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रेवाड़ी: केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने एम्स को लेकर कही ये बड़ी बात

केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने रविवार को यादव कल्याण सभा के कार्यक्रम में एम्स को लेकर बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि रेवाड़ी-जयपुर के बीच एम्स जैसी बड़ी संस्था बनाना मेरा खुद का सपना था।

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मनेठी एम्स को लेकर अक्सर विपक्ष व विरोधियों के निशाने पर रहने वाले केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने रविवार को यादव कल्याण सभा के कार्यक्रम में एम्स को लेकर बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि रेवाड़ी-जयपुर के बीच एम्स जैसी बड़ी संस्था बनाना मेरा खुद का सपना था। मेरी इच्छा जानने के बाद मनेठी के ग्रामीणों ने 200 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव स्वीकार करते हुए पाक साफ जमीन होने की बात कही थी। वन विभाग ने ड्रोन से फोटो लेकर लेकर प्रस्तावित जमीन को वन क्षेत्र बताते हुए वन पर्यावरण सलाहकार समिति के सामने पेश कर दिया। प्रदेश में कम वन क्षेत्र होने के कारण पर्यावरण सलाहकार समिति ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। केंद्र व प्रदेश सरकार मनेठी में एम्स निर्माण को लेकर गंभीर है। प्रस्तावित जमीन पर बात नहीं बनी तो मनेठी या आसपास सीमा से लगती जमीन के लेकर बदले में दूसरी जमीन देकर एम्स का निर्माण किया गया है। इसके लिए ग्रामीणों से लिए गए शपथ पत्र मांगे गए हैं। जिनका अध्ययन करने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। परंतु मैं यह कह सकता हूं, कि मनेठी या आसपास ही 2020 में एम्स का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

यादव कल्याण सभा ने केंद्रीय मंत्री के सामने रखे अपने मांगपत्र में अन्य मांगों के साथ मनेठी एम्स निर्माण करवाने की मांग की थी। अपने संबोधन में इसका जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एम्स किसी और का नहीं, बल्कि मेरा अपना सपना था। एम्स के लिए मनेठी के ग्रामीणों द्वारा 200 एकड़ जमीन देने की हामी भरने के बाद मनेठी में एम्स निर्माण की बात प्रधानमंत्री के अलावा केंद्रीय वित्तमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री व मुख्यमंत्री के सामने रखी। सहमति मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने 2015 में इसकी घोषणा कर दी। पूरक बजट में एम्स के लिए बजट का प्रावधान करवाया, परंतु सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित वन पर्यावरण सलाहाकार समिति ने प्रस्तावित जमीन को वन क्षेत्र मानते हुए इंकार कर दिया। इसके बाद भी केंद्र व प्रदेश स्तर पर न केवल निरंतर इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं, बल्कि एम्स का निर्माण करने को लेकर प्रतिबंद्ध भी हैं। प्रस्तावित जमीन पर एम्स निर्माण में आई तकनीकी बाधा को देखते हुए प्रदेश सरकार जमीन खरीदकर भी एम्स बनाने को तैयार है तथा ग्रामीण इसके लिए शपथ पत्र देने को भी तैयार हो गए हैं। मैं चाहता हूं कि एम्स मनेठी या मनेठी की सीमा के आसपास ही बने, परंतु इसके लिए उपयोग होनी वाली जमीन को लेकर किसानों को बदले में दूसरी जगह जमीन दी जाए। केंद्र व प्रदेश की संबंधित एजेंसी इस काम को आगे बढ़ाने में लगी हुई हैं तथा मेरा मानना है कि 2020 में एम्स का निर्माण कार्य हम शुरू कर देंगे।

अपने ही घोपते रहे पीठ में छुरा

देश की आजादी के बाद से अहीर समाज राजनीतिक व आर्थिक रूप से सशक्त हुआ है। समाज ने पहले मेरे परिवार तथा फिर मेरा हमेशा साथ दिया है। मैने भी हमेशा परिवार की बजाय समाज व क्षेत्र के हितों को प्राथमिकता दी है। समाज से मिली ताकत के कारण ही में क्षेत्र में सैनिक स्कूल, सेंटर यूनिवर्सिटी, मैट्रो तथा फ्रंट कॉरिडोर जैसी परियोजनाए लाने में सफल हो पाया। डिफेंस यूनिवर्सिटी जैसी कुछ परियोजनाएं लाने के मेरे प्रयासों को हमारे ही लोगों के विरोध से संभव नहीं हो पाई। राजनीतिक विरोध के कारण सरकारी जमीन पर बनने वाली परियोजनाओं का भी विरोध हुआ। जो क्षेत्र व समाज के लिए सही नहीं कहा जा सकता। बावजूद इसके अपने ही लोग मेरी पीठ में छुर्रा घोंपते रहे, जिसका मुझे राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा।

लोगों के सामने हाथ फैलाने से झलकती है कमजोरी

बड़ी परियोजनों में सहयोग लेना गलत नहीं है, परंतु बार-बार लोगों के सामने हाथ फैलाने से समाज को लेकर गलत छवि बनती है। हमें चाहिए कि किसी दरवाजे पर जाकर दूसरों के सामने हाथ फैलाने की बजाय सामूहिक कार्यो के लिए खुद पहल करने की जरूरत है। जिससे समाज दूसरों के सामने समाज की मजबूत तस्वीर पेश की जा सके।

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