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सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ बंद रहा पूरी तरह विफल, एससी समाज के लोगों ने शहर में किया प्रदर्शन

एससी, एसटी की पदौन्नति में आरक्षण का प्रावधान नहीं होने के दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ भीम आर्मी के भारत बंद का आह्वान रेवाड़ी में पूरी तरह फैल साबित हुआ। एससी, एसटी के लोगों की पदौन्नति में आरक्षण का दावा करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ बंद रहा पूरी तरह विफल, एससी समाज के लोगों ने शहर में किया प्रदर्शनविरोध प्रदर्शन (प्रतीकात्मक फोटो)

एससी, एसटी की पदौन्नति में आरक्षण का प्रावधान नहीं होने के दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ भीम आर्मी के भारत बंद का आह्वान रेवाड़ी में पूरी तरह फैल साबित हुआ। रविवार का दिन होने के कारण अमूमन ज्यादातर दुकानें बंद होती है, लेकिन आज पहले के मुकाबला काफी ज्यादा दुकानें खुली रही। हालांकि अनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग के लोगों व विभिन्न संगठनों ने शहर में जोरदार प्रदर्शन जरूर कर एसडीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इससे पहले स्थानीय रविदास हॉस्टल में बैठक की तथा केंद्र सरकार से अध्यादेश लाकर इस मामले को संविधान की नौंवी सूची में डालने की मांग की।

गौरतलब है कि 7 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय दिया था, जिसमें कहा गया था कि एससी, एसटी के लोगों की पदौन्नति में आरक्षण का दावा करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। यह राज्यों की इच्छा पर निर्भर करता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर एससी, एसटी के लोगों ने एतराज जताते हुए भीम आर्मी के आह्वान पर आज भारत बंद का ऐलान किया था। बंद को आह्वान पर रविवार सुबह से ही एससी, एसटी के विभिन्न संगठनों के लोग रविवार सुबह स्थानीय सरकूलर रोड स्थित रविदास हॉस्टल में एकत्रित हुए तथा वहां सेवानिवृत जिला शिक्षा अधिकारी लालचंद के नेतृत्व में बैठक करने के बाद प्रदर्शन करते हुए जिला सचिवालय पहुंचे।

सचिवालय पहुंचकर उन्होंने एसडीएम रविंद्र यादव को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से समाज के लोगों में रोष है। कोर्ट का निर्णय उक्त वर्ग के लोगों के साथ अन्याय है। निर्णय असंवैधानिक है। कहा गया है कि संविधान के भाग 3 का शीर्षक ही मूल अधिकार है और इसी भाग के अनुच्छेद 16 में पदौन्नति में आरक्षण दिया जाना उपबंधित है।

ज्ञापन में आशंका जताई गई है कि संभवतया एससी, एसटी व ओबीसी वर्ग के अधिकारों को सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेकर समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। कोर्ट के इस फैसले से केंद्र सरकार की मंशा पर शंका पैदा हो रही है। ज्ञापन में मांग की गई है कि सरकार अध्यादेश लाकर यथाशीघ्र इस निर्णय को निरस्त करें तथा इस मामले को संविधान की नौंवी सूची में डालें ताकि इस प्रकार के मामले कभी अदालत में नहीं जाएं।

प्रदर्शन में हजरस, सेवा स्तंभ, युवा भीम आर्मी रोडवेज एससी एंप्लाईज संघर्ष समिति ऑफ हरियाणा, डॉ. अंबेडकर सोशल वेलफेयर एसोसिएशन, ऑल हरियाणा शेड्यूल कास्ट एंप्लाईज फैडरेशन, आवाज फाउंडेशन, गुरू रविदास मंदिर प्रबंधक कमेटी, मेघवाल समाज कल्याण समिति, एससी-बीसी पावर कारपोरेशन हरियाणा, हमारी आवाज, दलित सेना, संख्यक समाज, अखिल भारतीय मानव कष्ट निवारण समिति, अखिल भारतीय जांगिड़, ब्राह्मण महासभा के अलावा जगदीश प्रसाद डहीनवाल, महेश दत्त, राजेंद्र जिनागल, भगत सिंह सांभरिया, हंसराज चौधरी, मेहरचंद, जेपी भारती, बहादुर सरपंच, आरएस सांभरिया, लक्ष्मीबाई लिसान, अरविंद के अलावा अन्य लोग शामिल थे।


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