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रेलवे स्टेशन-बस स्टैंड पर वन स्टॉप सेंटर के बारे में करें जागरूक

महिलाओं को सशक्त व सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा अनेक कदम उठाए गए हैं। महिलाओं की सुरक्षा व सहायता करने के लिए महिला आश्रम रोहतक में वन स्टॉप सेंटर बनाया गया है।

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रेलवे स्टेशन (प्रतीकात्मक फोटो)

रोहतक उपायुक्त आरएस वर्मा ने कहा कि महिलाओं को सशक्त व सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा अनेक कदम उठाए गए हैं। महिलाओं की सुरक्षा व सहायता करने के लिए महिला आश्रम रोहतक में वन स्टॉप सेंटर बनाया गया है। उन्होंने ये बात शुक्रवार को वन स्टॉप सेंटर की टास्क फोर्स की बैठक को संबोधित करते हुए कही।

कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास को निर्देश दिए कि वन स्टॉप सेंटर के प्रचार-प्रसार के लिए बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन पर प्रचार सामग्री के माध्यम से जागरूक करने का कार्य करें। उन्होंने कहा कि पुलिस से मिलकर आपसी तालमेल से काम करें ताकि आने वाली शिकायतों का जल्द समाधान हो सके।

उपायुक्त ने कहा कि हेल्पलाइन नंबर 1091 व 181 का ज्यादा से ज्यादा प्रचार करें। उन्होंने कहा कि वन स्टॉप सेंटर मे महिलाओं को हर तरह की मदद प्रदान की जाएगी, चाहे वह आश्रय की हो या कानूनी जागरूकता की। हिंसा से पीड़ित महिलाओं की यहीं पर काउंसलिंग भी की जाएगी।

उन्होंने ये भी बताया कि हमारा लक्ष्य हर महिला, हर जरूरतमंद को हिंसा रहित वातावरण प्रदान करना है। महिलाओं व बच्चों के कल्याण व सशक्तिकरण की जो भी स्कीम चलाई जा रही है, जिला प्रशासन का उसमें पूरा सहयोग रहता है। सखी वन स्टॉप सेंटर स्कीम के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि वन स्टॉप सेंटर में घरेलू हिंसा, यौन हिंसा, एसिड अटैक, मानसिक प्रताड़ना की शिकार महिलाओं की कानूनी मदद के साथ साथ मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग भी की जाएगी।

वर्मा ने कहा कि सेंटर का उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को एक छत के नीचे एकीकृत समर्थन और सहायता प्रदान करना है। इस अवसर पर एसडीएम राकेश कुमार, नगराधीश महेश कुमार, कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास बिमलेश कुमारी, सीएमजीजीए दिव्या लोहिता, एडवोकेट चेतना अरोड़ा सहित विभिन्न संस्थाओं व विभागों के व्यक्ति उपस्थित रहे।

सेंटर पर मिलने वाली सुविधाएं

घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को एक फोन कॉल पर मदद, महिलाओं की हर तरह की मदद देने का वादा, पीड़ित महिलाओं के लिए मेडिकल जांच इलाज की व्यवस्था, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके लिए रोजगार उपलब्ध करवाना, आपात स्थिति में रहने, खाने और इलाज की सुविधा उपलब्ध, सेंटर में कानूनी सलाह के लिए वकील भी उपलब्ध, साथ ही पीड़ित महिला एवं बालिका को मनोवैज्ञानिक परामर्श और काउंसिलिंग की सुविधा।


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