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बीमा कम्पनी AXA ने की मदद, टीम हरियाली क्रांति ने जौनापुर में लगा दिए 9000 पेड़

एक मोटर बोट तो अप्रैल के शुरुआत में शुरू हो जाएगी। जबकि दूसरी इसके कुछ दिन बाद। मोटर बोट और स्कूटर राइडर चलाने के प्रयासगत दिनों ट्रायल के तौर पर किए गए थे, लेकिन अब नियमित रूप से यहां मोटर-बोट और स्कूटर राइडर की व्यवस्था पर्यटकों के लिए होगी।

बीमा कम्पनी AXA ने की मदद, टीम हरियाली क्रांति ने जौनापुर में लगा दिए 9000 पेड़
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पीपल बाबा के नेतृत्व में कार्य कर रही हरियाली क्रांति की टीम देशभर में हरियाली क्रांति लाने के लिए कार्य कर रही है। पीपल बाबा की इस मुहीम में देश भर में लोगों का अद्भुत समर्थन मिल रहा है। कार्पोरेट्स भी इस कड़ी में कहीं पीछे नहीं है। इसी क्रम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के जौनापुर में कार्पोरेट और एनजीओ की टीम का एक अद्भुत प्रयास देखने को मिला है। इसमें अलग-अलग उम्र और प्रोफेशन के लोग इसमें भाग ले रहे हैं। कोरोना काल में जिन लोगों का आना सम्भव नहीं हो पाया उन लोगों ने अपने नाम पर अपने जन्मदिवस पर पेड़ लगाने के लिए टीम से सम्पर्क करते हैं टीम उनके नाम पर पेड़ लगाकर उन्हें विडियो शेयर करती है।

कैसे हुई थी शुरुआत

बिगत दिवस दिल्ली जौनापुर में एक बड़े पौधारोपण कार्यक्रम के तहत 400 पौधे लगाये गए। जिसमें देश के मशहूर पर्यावरण कर्मी पीपल बाबा अपनी टीम के साथ उपस्थित हुए इनके साथ बीमा कम्पनी के कर्मचारी भी शामिल रहे। इस बात की तफतीस करने पर यह बात पता चली कि ऐसे कार्यक्रम AXA group और Give Me Trees Trust के लोग हर महीने करते हैं। हर महीने चल रहे निरंतर पेड़ लगाओ अभियान के तहत अबतक अरावली के उजाड़ क्षेत्र में 9000 पेड़ लगाये जा चुके हैं, गौरतलब है कि इस अभियान के तहत यहाँ पर 120000 पेड़ लगाने का अभियान चल रहा है।

इस कहानी की शुरुआत करीब साल भर पहले हुई थी। जब जौनपुर के बाबा नीम करौली आश्रम के प्रबन्धन कमेटी ने पीपल बाबा से मन्दिर के आसपास खाली पड़ी जमीन में हरियाली लाने के लिए सम्पर्क साधा और पिछले बैशाखी के दिन axa AXA group की मदद से पौधारोपण का कार्य शुरू हुआ अरावली के पहाड़ों में उजाड़ पड़े इस जमीन में एक बार फिर से हरियाली वापस आ गई है।

क्या रहीं चुनौतियां


मानवीय गतिविधियों की वजह से अरावली की पहाड़ियों से पहले पेड़ समाप्त हो गये थे इस इलाके में फिर से पेड़ पौधों के साथ- साथ वन्य जीवों को पुनः बुलाने के लिए फारेस्ट लैंडस्केप रेस्टोरेशन कार्यक्रम (FLR: Forest Landscape Restoration) चलाया गया। चुकि यह जमीन पथरीली जमीन थी इसी वजह से इन जमीनों में पानी नहीं रुक पाता इसीलिए पहाड़ों को तोड़कर जड़ें अन्दर तक जाएँ इसीलिए यहाँ पर पीपल, बड, अमलतास आदि लगाये गए। वैसे अब यहाँ पर 46 प्रकार के native स्वदेशी प्लांट लगाये जा रहे हैं, यहाँ की विलायती कीकर को नेटिव स्पीशीज से रिप्लेस किया जा रहा है। इन जमीनों में पहले बिलायती कीकर ज्यादे थे धीमे-धीमें इन्हें स्थानांतरित किया गया और कैसे किया गया कार्य।

