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शुगर मिल में कर्मचारी की हुई मौत, धरने पर बैठी पत्नी ने मांगी इच्छा मृत्यु

सुनीता देवी ने बताया कि उसके पति जय किशन वर्ष 1985 से शुगर मिल में कार्यरत थे। 7 फरवरी 2011 को ड्यूटी के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। शुगर मिल में 2005 का एक्स ग्रेशिया पॉलिसी के तहत आश्रित परिवार को मिलने वाली 5 लाख रुपए की वित्तीय सहायता नहीं मिली।

भारतीय गन्ना नीति के खिलाफ डब्लूटीओ में ब्राजीलगन्ना (प्रतीकात्मक फोटो)

शाहाबाद सहकारी शुगर मिल के कर्मचारी रहे जय किशन की पत्नी सुनीता देवी ने अपने पति की जगह आश्रित को नौकरी देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार व प्रबंधन नौकरी नहीं दे सकता तो उसे आत्महत्या करने की अनुमति दी जाए। बुधवार से सुनीता मिल के बाहर धरने पर बैठी। सुनीता देवी ने बताया कि उसके पति जय किशन वर्ष 1985 से शुगर मिल में कार्यरत थे। 7 फरवरी 2011 को ड्यूटी के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।

उस समय शुगर मिल में 2005 का एक्स ग्रेशिया पॉलिसी लागू थी। इसके तहत आश्रित परिवार को 5 लाख रुपए की वित्तीय सहायता या मृतक कर्मचारी के आश्रितों को नौकरी देने का प्रावधान था, लेकिन मिल द्वारा उन्हें गुमराह कर केवल 5 लाख रुपए मौखिक तौर पर देने की बात थी। सुनीता ने बताया कि मिल की ओर से 6 माह से पहले आश्रित परिवार को फार्म दिया जाना था, लेकिन 10 माह तक उन्हें कोई फार्म नहीं दिया गया।

6 दिसंबर 2011 को जब उन्होंने मिल में लीगल नोटिस भिजवाया तब उन्हें 5 लाख रुपए देने का फार्म ही दिया गया। जबकि मांग की थी कि या तो 2005 की पॉलिसी के तहत उसकी लड़की को नौकरी दी जाए या नई पॉलिसी 2006 के तहत पति की सेवानिवृत्ति की आयु तक तनख्वाह दी जाए, लेकिन मिल प्रशासन की ओर से मृतक कर्मचारियों के आश्रितों के लिए आरक्षित 5 प्रतिशत कोटे की बात को मिल प्रशासन द्वारा यह कहकर टाल दिया गया कि यह कोटा पूरा हो चुका है। शुगर मिल के एमडी सुशील कुमार का कहना है कि शुुगर फेडरेशन पंचकुला द्वारा जब तक एनओसी जारी नहीं होती तब तक आश्रित परिवार को नौकरी का लाभ नहीं मिल सकता।


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