करीब एक दर्जन कुत्ते हैं। राजोरी, पुंछ और जम्मू के कुछ क्षेत्रों की एलओसी पर सेना की यूनिटों में इनकी तैनाती होगी। इस समय जम्मू-कश्मीर में दो प्रजाति के कुत्ते हैं। इनमें जर्मन शेफर्ड और असाल्ट डाग शामिल हैं। अब स्थानीय नस्लों को मिलाकर तीन प्रजाति के कुत्ते सेना के पास हो जाएंगे।

दरअसल, एलओसी पर आतंकी गतिविधियों को नियंत्रित करने में सेना की डॉग स्क्वाएड ने अहम रोल निभाया है। एक महीना पहले ही इसी यूनिट में रखे गए जर्मन शेफर्ड प्रजाति के ‘चैंपियन’ नाम के कुत्ते ने सैन्य यूनिट के पास दबाए गए गोला बारूद को बरामद करने में मदद की थी। इसके मद्देनजर ही ऐसा कदम उठाया गया है।

सैनिकों की रखवाली भी करेंगे

इन कुत्तों को घुसपैठियों से झपटने, छुपाए गए गोला बारूद, आईईडी एवं अन्य सामग्री का पता लगाने, मुठभेड़ के दौरान आतंकियों का पता लगाने आदि का प्रशिक्षण दिया गया है। ये सैनिकों की रखवाली भी करेंगे।

कुत्तों के दो बैच तैयार

कर्नल देवेंद्र आनंद (प्रवक्ता, सेना) ने बताया कि इन कुत्तों को अखनूर की डॉग यूनिट में प्रशिक्षण देकर तैयार किया गया है। ये यूनिटों की रखवाली के साथ-साथ मुठभेड़ के दौरान भी जवानों की मदद करते हैं। इनको शुरुआती कार्रवाई में इस्तेमाल किया जाएगा।

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