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CM Manohar Lal Special Interview : दूसरी पार्टियों से आए नेताओं पर मेहरबानी दिखाने के मूड में नहीं लग रही भाजपा

कुछ ही दिनों बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने वाला है। राज्य की भाजपा सरकार अपने पहले पूर्ण पांच साल के कामकाज के बूते पर चुनाव मैदान में उतरने जा रही है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल अपनी सरकार की उपलब्धियों को सीधे जनता से साझा करने के लिए समूचे प्रदेश में जन आशीर्वाद यात्रा कर रहे हैं। विपक्ष पूरी तरह बिखरा पड़ा है। कांग्रेस, इनेलो, जजपा, लोसुपा, बसपा, आप आदि दल अपने वजूद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कोई भी विपक्षी दल या नेता भाजपा को चुनौती पेश करने की स्थिति में नहीं है। प्रदेश के राजनीतिक हालात, भाजपा सरकार के कामकाज, प्रशासनिक सुधार, चुनाव तैयारियों और भावी एजेंडे को लेकर हरिभूमि के संपादक ओमकार चौधरी ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से विशेष बातचीत की।

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इस विशेष बातचीत में मुख्यमंत्री मनोहर लाल (CM Manohar Lal) ने कहा कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आई है, नौकरियां बिना भेदभाव व बिना सिफारिश योग्य पात्रों को मिल रही हैं, प्रदेश में अनेक बदलाव हुए हैं, क्षेत्रवाद व भाई-भतीजावाद खत्म हुआ है। उन्होंने कहा कि जो गलत काम कर रहे हैं, उन्हें भय लगना ही चाहिए, हम अपनी सरकार के काम के आधार पर जनता के बीच जा रहे हैं। पेश है बातचीत के मुख्य अंश...

प्र : पांच वर्ष में कौन से बड़े बदलाव हुए हैं, जिनका आप उल्लेख करना चाहेंगे

उ : बदलाव तो बहुत हुए हैं परन्तु एक बदलाव जो मैं और जनता महसूस करते हैं, वो है कार्यपद्धति में न्याय को सबसे अहम स्थान देना। न्याय समाज का मूलभूत स्वभाव है। अगर लाइन में कुछ लोग खड़े हैं और योग्य व्यक्ति को सीट मिल गई और जो कम योग्य है, उसे नहीं मिली तो उसे भी संतोष होता है ये सोचकर कि मुझसे योग्य व्यक्ति को मिली है। आगे फिर कोशिश करूंगा। जब सरकार पर लोगों का इस तरह का भरोसा जमता है तो जनता उस सरकार को सिर आंखों पर बैठा लेती है। ये बड़ा बदलाव हम देख रहे हैं। मेरा इसमें विश्वास था और चीजें निखरकर सामने आ रही हैं। आज हम उसका अहसास कर रहे हैं जन समर्थन के रूप में।

प्र : जनमानस में किस तरह के बदलाव देख रहे हैं आप

पिछली सरकारों ने जो किया, उसके अनुभव के आधार पर जनता ने सोचा होगा कि इसे भी देख लेते हैं। कुछ नहीं करेंगे तो दूसरी को ले आएंगे परन्तु सरकार क्या कुछ कर सकती है, ये जनता ने इस शासन काल में देखा और परखा कि सरकार मेरिट पर नौकरियां दे सकती है। ट्रांसफर पोस्टिंग सीनियरिटी के आधार पर कर सकती हैं। मुख्यमंत्री स्वयं अपने विशेषाधिकार छोड़ सकता है व अधिकारियों के विशेषाधिकार भी कम कर सकता है, जिससे हर किसी को लगे कि व्यवस्था के तहत ही मिलेगा।


प्र : 2014 में विधानसभा में 47 सीटें। लोकसभा की दस में से सात सीटें। पांच साल बाद लोकसभा की सभी दस सीटें और 79 विस क्षेत्रों में बढ़त। भाजपा बड़ी ताकत बनकर उभरी है। कांग्रेस-इनेलो टूट रही हैं। वहां अंतर्कलह चरम पर है। भाजपा पर इस कदर जन विश्वास कैसे बढ़ा?

