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हरियाणा में बचपन बचाओ आंदोलन ने पकड़ा जोर, दुकानों से छुड़ाए गए इतने बच्चे

हरियाणा के बहादुरगढ़ में टीम को चार दुकानों पर छह बच्चे काम करते मिले, सभी के खिलाफ केस दर्ज।

हरियाणा में बचपन बचाओ आंदोलन ने पकड़ा जोर, दुकानों से छुड़ाए गए इतने बच्चे
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Minor children were getting married
हरिभूमि न्यूज. बहादुरगढ़। बाल श्रम पर अंकुश लगाने के लिए गुरूवार को बचपन बचाओ आंदोलन के तहत टीम ने शहर की एक बाद एक चार दुकानों पर दस्तक दी। टीम को इन दुकानों पर छह बच्चे काम करते मिले। बच्चों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया है। चारों दुकानदारों पर चाइल्ड लेबर एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

बता दें कि शहर में बाल श्रम पर अंकुश लगाने के लिए बचपन बचाओ आंदोलन की शुरूआत की गई। इसी के तहत गुरूवार को आंदोलन के राज्य समन्वयक पुनीत शर्मा, जिला बाल संरक्षण अधिकारी लतिका, चाइल्ड लाइन से राजेश, एएसआई जगबीर, एएसआई सुरेश, विजयपाल और धर्मेंद्र आदि की टीम ने बहादुरगढ़ में दस्तक दी। इस टीम ने मेन बाजार के कमेटी चौक के पास स्थित गुरु नानक स्वीट्स, लावन्या शूज और पंजाब सूट्स आदि दुकानों पर दबिश दी। गुरु नानक स्वीट्स पर एक 16 वर्षीय बालक काम करता मिला। कुछ ही दूरी पर स्थित पंजाबी सूट्स पर दो बालक काम करते मिले। दोनों बच्चे से दुकानों पर लगभग 11 घंटे तक काम लिया जा रहा था और वेतन पांच से छह हजार दिया जा रहा था। इस संबंध में गुुरु नानक स्वीट्स के मालिक सन्नी शर्मा, पंजाब सूट्स के प्राणनाथ, लावन्या शूज के संचालक कुलभूषण के खिलाफ सिटी थाने में जेजे की धारा 75, 79 व चाइल्ड लेबर एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। वहीं लाइनपार स्थित बीकानेर ढाबे के संचालक शिवकुमार के खिलाफ लाइनपार थाने में केस दर्ज हुआ है।

वेतन भी बेहद कम

टीम को लावन्या शूज पर दो बच्चे काम करते मिले। इनमें से एक की उम्र 13 साल तो दूसरे की उम्र 15 साल थी। 13 वर्षीय बच्चे से सुबह आठ से दोपहर ढाई बजे तक काम लिया जाता है। इसकी एवज में उसे 50 रुपये प्रतिदिन व खाना दिया जाता है। 15 वर्षीय बालक से आठ बजे से शाम सात बजे तक काम लिया जाता है। बदले में 40 रुपये रोजाना दिए जाते हैं। उसके पिता को एडवांस हजारे रुपये दिए जा चुके हैं। वेतन के बारे में बालक को कुछ पता नहीं है। इसके बाद जब टीम लाइनपार पहुंची तो वहां बीकानेर ढाबे पर एक 14 वर्षीय बच्चा काम करता मिला।

वर्जन

चार दुकानों पर छह बच्चे काम करते मिले हैं। बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी में पेश किया जाएगा। इसके बाद बच्चों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया जाएगा। यदि किसी बच्चे के अभिभावक नहीं है तो उसे चाइल्ड केयर होम भेजा जाएगा।

- पुनीत शर्मा, राज्य समन्वयक बचपन बचाओ आंदोलन

फोटो संख्या: 13

बहादुरगढ़। बचपन आंदोलन टीम के साथ जिला बाल संरक्षण अधिकारी व अन्य।

-प्रमोद शर्मा

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