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''अपना घर'' मामला: मासूमों के गुनहगारों को मिली सजा, जसवंती देवी समेत तीन को उम्रकैद

रोहतक के बहुचर्चित ‘अपना घर’ मामले में मुख्य दोषी जसवंती देवी को कोर्ट ने आज शुक्रवार को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

रोहतक के बहुचर्चित ‘अपना घर’ मामले में मुख्य दोषी जसवंती देवी को कोर्ट ने आज शुक्रवार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जसवंती देवी के साथ-साथ कोर्ट ने दो और आरोपियों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।

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छह साल में 121 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, 62 बच्चों और 65 महिलाओं की डॉक्टरी जांच की गई, सीबीआई की अदालत में सुनवाई हुई, तब जाकर जसवंती और उसके सहयोगियों को आज सजा का ऐलान हुआ।
पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत के जज जगदीप सिंह ने बीती 18 अप्रैल को जसवंती देवी, उसके भाई जसवंत, बेटी सुषमा उर्फ सिमी, दामाद जय भगवान, चचेरी बहन शीला, सहेली रोशनी, ड्राइवर सतीश, कर्मचारी रामप्रकाश सैनी, काउंसलर वीना को दोषी करार दिया था।
राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की टीम ने 9 मई 2012 को अपना घर में छापा मारा था। यहां से 103 बच्चियों- युवतियों को छुड़ाया गया था। आयोग ने खुलासा किया था कि अपना घर में बच्चियों का शारीरिक व मानसिक शोषण जा रहा था।

ऐसे हुआ खुलासा

अपना घर में हो रहे जुल्म से बचकर तीन लड़कियां भाग गई थी। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कस्टडी में बाल संरक्षण आयोेग के समक्ष यहां होने वाले कारनामों का खुलासा किया था। इसके बाद राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की टीम ने 8 मई 2012 की रात को रोहतक के अपना घर में छापा मारा था। यहां से 103 बच्चियों-युवतियों को छुड़ाया गया। तभी खुलासा हुआ कि यहां बच्चियों-युवतियों का शारीरिक व मानसिक शोषण किया जाता है। जून 2012 को मामल सीबीआई को सौंप दिया। 30 मार्च को पंचकूला की सीबीआई में एक पीडि़ता ने डांस पार्टियों में भेजने का खुलासा किया था।
2012 में खुलासा होने के बाद अपना घर में मिली बच्चियों और महिलाओं को पानीपत के बिंझोल स्थित अनाथालय में भिजवा दिया गया था। वहीं कुछ को हांसी के अनाथालय में भिजवाया था।
जसवंती को वर्ष 2011 में इंदिरा गांधी महिला शक्ति पुरुस्कार से भी नवाजा जा चुका है। मदवि के ऑडिटोरियम में 26 मार्च को यह पुरस्कार दिया गया था। 15 अगस्त को प्रशासन ने सम्मानित भी किया था। खुलासा होने के बाद सभी सम्मान वापस ले लिए गए थे।
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