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हिमाचल प्रदेश : 300 मकानों पर चलेगा बुल्डोजर, ये है वजह

सीएम जयराम ठाकुर के इस फैसले के पीछे हालही में सोलन जिले के कुमारहट्टी में चार मंजिला भवन गिरने की घटना भी रही। साथ ही मानसून शुरू होते ही देश के कई हिस्सों में इमारतों के गिरने की खबरे भी आम हो जाती है। मुंबई में पिछले 15 दिनों में दो बार इमारत गिरी और 20 से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आकर मर चुके हैं। और फिर हिमाचल में बरसात शुरू होती है तो कई कई दिनों तक चलती रहती है।

हिमाचल प्रदेश : 300 मकानों पर चलेगा बुल्डोजर, ये है वजहHimachal Pradesh 300 hundred building collapse soon in Shimla

अपने देश में कहा जाता है कि यहां का कोई भी विभाग तभी कारगर कदम उठाता है जब कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती है। इसकी सत्यता पर फिलहाल किसी तरह का कोई शक भी नहीं किया जा सकता। लेकिन इन सबके बीच हिमाचल सरकार दो कदम आगे निकली। और शिमला में जितने भी जर्जर मकान हो गए हैं उनकी सूची करेगा और जल्द ही जरूरी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर के इस फैसले के पीछे हालही में सोलन जिले के कुमारहट्टी में चार मंजिला भवन गिरने की घटना भी रही। साथ ही मानसून शुरू होते ही देश के कई हिस्सों में इमारतों के गिरने की खबरे भी आम हो जाती है। मुंबई में पिछले 15 दिनों में दो बार इमारत गिरी और 20 से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आकर मर चुके हैं। और फिर हिमाचल में बरसात शुरू होती है तो कई कई दिनों तक चलती रहती है।

प्रदेश की राजधानी शिमला में नगर निगम पुराने भवनों की सूची तैयार करने में लग गया है। अगले दो दिन में रिपोर्ट सौंपने के फैसले से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितनी तेजी दिखाई जा रही है इस मसले को लेकर। एपी ब्रांच के सभी जेई अपने संबंधित वार्डो में निरीक्षण कार्य में जुट गए हैं। अगले दो दिन में वो अपनी रिपोर्ट संयुक्त आयुक्त की अध्यक्षता वाली विशेष कमेटी को सौंप देंगे।

गौरतलब है कि शिमला में ऐसे मकानों की संख्या करीब 300 के आसपास है जिनकी स्थिति एकदम जर्जर हो गई है। ये मकान अंग्रेजी हुकूमत के वक्त बनवाए गए। आजादी के बाद इन मकानों में ऊपरी डेंटिंग पेंटिंग के अलावा कुछ भी अलग नहीं हुआ। बारिश, आंधी और तूफान झेलते ये अब अपने आखिरी दौर में पहुंच चुके हैं। इन घरों में रहने वाले लोग बेहद कम किराया होने के कारण इसमें से निकलने को तैयार नहीं हैं।

शिमला में कई मकान ऐसे हैं जिनको वर्षो पहले अनसेफ घोषित किया जा चुका है। पर ये मकान आजतक खाली नहीं हुए हैं। इसके पीछे मालिक और किराएदारों के बीच के विवाद प्रमुख हैं। जर्जर मकान में रहने वालों को ही नहीं बल्कि उसके आसपास के लोगों पर भी लगातार खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने इन्हें तत्काल तोड़ने के आदेश दिए हैं पर आज तक किसी मकानमालिक ने अपने मकान पर हथौड़े नहीं बरसाए।

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