उ : जनता किसी के साथ बंधी हुई नहीं है। उसे हम पर विश्वास हो गया है तो परिवर्तन की इस लहर में वो हमें हर चुनाव जितवा रही है। चाहे गांव पंचायत का चुनाव हों, नगर निकाय का हो। जींद का उप चुनाव हो या लोकसभा का हो। वैसा ही समर्थन अब विधानसभा चुनाव में भी मिल रहा है। जहां तक विपक्षी दलों में बिखराव की बात है, ये उनकी अपनी करनी उनके सामने आ रही है। उनके आंतरिक मसले हैं। किसी पार्टी में तोड़-फोड़ में हमारी कोई रुचि नहीं है। इंडियन नेशनल लोकदल दोनों भाइयों के आपसी झगड़े की वजह से टूटी है। कांग्रेस में महत्वाकांक्षाओं के कारण अंतर्कलह है। इसी के चलते विपक्ष कमजोर होता चला गया है।

प्र: अगर आपको फिर से जनादेश मिलता है तो कौन से ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर पिछले पांच साल में उतना काम नहीं हो सका और जिन पर अगले कार्यकाल में फोकस करना चाहेंगे?

उ: देखिए, ऐसा है। फोकस तो हमारा हर चीज पर था। हां, कुछ चीजों में अभी और आवश्यकता है। जैसे, रोजगार एक विषय है। जितनी अपेक्षा है, उसमें कुछ कमी दिखाई देती है। ये लगातार चलने वाला काम है। हर वर्ष दो लाख युवक अपने को रोजगार प्राप्त करने वाली सूची में जोड़ लेते हैं। सरकारी नौकरी तो बहुत कम होती हैं। कुछ को प्राइवेट जॉब मिलती हैं। कुछ को स्वयं कोई काम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। प्राइवेट और दूसरी जॉब के और अवसर उपलब्ध हों, ऐसी हमारी कोशिश रहेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा। ये तीन क्षेत्र हैं, जिन पर अभी काम करना बहुत जरूरी है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जैसे शिक्षण संस्थान चाहिए, वैसे नहीं है। गरीबों के लिए आयुष्मान योजना लागू हो चुकी है परंतु बीमारियां ज्यादा न हों, इसके लिए वेलनेस सेंटर ज्यादा संख्या में बनें, इस पर ध्यान होगा। सुरक्षा में कानून और व्यवस्था तो है ही, सामाजिक सुरक्षा भी हो, इस पर फोकस रहेगा। ऐसी योजनाएं हम बना रहे हैं कि हर व्यक्ति को लगे कि उसकी जीवन सामाजिक तौर पर सुरक्षित है। ईज आफ लीविंग पर फोकस रहेगा।

प्र: बड़ी संख्या में दूसरे दलों के विधायक, पूर्व विधायक और नेता भाजपा में आ रहे हैं। वो टिकटार्थी भी होंगे। आपके उन समर्पित कार्यकर्ताओं का क्या होगा, जो संघर्ष के साथी रहे हैं।

उ: देखिए, हमारा पार्टी का इतिहास बहुत पुराना है। जो हमारा मूल कार्यकर्ता है, उसके सामने कोई व्यक्तिगत एजेंडा नहीं होता है। समाज हित में, देश हित में वो सोचते हैं। जो लोग आ रहे हैं, उनकी पार्टी के प्रति निष्ठा और जीत की संभावना को देखकर ही फैसला होगा। इस पर भी पहला फीडबैक कार्यकर्ता की ओर से ही मिलता है। मीडिया भी है। सर्वे एजेंसियां भी हैं। केन्द्र के लोग हैं। उनके पास भी सूचनाएं होती हैं। एक समझ विकसित कर ली जाती है। दूसरे, हमारे कार्यकर्ताओं में इतनी समझ है कि चुनाव एक ही व्यक्ति को लड़ना है। आसानी से रास्ता निकल आएगा।


प्र : ये चमत्कार कैसे हो रहा है कि दूसरे दलों के मुस्लिम विधायक भी अब भाजपा में शामिल हो रहे हैं। पहले ऐसा देखने को नहीं मिलता था।

उ: कांग्रेस ने हमारे संगठनों के प्रति बहुत मिथ्या प्रचार किया है कि ये आएंगे तो मुसलमानों को भगा देंगे। मार देंगे। उनके प्रति भेदभाव करेंगे। जब हमारी सरकारें आईं। जैसे प्रदेशों में आई या केन्द्र में। आज मुसलमान भी अपने अधिकारों और सुविधाओं को वैसे ही एंजाय कर रहा है, जैसे समाज के अन्य वर्ग करते हैं। कोई भेदभाव नहीं है। उन्हें अब इसका अहसास हो चुका है कि जैसा मिथ्या प्रचार कांग्रेस और दूसरे दल हमारे बारे में करते थे, वैसा कुछ नहीं है।

