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इकलौते बेटे की मौत के बाद घर को बना दिया महिला आश्रम

जिंदगी के 68 बसंत देख चुके धनराज तहलान ने अपना जीवन मानव सेवा को सर्मपित कर दिया है।

इकलौते बेटे की मौत के बाद घर को बना दिया महिला आश्रम
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बहादुरगढ़. जिंदगी के 68 बसंत देख चुके धनराज तहलान ने अपना जीवन मानव सेवा को सर्मपित कर दिया है। करीब तेरह बरस पहले दिल्ली में सड़क हादसे में उनके इकलौते बेटे की मौत हो गई थी, इसके बाद धनराज की जिंदगी का नजरिया ही बदल गया। उन्होंने मानव सेवा को ही अपना मकसद बना लिया और घर को तुड़वाकर उसमें महिला आश्रम, चिकित्सा केंद्र और पुस्तकालय खोल दिया। उनकी पत्नी ने इसमें पूरा साथ दिया। धनराज अब शहर के नागरिक कल्याण संघ से जुड़कर वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
करीब 13 साल पूर्व 13 जुलाई 2002 को दिल्ली के सफदरजंग के नजदीक सड़क दुर्घटना में उनके इकलौते पुत्र नवीन की मौत हो गई थी। इसके बाद धनराज ने नवीन मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट बनाकर खुद को समाज सेवा को सर्मपित कर दिया। बहादुरगढ़ के नेहरू पार्क में डीएसपी वाली गली में अपने मकान को तोड़कर धनराज ने उसे मानव सेवा सदन बना दिया।बीते वर्ष धनराज ने मानव सेवा सदन में पूर्व एमएलसी उदय सिंह मान के हाथों दीनबंधु छोटूराम महिला आर्शम, पार्वती देवी धर्मार्थ चिकित्सा केंद्र और धनराज जनता पुस्तकालय का शुभारंभ करवाया। धनराज कहते हैं कि एक गरीब आदमी की कमाई का कोई स्त्रोत नहीं है, उसकी सेवा करना परम धर्म है।
धनराज ने बताया कि उनके महिला आश्रम में वर्किंग लेडी व पेंशन प्राप्त करने वाली महिलाएं रह सकती हैं। जिनसे मिलने वाली रकम से गरीब व निरार्शित महिलाएं गुजर-बसर कर सकेंगी। अब धनराज के दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता है। उनके इस सफर में उनकी धर्मपत्नी भी उनका साथ देती हैं।
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