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हरियाणा और पंजाब के स्कूलों में बच्चों की होगी मौज, मिड डे मील में मिलेगा अंडा, दूध और केला

पंजाब और हरियाणा सरकार (Haryana Goverment) ने हाईकोर्ट (High Court) को जानकारी दी है कि पंजाब के स्कूलों में छात्रों को मिड-डे-मील में अंडा, दूध और केला शामिल करने के लिए शिक्षा मंत्री ने 118 करोड़ रूपये की मंजूरी दी है। इसका अब मुख्य सचिव निरीक्षण करेंगे जिसके बाद यह लागू किया जाएगा। वहीं हरियाणा सरकार सीएसआर (Corporati Social Responsibility) के तहत सीआईआई और एफआईसीसीआई को मनवाने में जुटी है ताकि बच्चों को बेहतर भोजन उपलब्ध हो सके।

हरियाणा और पंजाब के स्कूलों में बच्चों की होगी मौज, मिड डे मील में मिलेगा अंडा, दूध और केला

पंजाब और हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट को जानकारी दी है कि पंजाब के स्कूलों में छात्रों को मिड-डे-मील में अंडा, दूध और केला शामिल करने के लिए शिक्षा मंत्री ने 118 करोड़ रूपये की मंजूरी दी है। इसका अब मुख्य सचिव निरीक्षण करेंगे जिसके बाद यह लागू किया जाएगा। वहीं हरियाणा सरकार सीएसआर (Corporati Social Responsibility) के तहत सीआईआई और एफआईसीसीआई को मनवाने में जुटी है ताकि बच्चों को बेहतर भोजन उपलब्ध हो सके। हाईकोर्ट ने इस पर दोनों राज्यों से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

पंजाब के डीपीआई (Director Public Instructions) ने कोर्ट जानकारी दी कि पंजाब स्टेट फूड कमीशन के साथ बैठक में स्कूली बच्चों के खाने में दूध, अंडा और केला शामिल करने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद शिक्षा मंत्री ने प्रस्ताव को मंजूरी दी और 118 करोड़ रूपये का फंड तय किया था। अब यह मामला मुख्य सचिव के पास है। उनकी ओर से फैसले के बाद ही यह अमल में लाया जाएगा। हाईकोर्ट ने इस पंजाब सरकार को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक इस पर ताजा स्थिति बताएं।

वहीं हरियाणा सरकार ने कोर्ट को बताया है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सीआईआई और एफआईसीसीआई, पंचकूला के डीसी और इंडस्ट्री एंड कॉमर्स विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ बैठक की गई। बैठक में सीएसआर के तहत स्कूलों और आंगनबाड़ी के बच्चों को बेहतर भोजन उपलब्ध करवाने पर चर्चा की गई। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को भी अगली सुनवाई पर इसके परिणामों की जानकारी देने को कहा है।

इसके अलावा हाईकोर्ट के आदेश पर चंडीगढ़ प्रशासन ने जानकारी दी कि 350 आंगनबाड़ी में बेहतर भोजन उपबल्ध करवाने का जिम्मा गैर सरकारी संगठनों (NGOs) को सौंपा गया है। इस पर कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन से कहा है कि वह इसका पता लगाएं कि कौन सा एनजीओ बेहतर काम किया है और कैसा भोजन उपलब्ध करवाया है।

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