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हरियाणा से लेकर यूपी, आंध्र प्रदेश तक जुड़े हैं फर्जी डिग्री बांटने के तार

फर्जी डिग्री देने के आरोप लगाने वाले पांच नाम सामने आए हैं।

हरियाणा से लेकर यूपी, आंध्र प्रदेश तक जुड़े हैं फर्जी डिग्री बांटने के तार

फर्जी डिग्री बांटने का मामला केवल रेवाड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार उत्तर प्रदेश से लेकर आंध्र तक फैले हुए हैं। फर्जी डिग्रियां बांटने वाले यूनिवर्सिटी फीस के नाम पर वसूली जाने वाली राशि से अपने फ्रैचाइजी को वसूली जाने वाली कुल रकम का 40 से 50 फीसदी तक वापस लौट देती थी।

प्रोफेसर की गिरफ्तारी के बाद अब इस मामले में महेंद्रगढ़ में आंध्र की एक यूनिवर्सिटी की फ्रैंचाइजी चलाने वाले हेमंत खुराना का नाम सामने आया है। पुलिस जांच में महेंद्रगढ़ के अलावा हिसार में भी यूनिवर्सिटी की फ्रैंचाइजी होने का मामला सामने आया है।

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अदालत द्वारा गजेंद्र को जेल भेजने के बाद अब पुलिस मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए महेंद्र से हेंमत खुराना को गिरफ्तार करने की योजना बना रही है। इस मामले में अभी तक फर्जी डिग्री देने के आरोप लगाने वाले पांच नाम सामने आए हैं। जिनसें इस गिरोह ने 70 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक की वसूली की हुई है।

माना जा रहा है कि हेमंत की गिरफ्तारी के बाद इस मामले से जुड़े कई बड़े चेहरों से नकाब हट सकते हैं। इससे पहले पुलिस ने अहीर कॉलेज प्रबंधन समिति के चेयरमैन यादुवेंद्र की शिकायत पर धोखाधड़ी के मामले में नामजद गजेंद्र को शुक्रवार को गिरफ्तार किया था।

कमेटी की जांच में भी सही पाए गए थे आरोप

पुलिस द्वारा धोखाधड़ी का मामला दर्ज किए जाने के बाद कॉलेज प्रबंधन कमेटी ने मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन किया था। कमेटी की जांच में डॉ. गजेंद्र की डिग्री को फर्जी पाया गया था। शिकायत में एक यूनिवर्सिटी पर दक्षिणी भारत में फर्जी डिग्री बांटने का आरोप लगाया गया था।

शिक्षा बोर्ड तक थी पहुंच

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों की पहचान स्कूल शिक्षा बोर्ड तक भी थी। बोर्ड में बैठे अधिकारियों के साथ मिलकर आरोपी बोर्ड परीक्षाओं में बैठने वाले विद्यार्थियों के अंक बढ़वाने का काम भी करते थे। ऐसे में इस मामले की अगली परतों महेंद्रगढ़ के हेमंत खुराना की गिरफ्तारी के बाद ही खुल सकती हैं।

कॉलेज के ही प्राध्यापकों ने साधा था संपर्क

डॉ. गजेंद्र के साथ अहीर कॉलेज में कार्यरत प्रो. संदीप शर्मा, धीरज सांगवान, सीमा यादव, गजराज सिंह के अलावा आशीष सांगवान समेत कई लोगों ने अपने- अपने विषयों में पीएचडी करने के लिए गजेंद्र से संपर्क साधा था।

जिसके बाद सभी का यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रेशन करवाया गया। शार्ट कट में पीएचडी की डिग्री चाहने वालों की बढ़ती संख्या देखते ही देखते हजारों में पहुंच गई तथा बाद में कोर्ट ने यूनिवर्सिटी से पीचएचडी करने पर रोक लगा दी।

गिरफ्तारी के बाद चलेगा पता

जांच अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि रिमांड खत्म होने के बाद अदालत ने डॉ. गजेंद्र को जेल भेज दिया है। गजेंद्र से पूछताछ में महेंद्रगढ़ में यूनिवर्सिटी के फ्रैंचाइजी हेमंत खुराना का नाम सामने आया है।

हेमंत खुराना की गिरफ्तारी के बाद ही अब इस मामले में जांच आगे बढ़ सकेगी। हां हिसार में भी एक फ्रैंचाइजी है, परंतु अभी तक की पूछताछ में उनका नाम सामने नहीं आया है। जब तक हेमंत की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक स्पष्ट रूप से कुछ भी कहना सही नहीं है।

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