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पुलिस ने नहीं सुनी अगवा लड़की की सहायता करने वाले की फरीयाद, डॉक्टरों पर अनदेखी का आरोप

बचाव-बचाव का शोर सुनने के बाद अगवा की गई एक लड़की को चार बदमाशों से छुड़वाने का प्रयास किया तो तीन बदमाशों ने मुझे पर हमला कर घायल कर दिया तथा इसके बाद अपने एक अन्य साथी के सथ मिलकर लड़की को लेकर फरार हो गए।

पुलिस ने नहीं सुनी अगवा लड़की की सहायता करने वाले की फरीयाद, डॉक्टरों पर अनदेखी का आरोप

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का यह संदेश जन-जन तक पहुंचाने की कवायद सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर प्रमुखता से देखने को मिलती है। सरकार की इस पहल का सकारात्मक असर देखने को भी मिल रहा है। बावजूद इसके इस पूरे अभियान की जिम्मेदारी अपनी कंधों पर उठाने का दावा करने वाली पुलिस तथा अभियान को सफल बनाने में उसका साथ देने में अहम माने जा रहे डॉक्टर्स ही शायद अभी तक इसकी गंभीरता को नहीं समझ पा रहे हैं।

यह हम नहीं, बल्कि डीसी को भेजी अपनी शिकायत में पाल्हावास निवसी सतपाल ने पुलिस व डॉक्टर्स पर कुछ ऐसे ही आरोप लगाए हैं। मामले की सच और झूठ तो जांच के बाद ही पता चल पाएगी, परंतु शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों ने पुलिस की गंभीरता पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

गांव पाल्हावास निवासी सतपाल ने डीसी को भेजी अपनी शिकायत में बताया कि 20 सितंबर को वह रेलवे स्टेशन के पास गुरावड़ा महिला कॉलेज की तरफ जाने वाली सड़क पर बकरियां चरा रहा था। सड़क के पास खाली पड़ी जमीन पर बचाव-बचाव का शोर सुनने के बाद अगवा की गई एक लड़की को चार बदमाशों से छुड़वाने का प्रयास किया तो तीन बदमाशों ने मुझे पर हमला कर घायल कर दिया तथा इसके बाद अपने एक अन्य साथी के सथ मिलकर लड़की को लेकर फरार हो गए।

ग्रामीणों ने मुझे घायल अवस्था में रोहड़ाई (पाल्हावास) थाना ले गए। मेरे बताने पर पुलिस ने लड़की को अगवा करने की घटना को अनसुना कर मुझे ट्रॉमा सेंटर भेज दिया। जहां डॉक्टर व स्टाफ ने न केवल मेरे बेटे को पुलिस केस न करने के लिए बरगलाया, बल्कि मेरी एलएलआर भी कमजोर करने के लिए मेरे द्वारा खुद चोट मारने की बात लिख दी। दो दिन बाद होश होने पर मेरी एमएलआर तो काट दी गई, परंतु आज तक मेरा एक्सरे पुलिस को नहीं दिया गया है।

उपचार के दौरान मेरे सिर, कनपटी व कान पर टांके आए थे। पीएमओ को शिकायत करने के बावजूद मुझे पूरा उपचार किए बिना ही अस्पताल से निकाल दिया। इसके बाद मैने मामले की लिखित शिकायत एसपी, एसडीएम व सीएमओ को की तथा पीएमओ को रिमांडर भेजा, परंतु आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। डीसी को भेजी शिकायत में एमएलआर व एक्सरे रिपोर्ट के आधार पर मेडिकल बोर्ड से दोबारा मेडिकल जांच करवाने, लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर्स व पुलिस कर्मचारियों तथा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

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