प्र: एक चमत्कार राज्यसभा में भी देखने को मिल रहा है। पिछली मोदी सरकार के बहुत से जरूरी विधेयक भी रोक दिए जाते थे। अब विरोधी दल भी सहयोग कर रहे हैं। चार महत्वपूर्ण बिल मानसून सत्र में लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी आसानी से पारित हो गए।

उ : देखिए, हर कोई मन से बदलकर आ रहा है, ऐसा तो नहीं है। एक प्रवृत्ति होती है कि सुविधा का जो रास्ता चल रहा है, उसके साथ गंगा में हाथ धो लो। अब जबकि उन्हें लग रहा है कि जनता एक विचार के साथ जुड़कर के उस दिशा में आगे बढ़ रही है, तो वो जन भावनाओं के विपरीत दिशा में नहीं जाना चाहते। आज जन भावना अनुच्छेद 370 हटाने के पक्ष में एकजुट हो चुकी है। अब तो इसे हटाने के पक्ष में कांग्रेस के भी कई लोगों ने पैरोकारी शुरू कर दी है।

प्र: सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार दहशत का माहौल बना रही है। उन्होंने कहा है कि राजीव गांधी को इनसे बड़ा बहुमत मिला था परंतु उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया।

उ: जिन लोगों को ये भय है कि हमारी काली करतूतों का पर्दाफाश हो जाएगा और कहीं न कहीं ये विषय खुल जाएंगे, उसके भयवश वो इस तरह का वातावरण बनाना चाहते हैं कि एक भय का वातावरण बन रहा है। जो गलत काम कर रहे हैं, उनको तो भय लगना ही चाहिए। जिसकी दाढ़ी में तिनका होता है, उसका हाथ ही उस पर पहुंचता है। उन्हें भी लगता है कि अब उन पर भी शिकंजा कसा जाने वाला है। इसलिए इस तरह की बयानबाजी की जा रही है।

प्र. आम तौर पर विपक्षी दलों के नेता सड़कों की खाक छानते हैं। मुख्यमंत्री हेलीकाप्टर से उतरते हैं। सभाएं करते हैं और कर्त्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। आपने बस के जरिए सभी विधानसभा क्षेत्रों में जनता के बीच जाने का फैसला क्यों लिया?

उ: देखिए, चुनाव एक ऐसा लोकतांत्रिक उत्सव होता है जिसमें सब पार्टियों को जन संपर्क करना ही चाहिए। जब सत्ता में नहीं थे, तब भी। आज सत्ता में हैं-तब भी। यात्रा जनसंपर्क का सबसे बड़ा साधन बनती है। हमने जनता का समर्थन होते हुए भी यह तय किया कि जनता के बीच जाना चाहिए। इस यात्रा से जनता से फीड़बैक भी मिल रहा है। उन्हें भी अच्छा लग रहा है। हमें भी अच्छा लग रहा है। पता चल रहा है कि जनता कहां खड़ी है। किसके सात खड़ी है।


प्र. : जहां आपको बोलने का अवसर मिलता है, वहां इस यात्रा के दौरान जनता से क्या कह रहे हैं।

उ: हम यही कह रहे हैं कि 2014 में आपने हमें जनादेश दिया था। 2019 तक का हमारे पास जनसेवा करने का लाइसैंस था, जो एक्सपायर हो रहा है। अगले पांच साल के लिए रिन्यु कर दीजिए। जितनी तेजी से हमने इस दौरान काम किया। व्यवस्था में परिवर्तन का काम किया है। खुशहाली के लिए काम किया। समस्याओं में व्याप्त कुछ समस्याओं को लेकर भी हमने जन जागरण किया। बेटी बचाओ है। पर्यावरण है। पानी बचाने की बात है। स्वच्छता अभियान है। इन सब विषयों को और तेज गति से हम करेंगे। यही लोगों को विश्वास दिला रहे हैं।

