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प्रशासन की सख्ती कायम, शादियों से गायब हुई थर्माकोल और प्लास्टिक की प्लेट

अब शादी-पार्टियों में लोग कागज की प्लेटों में ही खाना खाएंगे। कागज के ही दोने में रसगुल्ला-रसमलाई मिलेंगी। इसके साथ ही कागज के गिलास में पानी और कोल्ड ड्रिक्स पीने को मिलेगी।

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अब शादी-पार्टियों में लोग कागज की प्लेटों में ही खाना खाएंगे। कागज के ही दोने में रसगुल्ला-रसमलाई मिलेंगी। इसके साथ ही कागज के गिलास में पानी और कोल्ड ड्रिक्स पीने को मिलेगी। इन प्लेट में खाना रखते ही पेपर से खुशबू आएगी, जो सभी को पसंद आएगी। ये कागज की प्लेट थर्मोकोल और प्लास्टिक के मुकाबले ज्यादा मजबूत हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि फेंके जाने के एक सप्ताह में ही यह पूरी तरह से गल जाएगी।

थर्मोकोल प्लास्टिक की प्लेट और दोने पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन रहे थे। ये गलकर नष्ट नहीं होते थे। इसके साथ ही इनमें गर्म खाना रखकर खाने से सेहत को नुकसान पहुंचता था। इसके चलते सरकार ने प्लास्टिक और थर्मोकोल की प्लेटें और अन्य उत्पादों को बंद कर दिया था। लगातार कार्रवाई होने से बाजार में इसकी आवक कम हो गई। अब शादियों का सीजन चल रहा है। लोग प्लास्टिक और थर्मोकोल की प्लेटे ही मांग रहे हैं। इसकी उपलब्धता न होने की स्थिति में बाजार में लकड़ी और कागज की प्लेट व अन्य उत्पाद आ गए हैं।

थर्मोकोल की प्लेट से ज्यादा मजबूत

बाजार में कागज की प्लेट, दोने, प्याले, कटोरे और गिलास उपलब्ध हैं। हालांकि, चम्मच लोगों को लकड़ी की ही खरीदनी पड़ रही है। कागज की प्लेट छह से दस रुपए प्रति प्लेट की कीमत में उपलब्ध है। इसी तरह दोने, कटोरे और गिलास 50 से 70 पैसे में मिल रहे हैं। ये देखने में तो सुंदर हैं ही, खाना खाने में भी सुविधाजनक हैं।

प्लास्टिक और थर्मोकोल की प्लेट में खाना रखने के दौरान वह मुड़ने लगती थी, जबकि ये कागज की प्लेट सख्त होने के कारण आराम से हाथ में पकड़ में रहती हैं। ऐसे में खड़े होकर खाना खाने में भी परेशानी नहीं होती है। विशेषज्ञों का दावा है कि इस्तेमाल के बाद एक सप्ताह में ये कागज वाली क्रॉकरी गल जाएगी।

पॉलीथिन के खिलाफ जंग जारी

हवा में जहर घोल रहे प्रदूषण के खिलाफ जुबानी जंग तो चल रही है। लेकिन हकीकत में कुछ खास नहीं किया गया। राहत की बात यह है कि लोगों की सेहत बिगाड़ने का काम कर रही पॉलीथिन के खिलाफ कुछ दिन से अभियान चल रहा है। प्रदूषण बोर्ड अभी भी सुस्त है, लेकिन नगर परिषद के कर्मचारी बाजार में व्यापारियों के चालान कर रहे है।

गौर करने वाली बात यह है कि व्यापारियों ने तर्क दिया कि थोक का व्यापार करने वाले पर ही रोक लगा दी जाए तो व्यापारी को थैली उपलब्ध ही नहीं होगी, लेकिन अधिकारी भी थोक व्यापारी को निशाना बनाना की बजाए आम व्यापारियों पर कैंची चलाने के लिए आतुर हैं।

शादियों के सीजन में ज्यादा मारामारी

8 नवंबर से सावे शुरू हो चुके है। दिसंबर तक ब्याह शादी होंगे। एक माह बाद फिर 14 जनवरी से ब्याह शादी का सीजन शुरू हो जाएगा। नवंबर माह में हर रोज शादियां है। ऐसे में लोगों को दोने, प्याले, कटोरेस गिलास खरीदने में परेशानी हो रही है। लोग खुद भी मान रहे है कि यह परेशानी जरूर है, लेकिन स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए अच्छा संदेश है।

प्लास्टिक और थर्मोकोल पर रोक लगी हुई है। शादी-विवाह में भी कागज की प्लेट और दोने प्रयोग करने चाहिए। यह बाजार में उपलब्ध है और सस्ती है। लोगों को इसको खरीदने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मैरिज होम संचालकों के साथ भी इसको लेकर बात की जाएगी। मोहित मुदगिल, एसडीओ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

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