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हरियाणा : इनेलो, जेजेपी और AAP को मतदाताओं ने सिरे से नकार, खिलाया 'कमल', जानें पूरा रिजल्ट

इनेलो, जेजेपी और आप को मतदाताओं ने सिरे से नकार दिया है। हिसार को छोडकर कहीं भी जननायक जनता दल, इंडियन नेशनल लोकदल और आप पार्टी के प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। लाख वोटों तक भी पहुंचने में प्रत्याशियों को पसीना आ गया।

हरियाणा : इनेलो, जेजेपी और AAP को मतदाताओं ने सिरे से नकार, खिलाया

विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुए आम चुनावों में वंशवाद की राजनीति को एक तरह से हरियाणा की जनता ने हाशिए पर डाल दिया है। पहले इनेलो का बिखराव, फिर जननायक जनता पार्टी का गठन और फिर जींद उपचुनाव के बाद एक तरह से हरियाणा में अब केवल दो ही पार्टियां बच गई हैं।

इनेलो, जेजेपी और आप को मतदाताओं ने सिरे से नकार दिया है। हिसार को छोडकर कहीं भी जननायक जनता दल, इंडियन नेशनल लोकदल और आप पार्टी के प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। लाख वोटों तक भी पहुंचने में प्रत्याशियों को पसीना आ गया। इन चुनावों का असर आगामी विधानसभा चुनाव में इन क्षेत्रीय पार्टियों की संभावनाओं पर भी पडेगा।

हिसार: हिसार में दुष्यंत चौटाला ने अपनी सीट भाजपा के बृजेंद्र सिंह के हाथों गंवा दी है। दुष्यंत के कंधे पर जननायक जनता पार्टी का भी कार्यभार था। इससे पहले जींद उपचुनाव में हार मिली थी और अब उनकी पार्टी का कोई भी प्रत्याशी जनता के द्वारा पंसद नहीं किया गया है, ऐसे में दुष्यंत पर काफी दबाव भी रहेगा। इनेलो ने हिसार से सुरेश कौथ को टिकट दी थी लेकिन वो वोटों के अकाल से जूझते नजर आए। एक तरह से ये लगा कि इनेलो का तो हिसार में अस्तित्व ही खत्म हो चुका है। यही हाल बसपा और लोसुपा के प्रत्याशी सुरेंद्र शर्मा का रहा।

सोनीपत: सोनीपत में जजपा की टिकट पर उतरे दिग्विजय सिंह भी एक एक वोटों के लिए संघर्ष करते नजर आए। कौशिक और हुड्डा के बीच मुकाबले में दिगिवजय को मतदाताओं ने नकार दिया। जींद उपचुनाव के बाद ये दूसरी हार गई। यहां पर बसपा-लोसुपा प्रत्याशी राजबाला भी कोई करिश्मा नहीं दिखा पाए और इसी तरह इनेलो के प्रत्याशी सुरेंद्र छिक्कारा का भी बुरा हाल रहा।

करनाल: करनाल में तो सुरेंद्र भाटिया की सुनामी आई हुई थी और इस सुनामी में इनेलो का प्रत्याशी धर्मबीर पाढा कहीं दिखाई ही नहीं दिए। यहां जजपा और आप के प्रत्याश्याी कृष्ण अग्रवाल भी बुरी तरह हारे हैं वहीं रोड वोटों पर दांव खेलने वाले बसपा लोसुपा प्रत्याशी पंकज चौधरी का भी जनता को पसंद नहीं आए हैं।

कुरुक्षेत्र: कुरुक्षेत्र में भी नायब सैनी की आंधी चली और इस आंधी अभय सिंह चौटाला के पुत्र अर्जुन चौटाला मतदाताओं की पसंद नहीं बन सके और सम्मानजक वोट भी हासिल नहीं कर पाए। राजकुमार सैनी यहां से सांसद रहे हैं और उनकी पार्टी की प्रत्याशी शशि सैनी बुरी तरह हारी हैं। जजपा आप गठबंधन प्रत्याशी जयभगवान शर्मा भी पहचान नहीं बना सके हैं।

सिरसा: सिरसा में लोसुपा बसपा प्रत्याशी जनकराज अटवाल जहां वोटों को तरसते दिखाई दिए वहीं ये इनेलो का गढ था और यहां से चरणजीत सिंह रोडी भी जनता ने सिरे से नकार दिया। जजपा के प्रत्याशी निर्मल जीत सिंह मल्हडी लोक गायक हैं लेकिन मतदाता उनकी धुन पर नहीं नाचे और पहली बार यहां कमल खिला दिया। अब तक की इनेलो की सबसे बुरी हार उनके गढ में ये रही है।

भिवानी महेंद्रगढ: विदेश से आकर चुनावी दंगल में ताल ठोकने वाले स्वाति यादव को अहीरवाल के मतदाताओं ने ही वोट नहीं दिया वहीं बसपा लोसुपा गठबंधन के प्रत्याशी पायलट भी अपनी चुनावी कार को सही तरह से नहीं दौडा पाए। इनेलो के बलवान यादव का वोटों की सूची में नाम ढूंढने से भी नहीं मिल रहा था।

फरीदाबाद: बसपा के मनधीर सिंह मान जाट मतदाताओं के बीच कोई जगह नहीं बना सके तो दूसरों की बात ही क्या की जाए। आप के प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद चुनाव में अपने नाम के आगे पंडित लगाकर समीकरण बदलने चले थे लेकिन बात नहीं बनी। इनेलो के महेंद्र सिंह चौहान का दूसरे प्रत्याशियों की तरह हाल रहा।

गुरुग्राम: फरीदाबाद में भी बसपा लोसुपा ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारा था लेकिन बात नहीं बनी। जेजेपी और आप ने बहुत बढे लिखे और अच्छी छवि के उम्मीदवार महमूद खान को टिकट दी लेकिन जनता ने उन्हें नेता के रूप में वोट देना जरूरी नहीं समझा। इनेलो के बीरेंद्र राणा ना चुनाव में जोर पकड सके और ना जनता में।

रोहतक: रोहतक में अरविंद शर्मा और दीपेंद्र में मुकाबला कांटे का रहा। जेजेपी की उम्मीद प्रदीप देशवाल इसके चलते हाशिए पर चले गए वहीं किशन लाल पांचाल बसपा-लोसुपा के रथ पर चढकर कोई कमाल नहीं दिखा सके। इनेलो के धर्मबीर फौजी ने लोगों ने सामने वोट की फरियाद तो की लेकिन ये कहीं असर में दिखाई नहीं नहीं दी।

अंबाला: रत्नलाल कटारिया ने सैलजा से अपनी हार का हिसाब चुकता कर लिया लेकिन मेहनत करने के बावजूद बसपा के नरेश सारण मतदाताओं की पसंद नहीं बन सके। जेजेपी और आप के उम्मीद्वार पृथ्वी राज भी नाकाम रहे तो इनेलाे रामपाल को इस दौर में किसी ने पूछा ही नहीं।

निष्कर्ष: जननायक जनता पार्टी, इंडियन नेशनल लोकदल, लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आप के तीस प्रत्याशियों में केवल दुष्यंत चौटाला ही सम्मानजनक हार हारे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए ये संकेत हैं कि भाजपा के उत्साह के सामने केवल कांग्रेस ही थोडी बहुत हिम्मत जुटा पाएगी बाकी क्षेत्रीय दल केवल अस्तित्व की लडाई ही लडेंगे।

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