जनता किसी के साथ बंधी हुई नहीं है। उसे हम पर विश्वास हो गया है तो परिवर्तन की इस लहर में वो हमें हर चुनाव जितवा रही है। चाहे गांव पंचायत का चुनाव हों, नगर निकाय का हो। जींद का उप चुनाव हो या लोकसभा का हो। वैसा ही समर्थन अब विधानसभा चुनाव में भी मिल रहा है। जहां तक विपक्षी दलों में बिखराव की बात है, ये उनकी अपनी करनी उनके सामने आ रही है। उनके आंतरिक मसले हैं। किसी पार्टी में तोड़-फोड़ में हमारी कोई रुचि नहीं है। इंडियन नेशनल लोकदल दोनों भाइयों के आपसी झगड़े की वजह से टूटी है। कांग्रेस में महत्वाकांक्षाओं के कारण अंतर्कलह है। इसी के चलते विपक्ष कमजोर होता चला गया है।

प्र. : अगर आपको फिर से जनादेश मिलता है तो कौन से ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर पिछले पांच साल में उतना काम नहीं हो सका और जिन पर अगले कार्यकाल में फोकस करना चाहेंगे?

उ : देखिए, ऐसा है। फोकस तो हमारा हर चीज पर था। हां, कुछ चीजों में अभी और आवश्यकता है। जैसे, रोजगार एक विषय है। जितनी अपेक्षा है, उसमें कुछ कमी दिखाई देती है। ये लगातार चलने वाला काम है। हर वर्ष दो लाख युवक अपने को रोजगार प्राप्त करने वाली सूची में जोड़ लेते हैं। सरकारी नौकरी तो बहुत कम होती हैं। कुछ को प्राइवेट जॉब मिलती हैं। कुछ को स्वयं कोई काम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। प्राइवेट और दूसरी जॉब के और अवसर उपलब्ध हों, ऐसी हमारी कोशिश रहेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा। ये तीन क्षेत्र हैं, जिन पर अभी काम करना बहुत जरूरी है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जैसे शिक्षण संस्थान चाहिए, वैसे नहीं है। गरीबों के लिए आयुष्मान योजना लागू हो चुकी है परंतु बीमारियां ज्यादा न हों, इसके लिए वेलनेस सेंटर ज्यादा संख्या में बनें, इस पर ध्यान होगा। सुरक्षा में कानून और व्यवस्था तो है ही, सामाजिक सुरक्षा भी हो, इस पर फोकस रहेगा। ऐसी योजनाएं हम बना रहे हैं कि हर व्यक्ति को लगे कि उसकी जीवन सामाजिक तौर पर सुरक्षित है। ईज आफ लीविंग पर फोकस रहेगा।

प्र. : बड़ी संख्या में दूसरे दलों के विधायक, पूर्व विधायक और नेता भाजपा में आ रहे हैं। वो टिकटार्थी भी होंगे। आपके उन समर्पित कार्यकर्ताओं का क्या होगा, जो संघर्ष के साथी रहे हैं।

उ : देखिए, हमारा पार्टी का इतिहास बहुत पुराना है। जो हमारा मूल कार्यकर्ता है, उसके सामने कोई व्यक्तिगत एजेंडा नहीं होता है। समाज हित में, देश हित में वो सोचते हैं। जो लोग आ रहे हैं, उनकी पार्टी के प्रति निष्ठा और जीत की संभावना को देखकर ही फैसला होगा। इस पर भी पहला फीडबैक कार्यकर्ता की ओर से ही मिलता है। मीडिया भी है। सर्वे एजेंसियां भी हैं। केन्द्र के लोग हैं। उनके पास भी सूचनाएं होती हैं। एक समझ विकसित कर ली जाती है। दूसरे, हमारे कार्यकर्ताओं में इतनी समझ है कि चुनाव एक ही व्यक्ति को लड़ना है। आसानी से रास्ता निकल आएगा।

प्र. : ये चमत्कार कैसे हो रहा है कि दूसरे दलों के मुस्लिम विधायक भी अब भाजपा में शामिल हो रहे हैं। पहले ऐसा देखने को नहीं मिलता था।

