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मां ने बेटी को मारने के लिए झाड़ियों में फेंका, भगवान ने फरिश्ते के रूप में भेजा इंसान

सोनीपत में कलियुगी मां ने दो दिन की नवजात बेटी को मरने के लिए झाड़ियों में फेंक दिया। लेकिन भगवान ने फरिश्ता बनाकर इंसान भेजकर उसे बचा लिया है।

मां ने बेटी को मारने के लिए झाड़ियों में फेंका, भगवान ने फरिश्ते के रूप में भेजा इंसानसोनीपत में बेटी को मारने के लिए झाड़ियो में फेंका (प्रतीकात्मक)

सोनीपत में शुगर मिल के पास इंसानियत को शर्मसार करने का मामला सामने आया हैं। कलियुगी मां ने दो दिन की बच्ची को मरने के लिए झाडि़यों में छोड़ दिया। लेकिन उस बच्ची को बचाने के लिए ईश्वर ने इंसान के रूप में फरिश्ते को भेज दिया।

जानकारी के मुताबिक रविवार सुबह शुगर मिल के पास झाडि़यों में दो दिन की नवजात बच्ची संदिग्ध परिस्थितियों में मिली। झाडि़यों में मधूमक्खी के छते से शहद निकाल रहे राहगीर ने बच्ची के रोने की आवाज सुनी। उसने झाडि़यों में नजदीक जाकर देखा तो बच्ची पड़ी हुई मिली। राहगीर ने भ्रूण होने की सूचना पुलिस को दी। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को नागरिक अस्पताल में भिजवाया। बच्ची को नर्सरी में नार्मल करने के लिए चिकित्सक व स्टाफ को काफी कड़ी मशक्त करनी पड़ी। प्राथमिक उपचार के बाद उसे रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। जहां उसका उपचार चल रहा हैं।

राहगीर राजेंद्र ने बताया कि वह सुबह करीब 10 बजे शुगर मिल के पास झाडि़यों में मधुमक्खियों के छत्ते से शहद निकाल रहा था। उसी दौरान उसे बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। झाडि़यों में उसने ओर गहराई में जाकर देखा तो बच्ची रो रही थी। अचानक बच्ची ने रोना बंद कर दिया। मामले को लेकर पुलिस को सूचना दी। कोर्ट चौकी पुलिस सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची। एचसी जगप्रीत ने बच्ची को कंबल में लपेटकर नागरिक अस्पताल में पहुंचाया। बच्ची को आपातकालीन कक्ष से नर्सरी में लेकर जाया गया। नर्सरी में मौजूद बाल रोग विशेषज्ञ डा. अलंकिृता ने बच्ची को प्राथमिक उपचार दिया। उसके बाद बच्ची को रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। जहां उसका उपचार चल रहा हैं।

बच्ची का बदन हो चुका था ठंडा

महिला चिकित्सक के अनुसार किसी ने रात के समय बच्ची को झाडि़यों में डाला हैं। बच्ची का शरीर पूरी तरह से ठंडा हो चुका था। बच्ची के शरीर पर डाइपर था। बच्ची गर्म करने में स्टाफ कर्मियों को कड़ी मशक्त करनी पड़ी। चिकित्सक की मानें तो कुछ घंटे बच्ची को अस्पताल में नहीं लाया जाता तो बच्ची का बचना मुश्किल था। बच्ची की हालत में सुधार होने के बाद उसे रोहतक भेज दिया।

बच्ची को लगा हुआ है कोड कलेम्प

झाडि़यों में मिली बच्ची महज दो दिन की ही बताई जा रही है। बच्ची के शरीर पर कोड कलेम्प लगा हुआ मिला है। बच्ची का जन्म किसी सरकारी अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी पर होना प्रतीत हो रहा हैं। बच्ची पर लगे नीले रंग के कोड कलेम्प को सरकारी अस्पतालों में प्रयोग किया जाता हैं। अब पुलिस कोड कलेम्प की सहायता से बच्ची के परिजनों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

चीटियों को बच्ची ने काट खाया

राहगीर राजेंद्र ने बताया कि बच्ची के एक बार रोने की आवाज सुनवाई दी। उसके बाद रोने की आवाज आनी बंद हो गई। झाडि़यों में ओर ज्यादा अंदर जाकर देखा तो कंबल के पास भ्रूण होना समझा, लेकिन पास जाकर देखा को बच्ची को चीटियां काट रही थी। बच्ची रूक-रूक कर रो रही थी। मामले को लेकर पुलिस को तुरंत अवगत करवाया।

बदन पर मिला महज डाइपर व कोड कलेम्प

इंसानियत को शर्मसार कर बच्ची के जन्म के दो दिन बाद ही उसे मरने के लिए झाडि़यों में फेंक दिया। बच्ची के पास कंबल मिला, लेकिन बच्ची को कंबल में नहीं लपेटा गया था। अनुमान के अनुसार बच्ची को झाड़ी में फेंकते समय कंबल अलग हो गया। बच्ची की संासे ठंड के कारण रूक-रूक कर चलने लगी। चिकित्सक के अनुसार बच्ची की ठंड के कारण मौत हो सकती थी। समय रहते बच्ची को अस्पताल में लाया गया। जिसका उपचार किया गया। जांच अधिकारी जगप्रीत सिंह ने कहा कि शुगर मिल के पास झाडि़यों में भू्रण मिलने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचे तो बच्ची मिली। तुरंत बच्ची को लेकर नागरिक अस्पताल पहुंचे। जहां चिकित्सक ने बच्ची का प्राथमिक उपचार किया। उसके बाद बच्ची को रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। रोहतक में बच्ची का उपचार चल रहा हैं। आसपास के अस्पताल, पीएचसी व सीएचसी पर दो दिन के अंदर जन्मे बच्चों का रिकार्ड खंगाला जा रहा हैं। जल्द से जल्द माता-पिता का पता लगाकर मामले का पटाक्षेप कर दिया जायेगा।


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