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नहीं पसीजा डॉक्टरों का दिल, ऑपरेशन के इंतजार में जीने की आस खो रही बेटियां

नन्हीं परियों को नया जीवन देने की कोई डाक्टर जहमत नहीं उठा रहा।

नहीं पसीजा डॉक्टरों का दिल, ऑपरेशन के इंतजार में जीने की आस खो रही बेटियां
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रोहतक. एक तरफ प्रदेश सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को जोरशोर से चला रही है वहीं दूसरी तरफ अफसरशाही पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही।

हालात ये हैं कि पीजीआईएमएस रोहतक में आपरेशान का इंतजार कर रही 13 बेटियां महीनों से तिल-तिल मर रही है। हैरत की बात है कि पीजीआईए में इन लाड़लियों के आपरेशन के पैसे भी जमा हो चुके हैं, लेकिन इन नन्हीं परियों को नया जीवन देने की कोई डाक्टर जहमत नहीं उठा रहा।
बेचारियों को तारीख पर तारीख देकर टरकाया जा रहा है। अफसरों की निर्दयता का इससे बड़ा प्रमाण क्या होगा कि आपरेशन के इंतजार में एक लाड़ली तो विकलांग हो चुकी है। फिर भी किसी का दिल नहीं पसीज रहा।
इन 13 बेटियों को दिल की बीमारी है। जिस कारण कई बच्चियों को गंदा खून उनके शरीर के अन्य हिस्सों में जा रहा है। इन गरीब बच्चियों को तत्काल आपरेशन की जरूरत है, लेकिन तारीख मिल रही है।
हेल्थ डिपार्टमेंट ने डेढ़ साल में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों दिल की बीमारियों से ग्रस्त बच्चों को चिंह्ति किया।
एक बच्चे पर 75 से 1.50 लाख का खर्च । यह पैसा सरकार की तरफ से वहन किया जाता है। ये बच्चियां इंतजार में हैं कब उनका ऑपरेशन किया जाएगा।
पीजीआईएमएस द्वारा जब मदीना की अंजलि का आपरेशन करने के लिए समय नहीं दिया तो सिविल अस्पताल ने एम्स दिल्ली से संपर्क किया।
एम्स ने आपरेशन लिए वर्ष 2019 का समय दिया। अंजलि का स्वास्थ लगतार गिरता जा रहा है। उसके नाखून नीले हो गए हैं। जो किसी भी बड़े खतरे का संकेत दे रहे हैं। अंजलि की मां गीता और पिता जयबीर बेटी को तिल-तिल मरते देख रहे हैं।
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