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समाज सुधार के काम को आगे बढ़ाती हैं ''खाप पंचायतें'': मनोहर लाल खट्टर

सीएम खट्टर ने कहा कि खाप पंचायतें समाज की उपयोगी संस्थाएं हैं

समाज सुधार के काम को आगे बढ़ाती हैं
हरियाणा. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि खाप पंचायतें समाज की ‘उपयोगी संस्थाएं’ हैं, जो समाज सुधार के काम को आगे बढ़ाती हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि एकाध गलती के कारण उन्हें पूरी तरह गलत नहीं ठहराया जा सकता। खाप पंचायतों का अपना मजबूत आधार है और उन पर प्रतिबंध लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, खट्टर ने कोलकाता में पीटीआई से कहा कि इनका गठन सरकार द्वारा नहीं किया गया है। ये खाप पंचायतें पिछले 800 सालों से हैं। इन पंचायतों को उन्हीं इलाकों के लोगों ने बनाया था। उन्होंने दहेज व्यवस्था के खिलाफ खड़े होने, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और लैंगिक अनुपात जैसे मुद्दों के खिलाफ आवाज उठाने समेत विभिन्न समाज सुधार के काम किए हैं। उन्होंने कहा कि मैं बल्कि यह महसूस करता हूं कि ये समाज की उपयोगी संस्थाएं हैं। ऐसा नहीं है कि वे किसी गलत काम में शामिल रही है। खाप एक बड़ी पंचायत है। उत्तर भारत के विभिन्न इलाकों में संचालित खाप पंचायतें समय समय पर कथित रूप से ‘ऑनर किलिंग’ और ‘अजीबोगरीब फरमानों’ को लेकर सुखिर्यों में रही हैं, जिनकी विभिन्न पक्षों द्वारा आलोचना भी की गई है।
खाप पंचायतों को लेकर पैदा हुए विभिन्न विवादों के संबंध में खट्टर ने कहा कि एकाध घटना या गलती खाप पंचायत को पूरी तरह गलत नहीं बनाती। यहां तक कि इंसान और संस्थाएं भी गलती करती हैं। खाप पंचायतों की अपनी एक ताकत है। गौवध और गौमांस खाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने अपने राज्य में गौवध पर प्रतिबंध लगा दिया है और हमें मुस्लिमों का भी समर्थन हासिल है। राज्य विधानसभा में विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया गया है। बंगाल जैसे राज्यों में गौवध को प्रतिबंधित किए जाने के बारे में पूछे जाने पर खट्टर ने कहा कि मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। हमारे यहां कोई गौवध को सकारात्मक तरीके से नहीं लेता। अपनी सरकार की उपलब्धियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी उपलब्धि भरोसा बहाली की है।
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