उ : कांग्रेस ने हमारे संगठनों के प्रति बहुत मिथ्या प्रचार किया है कि ये आएंगे तो मुसलमानों को भगा देंगे। मार देंगे। उनके प्रति भेदभाव करेंगे। जब हमारी सरकारें आईं। जैसे प्रदेशों में आई या केन्द्र में। आज मुसलमान भी अपने अधिकारों और सुविधाओं को वैसे ही एंजाय कर रहा है, जैसे समाज के अन्य वर्ग करते हैं। कोई भेदभाव नहीं है। उन्हें अब इसका अहसास हो चुका है कि जैसा मिथ्या प्रचार कांग्रेस और दूसरे दल हमारे बारे में करते थे, वैसा कुछ नहीं है।

प्र. : एक चमत्कार राज्यसभा में भी देखने को मिल रहा है। पिछली मोदी सरकार के बहुत से जरूरी विधेयक भी रोक दिए जाते थे। अब विरोधी दल भी सहयोग कर रहे हैं। चार महत्वपूर्ण बिल मानसून सत्र में लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी आसानी से पारित हो गए।

उ : देखिए, हर कोई मन से बदलकर आ रहा है, ऐसा तो नहीं है। एक प्रवृत्ति होती है कि सुविधा का जो रास्ता चल रहा है, उसके साथ गंगा में हाथ धो लो। अब जबकि उन्हें लग रहा है कि जनता एक विचार के साथ जुड़कर के उस दिशा में आगे बढ़ रही है, तो वो जन भावनाओं के विपरीत दिशा में नहीं जाना चाहते। आज जन भावना अनुच्छेद 370 हटाने के पक्ष में एकजुट हो चुकी है। अब तो इसे हटाने के पक्ष में कांग्रेस के भी कई लोगों ने पैरोकारी शुरू कर दी है।


प्र. : सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार दहशत का माहौल बना रही है। उन्होंने कहा है कि राजीव गांधी को इनसे बड़ा बहुमत मिला था परंतु उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया।

उ : जिन लोगों को ये भय है कि हमारी काली करतूतों का पर्दाफाश हो जाएगा और कहीं न कहीं ये विषय खुल जाएंगे, उसके भयवश वो इस तरह का वातावरण बनाना चाहते हैं कि एक भय का वातावरण बन रहा है। जो गलत काम कर रहे हैं, उनको तो भय लगना ही चाहिए। जिसकी दाढ़ी में तिनका होता है, उसका हाथ ही उस पर पहुंचता है। उन्हें भी लगता है कि अब उन पर भी शिकंजा कसा जाने वाला है। इसलिए इस तरह की बयानबाजी की जा रही है।

प्र. : आम तौर पर विपक्षी दलों के नेता सड़कों की खाक छानते हैं। मुख्यमंत्री हेलीकाप्टर से उतरते हैं। सभाएं करते हैं और कर्त्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। आपने बस के जरिए सभी विधानसभा क्षेत्रों में जनता के बीच जाने का फैसला क्यों लिया?

उ : देखिए, चुनाव एक ऐसा लोकतांत्रिक उत्सव होता है जिसमें सब पार्टियों को जन संपर्क करना ही चाहिए। जब सत्ता में नहीं थे, तब भी। आज सत्ता में हैं-तब भी। यात्रा जनसंपर्क का सबसे बड़ा साधन बनती है। हमने जनता का समर्थन होते हुए भी यह तय किया कि जनता के बीच जाना चाहिए। इस यात्रा से जनता से फीडबैक भी मिल रहा है। उन्हें भी अच्छा लग रहा है। हमें भी अच्छा लग रहा है। पता चल रहा है कि जनता कहां खड़ी है। किसके सात खड़ी है।

प्र. : जहां आपको बोलने का अवसर मिलता है, वहां इस यात्रा के दौरान जनता से क्या कह रहे हैं।

उ : हम यही कह रहे हैं कि 2014 में आपने हमें जनादेश दिया था। 2019 तक का हमारे पास जनसेवा करने का लाइसैंस था, जो एक्सपायर हो रहा है। अगले पांच साल के लिए रिन्यु कर दीजिए। जितनी तेजी से हमने इस दौरान काम किया। व्यवस्था में परिवर्तन का काम किया है। खुशहाली के लिए काम किया। समस्याओं में व्याप्त कुछ समस्याओं को लेकर भी हमने जन जागरण किया। बेटी बचाओ है। पर्यावरण है। पानी बचाने की बात है। स्वच्छता अभियान है। इन सब विषयों को और तेज गति से हम करेंगे। यही लोगों को विश्वास दिला रहे हैं।

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