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जमीन का मालिक बनकर बेच दी 8 एकड़ जमीन, ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

रेवाड़ी में फर्जी तरीके से 8 कनाल जमीन बेच दी। साथ ही खरीददार का मामला सामने आया है। रेवाड़ी कोर्ट ने फर्जी मालिक बनकर 8 कनाल जमीन बेचने वाले व्यक्ति को फटकार लगायी है। साथ ही खरीदादर को मामले में बरी कर दिया है

जमीन का मालिक बनकर बेच दी 8 एकड़ जमीन, ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासाजमीन बेचने के नाम पर की धोखाधड़ी (प्रतीकात्मक फोटो)

रेवाड़ी में फर्जी तरीके से 8 कनाल जमीन बेचने का मामला सामने आया है। रेवाड़ी कोर्ट ने फर्जी मालिक बनकर 8 कनाल जमीन बेचने वाले व्यक्ति को फटकार लगायी है। साथ ही खरीदादर को मामले में बरी कर दिया है। गांव हजारीवास निवासी धनराज ने 14 दिसंबर 2012 को दयाचंद से गांव दिदौली में 8 कनाल जमीन का सौदा 28 लाख रुपए में किया था। दयाचंद ने खुद की जमीन दिखाते हुए 5 लाख रुपए का चौक बतौर एग्रीमेंट के लिए ले लिया। रजिस्ट्री कराने से पहले ही धनराज को पता चल गया कि यह जमीन दयाचंद की नाम नहीं है। उसके बाद धनराज ने चैक को तुरंत प्रभाव से कैंसील करा दिया। इसके बाद दयाचंद ने धनराज द्वारा दिया गया चैक बाऊंस कराकर कोर्ट में केस डाल दिया।

कोर्ट में साबित नहीं कर पाया खुद की जमीन

धनराज की तरफ से कोर्ट में पैरवी करने वाले अधिवक्ता दिनेश लखेरा ने बताया कि कोर्ट में दयाचंद ने यह कहते हुए केस डाला था कि उसने जमीन का एग्रीमेंट कराया था और उसकी एवेज में दिया गया पांच लाख रुपए का चैक बाऊंस हो गया। कोर्ट में धनराज की तरफ से एडवोकेट दिनेश ने पूरे मामले को रखा और बताया कि किसी और की जमीन दयाचंद ने खुद की दिखाकर फर्जी तरीके से एग्रीमेंट करा दिया। उसके बारे में पता चलते ही तुरंत चैक को बाऊंस कराया गया था। अगर असल में दयाचंद मालिक है तो उसके सबूत दे, पूरी पेमेंट ब्याज सहित की जाएगी। कोर्ट में काफी तारीख-पेशी के बाद भी दयाचंद जमीन से संबंधित अपना मालिका हक साबित नहीं कर पाया, जिसके बाद मंगलवार को न्यायाधीश समप्रीत कौर ने धनराज को बरी करते हुए दयाचंद को फटकार लगाई है।

यह है ठगी का पैंतरा

ठगी का पैंतरा काफी शातिराना है। अकसर जमीन खरीद-फरोख्त का धंधा करने वाले व्यक्ति दूसरे के नाम जमीन को बताकर सौदा करते है और रजिस्ट्री के दौरान उसे खड़ा करने की बात करते है। इसी की आड़ में कुछ लोग ठगी का धंधा भी कर रहे है। ऐसे केस पहले भी बहुत आ चुके है। दयाचंद भी इसी तरह की ठगी करने की फिराक में था, लेकिन उससे पहले ही धनराज को उसकी हकीकत पता चल गई और उसने पांच लाख रुपए का चैक कैंसील करा दिया, जिसके बाद दयाचंद ने कोर्ट में केस डाला और वहां भी उसकी हार हुई।

सावधान रहने की है जरूरत

एडवोकेट दिनेश लखेरा ने बताया कि इस तरह के केस पहले भी सामने आते रहे है। इस तरह के केस में लोगों को सावधान होने की जरूरत है। इस केस की बात करें तो धनराज के साथ ही ठगी की कोशिश हुई और उसके बाद उसे ही हरासमेंट किया गया, लेकिन कोर्ट के सामने असलियत आ गई और दयाचंद की पोल खुली।

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