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किन्नर समाज ने कायम की मिसाल, अपने पैसे से करवाई एक बेटी की शादी

किन्नरों को लेकर हमारे समाज में ज्यादातर लोगों की जो धारणा है वो किसी से छिपी नही है। जहां भी देखा उन्हें एकदम हेयदृष्टि से देखा। किन्नर वर्ग खुद को आगे भी करना चाहा तो उसे ताने मार-मारकर पीछे कर दिया। उन्हें बस इस काबिल समझा गया कि तुम बस किसी के घर बच्चा पैदा हो तो नाच गाना गाकर पैसा लो। ट्रेन में पैसा मांगो। शादी में जाकर पैसा मांगो।

किन्नर समाज ने कायम की मिशाल, अपने पैसे से करवाई एक बेटी की शादीTransgender Community married daughter of village by own expenditure

किन्नरों को लेकर हमारे समाज में ज्यादातर लोगों की जो धारणा है वो किसी से छिपी नही है। जहां भी देखा उन्हें एकदम हेयदृष्टि से देखा। किन्नर वर्ग खुद को आगे भी करना चाहा तो उसे ताने मार-मारकर पीछे कर दिया। उन्हें बस इस काबिल समझा गया कि तुम बस किसी के घर बच्चा पैदा हो तो नाच गाना गाकर पैसा लो। ट्रेन में पैसा मांगो। शादी में जाकर पैसा मांगो। पर किन्नर समाज ने हरियाणा में जो किया उसने उन लोगों के मुंह पर टेप चिपका दिया जो उन्हें लेकर सिर्फ निगेटिव बात कर रहे थे।

हुआ यूं कि हरियाणा के झज्जर जिले में एक गरीब परिवार की बेटी की शादी किन्नर समाज ने बड़े धूमधाम से किया। नेग स्वरूप रुपए, गहने और फर्नीचर दिया साथ ही माता-पिता बनकर आगे आई और कन्यादान भी किया। कुल मिलाकर शादी को शानदार बनाने के लिए जितना कुछ किया जा सकता है उन्होंने किया। बेरी की किन्नर लाली ने इस शादी की अगुआई करके इसे यादगार बना दिया।

दुनिया में हर किसी जीवित प्राणी के पास सवेंदनशीलता है। उसे दुख और सुख का एहसास होता है। दूसरो के द्वारा दी जा रही इज्जत भी उसे अच्छी लगती है। ऐसे ही एकदिन किन्नर लाली 16 साल पहले गांव में किसी के घर बच्चा पैदा होने के बाद बधाई मांगने गई थी। जहां रेनू नाम की लड़की ने उन्हें मां बोल दिया। लाली ने कहा कि मैंने उसी वक्त रेनू को अपनी धर्म बेटी मान ली।

हर वर्ग में अच्छे और बुरे लोग होते रहे हैं। ठीक इसी तरह किन्नर समाज में भी है ये किसी से छिपा नहीं कि इस वर्ग में ऐसे भी लोग हैं जो जबरन वसूली करते हैं गलत कामों के जरिए पैसा कमाते हैं पर हम उन लोगों की वजह से पूरी बिरादरी पर सवाल खड़ा कर सकते हैं। लाली उन्हीं में से हैं। जिन्होंने अभी तक ऐसे ही कई जरूरतमंद लोगों की मदद कर चुकी हैं।

वह जागरण करवाती हैं, समय-समय पर भंडारा करवाती हैं। साथ ही उन लोगों की आर्थिक मदद भी करती हैं जो अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाते। हर वर्ग में ऐसे ही लोगों की जरूरत है। दुनिया को बेहतर बनाने के लिए ऐसे लोगो की जरूरत है। जिन्हें सिर्फ अपनी फिकर न हो बल्कि सबकी फिकर हो। प्यार बांटने वालों के ही दम पर तो दुनिया चल रही है वरना पाप करने वाले तो मानवता और इस दुनिया को कब का खत्म कर चुके होते।

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