फैसिंग: वीरान पड़े पहाड़ पर हरियाली वापस लाने के लिए सर्वप्रथम पत्थरों को तोड़कर निकालने का कार्य किया गया फिर जहाँ मिटटी की कमी थी वहां पर मिटटी डालकर बराबर किया गया। घास फूस को निकाल कर पानी का छिडकाव कराया गया जिससे मिटटी खुद ब खुद अपना जगह बनाकर गड्ढे की तरफ चली गई।

लेबलिंग: फिर मिट्टी को उचाई से नीचे की तरफ लाया गया।

प्लांटेशन: फिर हर महीने पेड़ लगाने की शुरुआत हुई धीरे-धीरे हर हफ्ते आसपास रह रहे लोग पेड़ों के बीच आकर श्रम दान करने लगे।

नेस्टिंग: चुकि यहाँ से स्वदेशी वनस्पतियों पूरी तरह से समाप्त हो गई थी केवल विलायती कीकर ही कहीं कहीं थे इसीलिए दीवारों और बचे पेड़ों पर पक्षी आकर बैठें उनके लिए घोसले बनाये गए और उन्हें पानी व दाना देने के लिए बर्तन रखे गये। इस वजह से पक्षियों का बड़े पैमाने पर आना शुरू हो गए इनके गोबर से भी कई बाहरी बनस्पतियां यहाँ पर उग गईं।

मल्चिंग: चुकि यह पथरीली जमीन थी इसीलिए इस जगह से मिट्टी भी बहुत तेजी से उड़ता था। इसे रोकने के लिए पेड़ के गिरे पत्तों और पुवाल आदि को खाली जमीन में बिछाया गया। इससे जहाँ मिटटी का कटाव रुका वहीं उस इलाके में नमी खुद ब खुद बढ़ गई।

कम्पोस्टिंग: इस क्षेत्र में केवल रासायनिक खाद का कोई उपयोग नहीं किया गया यहाँ पर केवल जैविक खाद का उपयोग हो रहा है इसके लिए गौशाला के गोबर और आसपास के इलाके से गोबर खरीद कर डाला गया।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग: इस जमीन में पानी बिलकुल नहीं रुकता था। इसीलिए पानी के टैंकर बाहर से मंगाए जाते हैं। इस कमी को दूर करने के लिए वर्षा जल को संचयित करने के लिए 4 छोटे-छोटे तालाब बनाये गए, पानी को संचयित करने के लिए वाटर होल बनाये जा रहे हैं साथ ही साथ पौधों की कटोरियाँ बनाई जा रही हैं। पानी के इतने इंतजाम के बाद भी अभी पानी सालो साल नहीं हो पाता क्योंकि जमीन में पानी नहीं है। अभी भी पौधों को पानी पिलाने के लिए बाहर से पानी के टैंकर मंगाने पड़ते हैं।

निरंतर 1 सालों से किये जा रहे इस कार्य में सबसे ज्यादे महत्वपूर्ण कम्युनिटी इन्वोल्वेमेंट का रहता है। एन सी आर के हर हिस्से सेल लोग अपने माता पिता के साथ छुट्टियों पर आते रहते हैं और पर्यावरण सम्बर्धन में योगदान देते हैं। जिसके लिए givetrust के वरिष्ठ स्वयंसेवक विनीत वोहरा लोगों को पर्यावरण से जोडने के लिए हर घर नर्सरी कार्यक्रम चलाते हैं। लोगों को ट्रेनिंग देते हैं कैसे घर पर आये फलों आम, अमरुद,संतरा, नींबू के बीजों से नर्सरी तैयार कराई जाती है। स्कूलों में हरियाली अम्बेस्डर तैयार किये जाते हैं। ये इस साईट पर आकर पौधों की देखभाल करते हैं। खासकर जन्मदिवस पर पेड़ लगाने के लिए आस-पास के लोग आते रहते हैं। पीपल बाबा जहाँ पेड़ लगाते हैं वहीं उनके स्वयमसेवक हाथों को जोड़ते हैं और कोम्मुनिटी से आये लोग पेड़ों को अडॉप्ट करके उनकी देखभाल कते हैं। इस प्रकार इस इस इलाके में हरियाली बढाने में सहायक हो रहे हैं। कोरोना काल में साल में पिछली बैशाखी के दिन शुरू हुए पेड़ लगाओ कार्यक्रम की वजह से एक वर्ष में 6 एकड़ जमीन में हरियाली काबिज हो चुकी है।


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