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कांग्रेस-इनेलो के दबदबे वाले पिहोवा में दबे पांव भाजपा दाखिल

हरियाणा विधानसभा चुनावों (Haryana Vidhan Sabha Election 2019) में दशकों तक कांग्रेस-इनेलो के दबदबे वाले पिहोवा विधानसभा क्षेत्र (Pehowa Vidhan Sabha Seat) में भाजपा दाखिल हो गई है। विपक्ष में फूट के कारण पहली बार भाजपा का कमल खिल सकता है।

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पिहोवा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के अंतर्गत आता है। ढ़ाई लाख से अधिक जनसंख्या वाला पिहोवा दशकों तक कांग्रेस-इनेलो का गढ़ रहा है। लेकिन हरियाणा विधानसभा 2019 के चुनावों में विपक्ष ढ़हता दिख रहा है। पिहोवा में पहली बार भाजपा दबे पांव घुसती हुई दिख रही है।

हरियाणा विधानसभा चुनावों के इतिहास में कांग्रेस ने सबसे अधिक 5 बार इस सीट को जीता। लेकिन पिछली बार इनेलो के जसविंद्र सिंह संधू बाजी मारने में कामयाब रहे। सिख बाहुल्य पिहोवा सीट से सर्वाधिक चार बार जसविंद्र सिंह संधू विधायक रहे। इसके अलावा कांग्रेस हरमोहिंद्र सिंह का भी दबदबा रहा। हरियाणा विधानसभा 2014 के चुनावों में भी यह सीट इनेलो के जसविंद्र ने जीती थी। लेकिन 19 जनवरी को निधन हो जाने के बाद से सीट खाली पड़ी हुई थी।






पिहोवा विधानसभा का इतिहास

महाभारत में पिहोवा का उल्लेख, प्रिथुदाका के नाम से किया गया है क्योंकि इसी जगह पर दयालु प्रिथु ने अपने पिता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की थी। यहीं कारण है कि पिहोवा, पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। पिहोवा, थानेसर से 27 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह स्थल, 882 ई. के इतिहास को अपने अस्तित्व में समेटे हुए है लेकिन ऐतिहासिक तथ्यों से पता चलता है कि यह 895 ई. में अस्तित्व में आया। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा पिृथु के पिता अपनी अंतिम सांस सरस्वती पिृतुदाक के निकट लेना चाहते थे, यहीं कारण है कि पिृथु अपने पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए यहां प्रार्थना करने आए थे। कई दिनों तक वह यहां नदी के किनारे खड़े रहे और भगवान की उपासना करते रहे और इस दौरान उन्होने व्रत भी रखा था। यह वही स्थान है जहां माना जाता है कि उपवास करने से मुक्ति और मोक्ष मिल जाता है और इसी वजह से इसे पितृदाक तीर्थ के नाम से जाना जाता है। यहां कई घाट और मंदिर है जो राजा के बलिदान को दर्शाते है।

शिव के बड़े पुत्र ने किया था विश्राम

किंवदंतियों के अनुसार, यह वही स्थान है जहां भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय, शिव व पार्वती की परिक्रमा लगाने के बाद विश्राम करने के लिए बैठे थे और उन्होने अपनी त्वचा को साफ किया था और उस उबटन को मां पार्वती के पास छोड़ दिया था। पिहोवा के बारे में सबसे रूचिकर बात यह है कि यहां महाभारत के काल के परिवारों का रिकॉर्ड रखा हुआ है। इनमें से कुछ रिकॉर्ड खराब भी हो गए है जिन्हें इस्लामी शासकों के द्वारा परिवारिक चिह्न दूर करने के लिए मिटा दिया था।

पिहोवा विधानसभा सीट से अब तक ये रहे विधायक

1968

प्यारा सिंह

कांग्रेस

1972

प्यारा सिंह

कांग्रेस

1977

तारा सिंह

जेएनपी

1982

प्यारा सिंह

कांग्रेस

1987

बलबीर सिंह

लोकदल

1991

जसविंद्र सिंह

जनता पार्टी

1996

जसविंद्र सिंह

एसएपी

2000

जसविंद्र सिंह

इनेलो

2005

हरमोहिंद्र सिंह

कांग्रेस

2009

हरमोहिंदर सिंह

कांग्रेस


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